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Gorakhpur News: एमएमएमयूटी के शिक्षक अब बन सकेंगे सीनियर प्रोफेसर
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शिक्षक भी अब सीनियर प्रोफेसर बन सकेंगे। उनका एकेडमिक लेवल भी 14 से बढ़कर 15 हो जाएगा। अर्ह प्रोफेसर एक से 30 जून के बीच आवेदन कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों में सीनियर प्रोफेसर कैडर के लिए मानक तय किए हैं। इसके मुताबिक, संबंधित शिक्षक ने प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष पूर्ण कर लिए हों। शिक्षक के प्रोफेसर रहने के दौरान यूजीसी से लिस्टेड जर्नल्स में न्यूनतम 10 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए हों। प्रोफेसर रहने के दौरान उनके मार्गदर्शन में न्यूनतम दो शोधार्थियों ने पीएचडी की उपाधि हासिल की हो। इसके अलावा कम से कम एक अनुसंधान परियोजना में उनका योगदान रहा हो।
यूजीसी के दिशा-निर्देशों के बाद भी अब तक प्राय: केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में ही सीनियर प्रोफेसर का कैडर मिलता रहा है। विश्वविद्यालयों में यह पद आमतौर पर सीधी भर्ती के बजाय पदोन्नति या कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के माध्यम से भरा जाता है। बताया जा रहा है कि कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सभी विश्वविद्यालयों को इसे लागू करने का निर्देश दिया है। इसी क्रम में एमएमएमयूटी में इस योजना को पहली बार लागू करने के लिए कुलसचिव की ओर से आदेश जारी किया गया है।
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आदेश के मुताबिक, अर्ह शिक्षकों को अपना आवेदन पत्र समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पूर्ण करना होगा। इसके बाद आवेदन की एक प्रति 30 जून तक कुलसचिव कार्यालय में प्रेषित करनी होगी।
पद के साथ बढ़ेगा वेतनमान भी
एमएमएमयूटी में अब तक प्रोफेसरों का अधिकतम लेवल पे मैट्रिक्स-14 ही है। इसके बाद पद नहीं होने के कारण उनका लेवल 14 पर ही ठहर जाता है। सीनियर प्रोफेसर बन जाने के बाद उनका लेबल-15 हो जाएगा। इससे पद के साथ उनका वेतनमान भी बदल जाएगा। बताया जा रहा है कि इस योजना का लाभ करीब 15 शिक्षकों को मिल सकता है।
यूजीसी और एआईसीटीई के दिशा-निर्देशाें के तहत सीनियर प्रोफेसर के लिए अर्ह शिक्षकों से आवेदन मांगे गए हैं। पदोन्नति से शिक्षकों का उत्साह बढ़ेगा और उसका नतीजा शोध और नवाचार के रूप में दिखेगा। आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद चयन समिति गठित कर जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
- प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा, कुलपति, एमएमएमयूटी
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों में सीनियर प्रोफेसर कैडर के लिए मानक तय किए हैं। इसके मुताबिक, संबंधित शिक्षक ने प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष पूर्ण कर लिए हों। शिक्षक के प्रोफेसर रहने के दौरान यूजीसी से लिस्टेड जर्नल्स में न्यूनतम 10 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए हों। प्रोफेसर रहने के दौरान उनके मार्गदर्शन में न्यूनतम दो शोधार्थियों ने पीएचडी की उपाधि हासिल की हो। इसके अलावा कम से कम एक अनुसंधान परियोजना में उनका योगदान रहा हो।
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यूजीसी के दिशा-निर्देशों के बाद भी अब तक प्राय: केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में ही सीनियर प्रोफेसर का कैडर मिलता रहा है। विश्वविद्यालयों में यह पद आमतौर पर सीधी भर्ती के बजाय पदोन्नति या कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के माध्यम से भरा जाता है। बताया जा रहा है कि कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सभी विश्वविद्यालयों को इसे लागू करने का निर्देश दिया है। इसी क्रम में एमएमएमयूटी में इस योजना को पहली बार लागू करने के लिए कुलसचिव की ओर से आदेश जारी किया गया है।
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आदेश के मुताबिक, अर्ह शिक्षकों को अपना आवेदन पत्र समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पूर्ण करना होगा। इसके बाद आवेदन की एक प्रति 30 जून तक कुलसचिव कार्यालय में प्रेषित करनी होगी।
पद के साथ बढ़ेगा वेतनमान भी
एमएमएमयूटी में अब तक प्रोफेसरों का अधिकतम लेवल पे मैट्रिक्स-14 ही है। इसके बाद पद नहीं होने के कारण उनका लेवल 14 पर ही ठहर जाता है। सीनियर प्रोफेसर बन जाने के बाद उनका लेबल-15 हो जाएगा। इससे पद के साथ उनका वेतनमान भी बदल जाएगा। बताया जा रहा है कि इस योजना का लाभ करीब 15 शिक्षकों को मिल सकता है।
यूजीसी और एआईसीटीई के दिशा-निर्देशाें के तहत सीनियर प्रोफेसर के लिए अर्ह शिक्षकों से आवेदन मांगे गए हैं। पदोन्नति से शिक्षकों का उत्साह बढ़ेगा और उसका नतीजा शोध और नवाचार के रूप में दिखेगा। आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद चयन समिति गठित कर जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
- प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा, कुलपति, एमएमएमयूटी