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गोरखपुर: लोगों को महायोजना लागू होने का इंतजार, भू-उपयोग के संबंध में काफी लोग हैं सशंकित

Fri, 28 Oct 2022 03:29 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 28 Oct 2022 03:29 PM IST
सार

महायोजना का प्रारूप तैयार होने के बाद जीडीए ने आपत्ति दाखिल करने के लिए करीब डेढ़ महीने का समय दिया था। इस दौरान 11,000 से अधिक लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। अब इनके निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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People waiting for implementation of master plan in Gorakhpur
गोरखपुर विकास प्राधिकरण। - फोटो : Social Media

विस्तार

घर बनवाने या निवेश के लिए जमीन खरीदने की योजना बनाने वालों को नई महायोजना-2031 के लागू होने का इंतजार है। इस कारण लोगों ने जमीन की रजिष्ट्री कराना विलंबित कर दिया है। इसका असर सदर तहसील के साथ चौरीचौरा व सहजनवां तहसील के उप निबंधन कार्यालय की आय पर पड़ रहा है। सर्वाधिक असर सदर तहसील क्षेत्र के दोनों उप निबंधन कार्यालयों पर पड़ रहा है। इन दफ्तरों में रजिस्ट्री की संख्या में 25 फीसदी तक कम आ गई है।  

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दरअसल, लोग शहर से सटे इलाकों एवं गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के विस्तारित क्षेत्र में भू-उपयोग के संबंध में सशंकित हैं। मसलन, महायोजना में ऐसे कई क्षेत्रों का भू-उपयोग कृषि या हरित क्षेत्र कर दिया गया है, जहां बड़ी संख्या में आबादी रहती है। वहीं, कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जहां कई माह तक पानी भरा रहता है। बावजूद इसके वहां का भू-उपयोग आवासीय किया गया है। जैसे कि बनसप्ती में पांच हजार से अधिक की आबादी है, लेकिन इस क्षेत्र को हरित घोषित किया गया है।
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वहीं, काफी निचला इलाका होने की वजह से ताल कंदला, जहां बारिश का मौसम समाप्त होने के करीब तीन माह बाद तक जलभराव रहता, का भू-उपयोग बदलकर आवासीय कर दिया गया है। ऐसे कई परिवर्तन के संबंध में बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल की गई हैं। अब लोगों को डर लग रहा है कि कहीं जमीन और मकान में निवेश के बाद उस क्षेत्र का भू-उपयोग न बदल जाए। इसीलिए लोग महायोजना के अंतिम प्रारूप का इंतजार कर रहे हैं। कई लोगों ने तो जमीन के लिए एडवांस दे दिया है, लेकिन रजिस्ट्री नहीं करा रहे हैं।
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बता दें कि महायोजना का प्रारूप तैयार होने के बाद जीडीए ने आपत्ति दाखिल करने के लिए करीब डेढ़ महीने का समय दिया था। इस दौरान 11,000 से अधिक लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। अब इनके निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
 

जीडीए की सख्ती से भी लोगों ने कदम पीछे खींचे

रजिस्ट्री कराने की संख्या कम होने के पीछे प्लाटिंग कर अवैध कालोनियां बसा रहे कारोबारियों पर जीडीए की सख्ती भी एक वजह है। ऐसा पहली बार हुआ है जब प्राधिकरण ने समाचार पत्रों में सार्वजनिक रूप से नोटिस प्रकाशित कराकर लोगों को अनियोजित प्लाटिंग वाली योजनाओं में जमीन नहीं खरीदने की सलाह दी है।

सप्ताह भर पहले प्रकाशित नोटिस में जीडीए ने कहा था कि अनियोजित प्लाटिंग वालों पर दीपावली के बाद कार्रवाई होगी। चेतावनी दी गई है कि इन स्थानों पर जमीन लेने वालों को निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। विस्तारित क्षेत्र में अभी तक महायोजना लागू नहीं होने के कारण प्राधिकरण ने प्लाटिंग करने या निर्माण कराने पर रोक लगाई है।  

सदर तहसील उपनिबंधक द्वितीय प्रसेनजीत सिंह ने कहा कि जीडीए के विस्तारित क्षेत्र में रजिस्ट्री में कमी आई है। लोगों को भू-उपयोग की स्थिति साफ होने का इंतजार है। लोगों को भय सता रहा है कि कहीं उनका पैसा डूब न जाए। उप निबंधक कार्यालय प्रथम और द्वितीय में सामान्य दिनों की तुलना में 20 से 25 फीसदी रजिस्ट्री कम हो गई है।
 
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