पिपराइच हत्याकांड: जंगल में तड़तड़ाईं गोलियां, पुलिस मुठभेड़ में एक बदमाश घायल
अपहरण का केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तो की, लेकिन बाद में सीताराम राजभर के साथ हुई घटना में केस दर्ज किया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में पुलिस ने हत्या की कोशिश का केस दर्ज किया, लेकिन बाद में विवेचक ने हत्या की कोशिश की धारा हटाकर इसे मामूली घटना बना दी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर जिले के पिपराइच में युवक की हत्या और दो युवकों को गोली मारकर सनसनी फैलाने वाले बदमाशों से शुक्रवार सुबह कुसम्हीं जंगल में पुलिस की मुठभेड़ हो गई। एक बदमाश पुलिस की गोली से घायल हो गया जबकि घेराबंदी कर उसके साथी को दबोच लिया गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने एक शरणदाता को भी पकड़ा है।
आरोपियों के पास से अवैध पिस्टल, कारतूस और घटना में इस्तेमाल बाइक बरामद की गई। घायल बदमाश को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जबकि दो बदमाशों को जेल भिजवा दिया गया। दोनों पर 25 हजार रुपये का इनाम था।
गोली से घायल बदमाश की पहचान पिपराइच के रिठिया निवासी तेजस्वी पटेल के रूप में हुई है। जबकि, हरखापुर निवासी पवन राजभर को घेराबंदी कर दबोचा गया। दोनों की मदद करने और शरण दिलाने के आरोप में पुलिस ने हरखापुर के रामपाल राजभर को जेल भेजा है।
इसे भी पढ़ें: पदमा ने स्टेटस पर दो दिन पहले लगाया था इंसान की कीमत मरने के बाद पता चलती है...
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर व एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर पकड़े गए बदमाशों के बारे में जानकारी दी। एसएसपी ने बताया कि 10 अप्रैल की रात बदमाशों ने पुरानी रंजिश में तीन दोस्तों पर गोलियां चलाई थीं। विश्वास तिवारी की हत्या करने की नीयत थी, लेकिन गोली से उसके दोस्त जुगनू पांडेय की मौत हो गई। जबकि एक अन्य साथी मोनू भी घायल हो गया।
इस मामले में जुगनू के पिता इंद्रजीत पांडेय की तहरीर पर पुलिस ने पांच नामजद व दो अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोपी अमित पटेल और आकाश पाल को पहले ही जेल भेजा गया। अन्य अभियुक्तों की तलाश में पुलिस टीम लगी थी। शुक्रवार सुबह एसपी नार्थ एवं एएसपी मानुष पारिक के नेतृत्व में टीम दबिश देने गई थी।
इसे भी पढ़ें: 40 डिग्री के पास पहुंचा पारा, तेज पछुआ हवाओं ने किया जीना मुहाल
इसी दौरान पता चला कि हत्याकांड में शामिल तेजस्वी पटेल और पवन राजभर बाइक से भागने के फिराक में हैं। पुलिस ने घेराबंदी की तो दोनों बाइक से कुसम्हीं जंगल में भागे। पीछा करने पर बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।
खुद का बचाव करते हुए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की तो तेजस्वी के पैर में गोली लग गई और वह बाइक लेकर गिर गया। पवन ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे भी घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया गया।
नाबालिग मोहब्बत से बढ़ी थी रंजिश, क्रिकेट मैच के दौरान भी मारपीट
इसे भी पढ़ें: हर शख्स के जेहन में भय... युवा फिर तबाही की राह पर न बढ़ जाएं
केस दर्ज कर भूल गई पुलिस, अब एसपी नार्थ करेंगे जांच
अपहरण का केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तो की, लेकिन बाद में सीताराम राजभर के साथ हुई घटना में केस दर्ज किया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में पुलिस ने हत्या की कोशिश का केस दर्ज किया, लेकिन बाद में विवेचक ने हत्या की कोशिश की धारा हटाकर इसे मामूली घटना बना दी। जिसकी देन रही कि क्रिकेट मैच को लेकर मारपीट हुई और फिर केस दर्ज किया गया, लेकिन इसकी विवेचना में भी लापरवाही की गई।
विवेचना ठीक से नहीं हुई और चार्जशीट लगा दी गई। इस नाते ही दोनों पक्ष एक दूसरे के दुश्मन बन गए और एक दूसरे को मारने का प्लान बनाने लगे। विवेचना में लापरवाही करने वाले दरोगा को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब एसएसपी ने पूरे प्रकरण में बरती गई लापरवाही की जांच एसपी नार्थ को सौंप दी है। एसएसपी ने बताया कि केस की फिर से विवेचना की जाएगी। जिन पुलिस वालों ने लापरवाही की है, उसकी जांच चल रही है। एसपी नार्थ की जांच रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।