World Pneumonia Day: निमोनिया का टीका जिले में खत्म होने के कगार पर, 7500 की मांग, मिले हैं 2500 डोज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि निमोनिया सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है। इसमें बच्चों को सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होती है। पूरे देश में शून्य से पांच वर्ष तक के 17 से 18 फीसदी बच्चों की मौत निमोनिया की वजह से होती है।
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बदल रहे मौसम में निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसकी चपेट में बच्चों से लेकर बुजुर्ग आ रहे हैं। इस बीमारी में बच्चों के जान का खतरा रहता है। इन सबके बाद भी निमोनिया का टीका जिले में खत्म होने की कगार पर है। टीके की सिर्फ ढाई हजार डोज मौजूद है जो शनिवार को खत्म हो जाएगी। निजी अस्पतालों में इसकी कीमत तीन हजार से अधिक है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि निमोनिया सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है। इसमें बच्चों को सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होती है। पूरे देश में शून्य से पांच वर्ष तक के 17 से 18 फीसदी बच्चों की मौत निमोनिया की वजह से होती है।
बताया कि इस वक्त बीआरडी में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर दिन 10 से 15 बच्चे निमोनिया से पीड़ित भर्ती हो रहे हैं। बच्चों को पीसीवी का टीका हर हाल में लगवाना चाहिए। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि बच्चों के साथ यह बीमारी बुजुर्गों का भी होती है। बदल रहे मौसम में बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
एक वर्ष तक के बच्चों को लगता है टीका
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नंद लाल कुशवाहा ने बताया कि यह टीका एक साल तक के बच्चों को लगता है। टीके की तीन डोज लगाई जाती है। पहला डेढ़ माह, दूसरा तीन माह और नौवें महीने में बूस्टर डोज लगाई जाती है। पीसीवी का टीका लगने से अन्य 12 बीमारियों से भी बचाव होता है।
7,500 डोज की मांग, मिले हैं 2,500 डोज
डॉ. नंद लाल कुशवाहा ने बताया कि पीसीवी का टीका नियमित टीकाकरण में अभियान में शामिल हैं। जिले में हर सप्ताह इसकी 7,500 डोज की जरूरत है। लेकिन, इस सप्ताह केवल 2,500 डोज मौजूद है। इससे शनिवार को ही टीकाकरण हो सकेगा। उसके बाद टीकाकरण नहीं हो सकेगा। 10 हजार डोज की मांग की गई थी। ढाई हजार डोज मिले हैं। फिर से टीका मांगा गया है।