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बदल रहा है गोरखपुर: सऊदी न तंजानिया..अब गीडा में फैक्टरी लगाकर खुद को साबित करेंगे युवा इंजीनियर

Fri, 08 Sep 2023 12:53 PM IST
vivek shukla उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर।
उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 08 Sep 2023 12:53 PM IST
सार

एमएमएमयूटी से इन्वायरमेंटल साइंस में एमटेक करने वाले पुनीत श्रीवास्तव भी गीडा क्षेत्र में अपनी फैक्टरी लगाएंगे। गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क विकसित होने की जानकारी से खासे उत्साहित हैं। इन तीनों फैक्टरियों से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 1500 रोजगार मिलने का उम्मीद है।

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now young engineers will prove themselves by setting up a factory in Gida gorakhpur
गीडा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अब औद्योगिक क्षेत्र गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) में फैक्टरी लगाने के लिए तीन इंजीनियरों ने रुचि दिखाई है। ये सभी प्लास्टिक फैक्टरियां लगाएंगे। इनमें सऊदी अरब में मोटे पैकेज वाली नौकरी छोड़कर आ रहे गुफरान और तंजानिया के प्रतीक लॉरेंस भी हैं। इनकी फैक्टरियों में प्लास्टिक पाइप, ढक्कन, प्लास्टिक शीट तो बनेगी ही, प्लास्टिक दाना यानी कच्चा माल भी तैयार होगा। जिसकी आपूर्ति पूर्वांचल ही नहीं बिहार में की जाएगी।

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गीडा के सेक्टर 28 में प्लास्टिक पार्क विकसित किया जा रहा है। इसमें 80 प्लॉट हैं, जिनमें से 28 का आवंटन दो दिन पहले ही किया गया है। उद्योग लगाने वालों में से एक सऊदी अरब में एक कंपनी में प्लांट मैनेजर गुफरान हैं, जो मोटे पैकेज वाली नौकरी छोड़कर यहां अपनी फैक्टरी लगाने आ रहे हैं। इसके अलावा तंजानिया में फैक्टरी चला रहे इंजीनियर प्रतीक लॉरेंस भी स्वेदश लौट रहे हैं। प्रतीक की फैक्टरी में प्लास्टिक दाना बनाया जाएगा।
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एमएमएमयूटी से इन्वायरमेंटल साइंस में एमटेक करने वाले पुनीत श्रीवास्तव भी गीडा क्षेत्र में अपनी फैक्टरी लगाएंगे। गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क विकसित होने की जानकारी से खासे उत्साहित हैं। इन तीनों फैक्टरियों से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 1500 रोजगार मिलने का उम्मीद है।
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पूर्वांचल में शीशी-बोतलों का ढक्कन बनाने वाली पहली फैक्टरी होगी गुफरान की

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गुफरान - फोटो : अमर उजाला।

शहर के बक्शीपुर इलाके के रहने वाले और आईआईटी दिल्ली से एमटेक करने वाले गुफरान कई विदेशी कंपनियों में उच्च पदों पर रह चुके हैं। गीडा में बढ़ते कारोबारी माहौल से उत्साहित गुफरान अब खुद की फैक्टरी चलाना चाहते हैं। इन्हें गीडा में प्लॉट भी आवंटित हो चुका है। अभी वे करीब 20 करोड़ से स्टील डोर मैन्युफैक्चरिंग और पाउडर कोटिंग का कारोबार शुरू करेंगे।

इसके अलावा जल्दी ही प्लास्टिक के पाइप तथा बोतलों का ढक्कन बनाने का काम भी शुरू करेंगे। अभी पूर्वांचल में किसी फैक्टर में प्लास्टिक के शीशी-बोतलों का ढक्कन नहीं बनता। इसे गुजरात व अन्य दक्षिणी राज्यों से मंगाना पड़ता है। गुफरान का कहना है कि युवाओं को अपने कौशल और कल्पनाशक्ति का उपयोग कर देश को नई राह पर ले जाने का प्रयास करना होगा।

