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Gorakhpur News: 400 रुपये महीने टैक्स भुगतकर भी गंदा पानी...1200 के वॉटर जार से हो रहा गुजारा

Tue, 06 Jan 2026 02:06 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Tue, 06 Jan 2026 02:06 PM IST
सार

नगर निगम जिन क्षेत्रों में वाटर टैक्स वसूल रहा है, वहां शुद्ध पानी की गारंटी देना भी उसी की जिम्मेदारी है। अगर कहीं पाइपलाइन में खराबी है तो तत्काल उसे ठीक कराना है लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। शहर में खराब पानी की आपूर्ति की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।

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People in Gorakhpur are still buying water despite paying municipal taxes.
पानी ले जाते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

नगर निगम की ओर से शहर में स्वच्छ पानी की आपूर्ति का दावा फेल हो गया है। कई इलाकों में पाइपलाइन टूटने और रिसाव होने से लोगों के घरों तक गंदा पानी आने की शिकायतें बढ़ गई हैं। हर महीने नगर निगम 400 रुपये महीने टैक्स देने के बाद भी लोगों को 1200 के वाटर जार से गुजारा करना पड़ रहा है। यह भी पानी शुद्ध है या नहीं, इसकी गारंटी नहीं है।
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शहर में आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) वाटर प्लांट का धंधा तेजी से बढ़ा है। रोजाना 20 से 25 हजार जार के पानी की खपत है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस उद्योग से हर महीने करीब 80 करोड़ रुपये का धंधा हो रहा है। शहर में करीब 600 से अधिक आरओ प्लांट संचालित हैं। प्रत्येक प्लांट से रोजाना औसतन 300 से 400 जार पानी की मांग रहती है।
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यह आंकड़ा इस बात का संकेत भी है कि नगर निगम की पाइपलाइन से घर-घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने में अभी भी कमी है। शहर में करीब 1.20 लाख लोग नगर निगम को वाटर टैक्स के रूप में शुल्क अदा कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें पीने के लिए जार का पानी खरीदना पड़ रहा है।
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नियमः टैक्स देने वालों को शुद्ध पानी मिले गारंटी
नगर निगम जिन क्षेत्रों में वाटर टैक्स वसूल रहा है, वहां शुद्ध पानी की गारंटी देना भी उसी की जिम्मेदारी है। अगर कहीं पाइपलाइन में खराबी है तो तत्काल उसे ठीक कराना है लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। शहर में खराब पानी की आपूर्ति की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।

दो हजार लीटर से अधिक पानी रोज बिक रहा
हर प्लांट से औसतन 2000 लीटर से अधिक पानी रोज बेचा जाता है। इस हिसाब से देखें तो हर दिन करीब 12 लाख लीटर पानी तो केवल इन प्लांटों से ही घर-घर जा रहा है, जिनकी कोई जांच नहीं होती। हालात ये हैं कि कई संचालक अब ऑटो पर 1000 लीटर की टंकी रखकर मोहल्लों में घूम-घूमकर पानी बेचते हैं। जबकि नियम यह है कि पानी सील जार में ही उपलब्ध कराया जाएगा और उस पर निर्माता का नाम, उत्पादन तिथि और घुलनशील तत्वों की जानकारी अंकित होगा लेकिन ऐसा कहीं नहीं हो रहा।

बोतलबंद पानी के नमूने भी हुए थे फेल
धंधेबाजों ने बोतलबंद पानी को भी नहीं छोड़ा। फरवरी 2025 में बोतलबंद और पैकेट वाले पानी के दो नमूने फेल हो गए थे। इनमें शुद्ध पानी में मिलने वाले तत्व ही नहीं मिले थे। केवल क्लोरीन मिला था। इस रिपोर्ट के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने एहतियात के तौर पर बोतलबंद व पैकेट वाले पानी का काम करने वाले आठ कारखानों से सैंपल लिए थे।


शहर में जहां भी पाइपलाइन में दिक्कतें हैं, उसे ठीक कराया जा रहा है। आरओ प्लांट का पंजीकरण अनिवार्य है लेकिन वर्तमान में केवल 120 प्लांट का ही पंजीकरण निगम में दर्ज है। सभी आरओ प्लांट संचालकों को पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं: दुर्गेश मिश्रा, अपर नगर आयुक्त
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