प्लास्टिक सर्जरी को केवल कास्मेटिक सर्जरी के रूप में ने देखेः डॉ नीरज प्लास्टिक सर्जरी से जन्मजात विकृति भी हो सकती है ठीक अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। प्लास्टिक सर्जरी केवल कॉस्मेटिक सर्जरी तक नहीं देखा जाना चाहिए। प्लास्टिक सर्जरी की जरुरत हर उस सर्जरी में होती है जिसमे टिश्यू ( त्वचा )की जरुरत होती है। अथवा नसों को माइक्रोसर्जरी विधि से जोड़ने की जरूरत पड़ती है। यह बातें बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नीरज नथानी ने प्लास्टिक सर्जरी दिवस पर कही। कहा कि चेहरे या चेहरे की हड्डी के फ्रैक्चर एवं चोट को ठीक कर उसी स्वरूप में देना मैग्सिलोफेसिअल इंजरी कहते हैं। प्लास्टिक सर्जरी के जरिए जन्मजात विकृति को ठीक कर सामान्य देना। ऐसे केसों में कटे हुए होठ, कटे हुए तालु, लिंग के विकृति, अंगुलियों के विकृति शामिल है। कहा कि गंम्भीर रूप से जले हुए मरीजों की सर्जरी /उपचार, गंम्भीर रूप से जलने की समस्या प्लास्टिक सर्जरी के जरिए ठीक किया जा सकता है। बताया कि प्लास्टिक सर्जरी के जरिए कटकर अलग हो गए हिस्से को पुन जोड़कर उसे सक्रिय किया जा सकता है। ऐसे सर्जरी अब शहर में होने भी लगे हैं। कहा कि कैंसर की सर्जरी में कैंसर से प्रभावित हिस्से को काट कर निकल दिया जाता है। प्लास्टिक सर्जरी से फिर से उसी अंग की संरचना की जा सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्लास्टिक सर्जरी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा होगा। कहा कि अब लोग कॉस्मेटिक सर्जरी की ओर भी भाग रहे हैं। इसमें बाल प्रत्यारोपण, लिपोसेकशन (वसा कम करना), नाक सौंदर्यीकरण, बोटॉक्स थेरेपी (चेहरे की झुर्रियों को हटाना) आदि शामिल है।