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तोहफा: देश को मिला एक और जीनोम सीक्वेंसिंग केंद्र, अभी तक दिल्ली और पुणे में ही उपलब्ध थी यह सुविधा
Wed, 08 Dec 2021 12:08 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 08 Dec 2021 12:08 PM IST
सार
गोरखपुर में आरएमआरसी लैब का तोहफा मिलने से अब वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच के लिए नमूने बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे। इनकी जांच यहीं हो जाएगी।
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प्रधानमंत्री ने आरएमआरसी के मॉडल का निरीक्षण किया।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमिक्रॉन, कोविड, सॉर्स जैसे अत्याधुनिक वायरस से बचाव और उसकी वैक्सीन तैयार करने की तकनीक विकसित करने वाले आरएमआरसी लैब का तोहफा मंगलवार को देश की जनता को समर्पित किया।
इस लैब में विभिन्न प्रकार की बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया, वायरस सहित अन्य सूक्ष्म जीवों की जीनोम सीक्वेंसिंग (आनुवांशिक गुणों का अध्ययन और अनुक्रम निर्धारण) करने की आधुनिक तकनीक युक्त मशीनें स्थापित की गई हैं। ये मशीनें वायरस, बैक्टीरिया या सूक्ष्मजीवों के गुणसूत्र (डीएनए-आरएनए) में प्रोटीन की श्रृंखला का अध्ययन करती है। श्रृंखला का अध्ययन कर यह मशीन गुणसूत्र में कौन-सा प्रोटीन, सूक्ष्मकण किस स्थान पर है, इसका अनुक्रम अंकित करती है। गुणसूत्र में विशिष्ट स्थान पर स्थित इन प्रोटीन सूक्ष्मकणों का बीमारी पैदा करने में क्या भूमिका है, इसका अनुसंधान भी किया जाता है।
बीमारी का कारण पता चलने के बाद इससे बचाव के उपाय तलाश किए जाते हैं। गोरखपुर आरएमआरसी में जीनोम सीक्वेंसर मशीन लगने से अब सूक्ष्म जीवाणुओं से उत्पन्न होने वाली बीमारी और उसके इलाज की युक्तियां, जैसे वैक्सीन, दवा, कंपाउंड आदि लैब स्तर पर तैयार किए जाएंगे। अभी तक यह सुविधा दिल्ली या पुणे में ही उपलब्ध थी। गोरखपुर में जीनोम सीक्वेंसिंग सुविधा शुरू होने से देश की रोग प्रतिरोध तकनीकी अनुसंधान करने की क्षमता तो बढ़ी ही है, आयुर्विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में गोरखपुर का नाम देश के मानचित्र पर दर्ज हो गया है।
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इस लैब में विभिन्न प्रकार की बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया, वायरस सहित अन्य सूक्ष्म जीवों की जीनोम सीक्वेंसिंग (आनुवांशिक गुणों का अध्ययन और अनुक्रम निर्धारण) करने की आधुनिक तकनीक युक्त मशीनें स्थापित की गई हैं। ये मशीनें वायरस, बैक्टीरिया या सूक्ष्मजीवों के गुणसूत्र (डीएनए-आरएनए) में प्रोटीन की श्रृंखला का अध्ययन करती है। श्रृंखला का अध्ययन कर यह मशीन गुणसूत्र में कौन-सा प्रोटीन, सूक्ष्मकण किस स्थान पर है, इसका अनुक्रम अंकित करती है। गुणसूत्र में विशिष्ट स्थान पर स्थित इन प्रोटीन सूक्ष्मकणों का बीमारी पैदा करने में क्या भूमिका है, इसका अनुसंधान भी किया जाता है।
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बीमारी का कारण पता चलने के बाद इससे बचाव के उपाय तलाश किए जाते हैं। गोरखपुर आरएमआरसी में जीनोम सीक्वेंसर मशीन लगने से अब सूक्ष्म जीवाणुओं से उत्पन्न होने वाली बीमारी और उसके इलाज की युक्तियां, जैसे वैक्सीन, दवा, कंपाउंड आदि लैब स्तर पर तैयार किए जाएंगे। अभी तक यह सुविधा दिल्ली या पुणे में ही उपलब्ध थी। गोरखपुर में जीनोम सीक्वेंसिंग सुविधा शुरू होने से देश की रोग प्रतिरोध तकनीकी अनुसंधान करने की क्षमता तो बढ़ी ही है, आयुर्विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में गोरखपुर का नाम देश के मानचित्र पर दर्ज हो गया है।
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