मरीज माफिया पर शिकंजाः वसुंधरा अस्पताल भी सील...आठ गिरफ्तार
गोरखपुर में जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से संयुक्त कार्रवाई में आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
विस्तार
उधर, मेडिकल कॉलेज से मरीज को प्राइवेट अस्पतालों में बेचे जाने वाले मरीज-एंबुलेंस माफिया गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें दो नर्सिंग होम के संचालक, एमबीबीएस डिग्री का गलत इस्तेमाल कराने वाले डॉक्टर रणजंय प्रताप सिंह, मेडिकल कॉलेज के आउटसोर्सिंग कर्मचारी शामिल हैं।
ये सभी मरीज के इमरजेंसी में आने के बाद मेडिकल कॉलेज में आईसीयू खाली न होने, सुविधाएं नहीं मिलने और कई बार बेड ही खाली न होने की दलील देकर नर्सिंग होम के दलालों को बेच दिया करते थे। तीमारदार के तैयार होते ही मेडिकल कर्मी एंबुलेंस को फोन करके बुला लेते थे और फिर मरीज सीधे पैडलेगंज के ईशु नर्सिंग होम और वसुंधरा नर्सिंग होम में पहुंचा दिए जाते थे।
इसके बदले उन्हें 10 से 25 हजार रुपये मिल जाते थे। ऑपरेशन वाले मरीज के तीमारदारों से 25 हजार और अन्य के दस हजार रुपये तय थे। इसका नकद में भुगतान होता था। कई बार ऑनलाइन भुगतान भी किया जाता था। रविवार को पुलिस लाइंस में डीएम कृष्णा करुणेश, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर, एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने पकड़े गए गिरोह के बारे में प्रेस कांफ्रेंस करके जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कर्मी, एंबुलेंस और नर्सिंग होम के दलालों का एक गिरोह मरीज के खरीद-फरोख्त में सक्रिय है। मरीजों को सरकारी एंबुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में लाया जाता है। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी के आसपास पहले से सक्रिय दलाल और मेडिकल कॉलेज के कुछ कर्मी मौजूद रहते हैं। जैसे ही मरीज एंबुलेंस से उतरता है, उसके परिजनों को दलाल घेर लेते हैं।
जब तक परिजनों में से कोई एक पर्चा बनवाकर इमरजेंसी में मरीज के पास पहुंचता है, तब तक ये दलाल मरीज व उसके परिजनों को भय दिखाकर अपने झांसे में लेने की कोशिश कर रहे होते हैं। वे उन्हें प्रतिष्ठित अस्पतालों का झांसा देते हैं। मरीज व उसके परिजनों को झांसे में लेने के बाद ये दलाल वहीं मेडिकल परिसर के आसपास मौजूद निजी एंबुलेंस गैंग के सरगना को सूचित करते हैं।
निजी एंबुलेंस गैंग का सरगना ड्राइवर व अन्य कर्मियों को इमरजेंसी के पास एंबुलेंस लेकर भेजता है। यहां से वे एंबुलेंस की मदद से मरीज को बीआरडी मेडिकल कॉलेज से अन्यत्र अस्पतालों की तरफ लेकर चले जाते हैं। इसके बदले में इन्हें प्राइवेट अस्पताल से कमीशन मिल जाता है।
एंबुलेंस में बैठाने के बाद फिर देते हैं झांसा
मरीज माफिया एंबुलेंस के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से बाहर निकलते ही एक बार फिर तीमारदार को बरगलाने का प्रयास करते हैं। वे कहते हैं कि प्रतिष्ठित अस्पताल काफी महंगे हैं और उसमें सुविधाएं भी उतनी अच्छी नहीं हैं। इसलिए कुछ अच्छे अस्पताल बता रहे हैं, जहां बेहतर इलाज होगा। इसके बाद वे उन निजी अस्पतालों का ब्योरा देते हैं, जो इनकी सेटिंग में शामिल होते हैं।
