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Gorakhpur News: फ्लोरल वेस्ट से अगरबत्ती और इत्र बनाने की तैयारी

Sat, 15 Nov 2025 12:27 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 15 Nov 2025 12:27 AM IST
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Preparations to make incense sticks and perfume from floral waste
- नगर निगम लगाएगा बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट, ग्रीन इनोवेशन सिटी के रूप में गोरखपुर को विकसित करने की तैयारी
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- बड़े पैमाने पर फ्लोरल वेस्ट यूनिट स्थापित करने की योजना तैयार

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नगर निगम धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फूलों, मालाओं और पूजा सामग्री के वैज्ञानिक निस्तारण को नई दिशा देने जा रहा है। ‘निर्मालया वाहन’ योजना के तहत फिलहाल मंदिरों से रोजाना एकत्र किए जा रहे फूल सिर्फ कंपोस्टिंग के माध्यम से खाद में बदले जा रहे हैं लेकिन अब निगम इस व्यवस्था को औद्योगिक स्तर तक विस्तारित करने की तैयारी में है।
इसके लिए बड़े पैमाने पर फ्लोरल वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना तैयार की गई है, जिसे पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर विकसित किया जाएगा। निगम की ओर से कई निजी कंपनियों और उद्यमियों से बातचीत जारी है।
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नई यूनिट में फ्लोरल वेस्ट से जैविक खाद के अलावा अगरबत्ती, धूपबत्ती, इत्र, गुलाब जल और अन्य हैंडमेड उत्पादों के निर्माण की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। यह उद्योग न सिर्फ धार्मिक स्थलों के कचरे का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करेगा, बल्कि शहर में नए रोजगार अवसर भी उपलब्ध कराएगा। नगर निगम का लक्ष्य है कि आगामी वर्ष में गोरखपुर को ‘ग्रीन इनोवेशन सिटी’ के रूप में विकसित किया जाए, जहां आस्था से निकलने वाला कचरा पर्यावरण संवर्धन का माध्यम बने।
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शहर में प्रतिदिन 350-400 कुंतल फूल मंदिरों में चढ़ाए जाते हैं। मकर संक्रांति, महाशिवरात्रि और सावन जैसे उत्सवों में यह मात्रा बढ़कर 900-1000 क्विंटल प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। इसी विशाल मात्रा को देखते हुए बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण की आवश्यकता महसूस की गई है।

नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि कई फर्मों से बात चल रही है कि वे पीपीपी मोड पर मंदिरों के फूलों का प्रसंस्करण करें। सिर्फ खाद ही नहीं, इत्र, धूपबत्ती, अगरबत्ती और गुलाब जल जैसे उत्पाद बनाए जाएं। इससे निगम को ब्रांडिंग और आमदनी दोनों का लाभ मिलेगा। जल्द ही ईओआई (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
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