ऐसे खुला था मामला
जिला प्रशासन की सूचना पर 17 फरवरी को सीएमओ व डिप्टी सीएमओ ने ईशु अस्पताल पैडलेगंज के पंजीकरण व मानकों की जांच की। जांच के दौरान अस्पताल में तीन मरीज भर्ती पाए गए, लेकिन मौके पर कोई भी डॉक्टर नहीं मिला। अस्पताल में मात्र पैरामेडिकल स्टॉफ मौजूद थे, जिनकी शैक्षिक योग्यता डिप्लोमा इन फार्मेसी है।
पैरामेडिकल स्टाॅफ ने यह बताया कि हाॅस्पिटल रेनू पत्नी नितिन यादव की ओर से संचालित किया जाता है। अस्पताल डाॅ. रणंजय प्रताप सिंह के नाम से पंजीकृत है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने सीएमओ को बताया कि तीनों मरीज पहले बीआरडी मेडिकल काॅलेज में भर्ती होने गए थे। वहां पर कुछ लोगों ने झांसा देकर इस निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। यहां बुलाने पर भी डॉक्टर नहीं आ रहे हैं।
इनकी हुई गिरफ्तारी, ऐसे करते थे काम
रिआंव गांव के प्रधान व संचालक के पति नितिन यादव, अमन यादव भाई, गायत्रीनगर निवासी सार्थक श्रीवास्तव व वसुंधरा अस्पताल का संचालक, शिवपुरी कॉलोनी निवासी डॉ. रणंजय प्रताप सिंह, झुगियां मडिला निवासी व एंबुलेंस माफिया दीपू, सिकरीगंज के बिस्तुई निवासी व मेडिकल कर्मी दीपू, पुरौया, गुलरिहा निवासी इंद्रजीत मेडिकल कर्मी, झुगियां दीपक गुप्ता की गिरफ्तारी हुई है।
सभी पर जबरन वसूली, जालसाजी, आपराधिक साजिश सहित अन्य धाराएं लगी हैं। पुलिस के मुताबिक, दीपू के पास चार एंबुलेंस हैं, इसकी मदद से मरीजों को नर्सिंग होम पहुंचाया जाता है। नितिन, अमर ईशु अस्पताल और सार्थक वसुंधरा अस्पताल का संचालक है। ये एंबुलेंस माफिया की मदद से मरीज खरीदते थे। मेडिकल कर्मी एंबुलेंस माफिया के संपर्क में रहते थे।
अब नाम बदलकर नहीं चला पाएंगे नर्सिंग होम, भवन का सत्यापन होगा
डॉक्टर के गैरहाजिर रहने पर अस्पताल सील होने के कुछ दिन बाद ही नाम बदलकर पंजीकरण कराकर नर्सिंग होम संचालन के खेल पर प्रशासन का डंडा चलेगा। डीएम कृष्णा करुणेश ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित कर दी है।
डीएम ने कहा कि जांच में अक्सर सामने आ रहा है कि नर्सिंग होम किराए के भवन में चलाया जा रहा है। सील होने के कुछ दिन बाद फिर से नाम बदलकर संचालित कर दिया जाता है। इसे रोकने के लिए भवन का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद ही अस्पताल पंजीकृत होगा। डीएम के मुताबिक, अक्सर शिकायत के बाद सीएमओ की टीम जाती है और सिर्फ डॉक्टर न होने की बात ही सामने आती है।
पिछले कुछ समय से पुलिस की जांच में कई गिरोह सामने आ चुके हैं, जो गंभीर बात है। मरीजों को मुफ्त चिकित्सीय सुविधा देने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है और ऐसे में इस तरह के गिरोह का सक्रिय होना गंभीर है। इसपर कार्रवाई के लिए प्रशासन की ओर से कमेटी गठित की जाएगी, जो त्वरित कार्रवाई करेगी। पुलिस की मदद भी ली जाएगी। इस तरह के सक्रिय सभी गिरोह को जड़ से खत्म किया जाएगा।