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गीडा निवेशक गुफरान ने कहा कि अपने क्षेत्र में उद्योग में लगाकर देश की तरक्की के साथ-साथ अपने क्षेत्र के लोगों के लिए भी रोजगार का अवसर मिलेगा, इसी सोच के साथ गोरखपुर में फैक्टरी शुरू करने आ रहा हूं। प्लास्टिक के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। एक के बाद एक कई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। शुरुआत में करीब 100 लोगों को रोजगार मिलेगा।
 

नो पावर कट जोन में शामिल है प्लास्टिक पार्क

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गीडा। फाइल - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर में अभी प्लास्टिक दाना बनाने की फैक्टरियां गिनती भर की हैं। वजह यह कि इन फैक्टिरियों को 24 घंटे बिजली की जरूरत होती है। एक बार अगर प्लास्टिक का स्टिक निकलते वक्त बिजली कट गई तो पूरी प्रक्रिया नए सिरे से करनी पड़ती है। चैंबर्स ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह बताते हैं कि सेक्टर 28 स्थित प्लास्टिक पार्क को नो पावर कट जोन में शामिल किया गया है।

यहां प्लास्टिक दाना बनना शुरू होने पर प्लास्टिक के अन्य उद्योगों के लिए भी राहत होगी। क्योंकि प्लास्टिक के खिलौने, पाइप या सीट में दाना ही कच्चा माल होता है। अभी कच्चे माल की ज्यादातर सप्लाई कानपुर और दिल्ली से है। इस वजह से निर्माण कार्य की लागत बढ़ती है। जब प्लास्टिक दाना यहीं बनना शुरू हो जाएगा तो माल ढुलाई बचेगा, जिससे अन्य उत्पाद भी सस्ते होंगे।

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बिहार और नेपाल का मिलेगा बाजार, मजदूर भी मिल रहे आसानी से
प्लास्टिक उद्योग की सफलता के लिए आसपास का माहौल बड़ा सकारात्मक है। यहां के उद्यमियों के लिए बिहार के अलावा पड़ोसी देश नेपाल में भी अच्छा बाजार मिलने की संभावना है। प्लास्टिक उद्योग में लगे बड़ी संख्या में मजदूर व तकनीशियन पूर्वांचल और बिहार के ही हैं। गोरखपुर में फैक्टरी लगने पर यहां मजदूर व तकनीशियन आसानी से मिलेंगे, जिससे फैक्टरी चलाने मेंं सुविधा होगी। बिजली की उपलब्धता भी इस उद्योग के लिए फायदेमंद है। यही वजह है कि उद्यमियों का रुझान गोरखपुर की तरफ हो रहा है।
 

पुनीत श्रीवास्तव भी लगाएंगे नई फैक्टरी

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पुनीत श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला।

एमएमएमयूटी से इन्वायरमेंटल साइंस में एमटेक की डिग्री लेने वाले पुनीत श्रीवास्तव की गीडा में प्लास्टिक की पन्नी बनाने की एक इकाई है। अब वे इसे बढ़ाने और एक नई फैक्टरी लगाने की तैयारी में हैं। इसके लिए उन्हें प्लास्टिक पार्क में जमीन आवंटित हो गई है। पुनीत ने बताया कि प्लास्टिक पाइप की फैक्टरी लगाने जा रहे हैं। पुनीत बताते हैं कि गोरखपुर में फैक्टरी लगाने पर अपना उत्पाद बेचने के लिए बड़ा बाजार मिल रहा है। इसके अलावा पूर्वांचल और बिहार के जो मजदूर दिल्ली-मुंबई जाकर काम कर रहे हैं, वे यहां आसानी से लौट रहे हैं। प्रशिक्षित मजदूर मिलने से फैक्टरी चलाने में दिक्कत नहीं आएगी।

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युवा उद्यमी पुनीत श्रीवास्तव ने कहा कि अगर युवा किसी कंपनी को लाभ दिलाकर ब्रांड बना सकते हैं तो खुद की कंपनी भी खड़ी कर सकते हैं। हमने उद्योगों में उपयोग होने वाले पानी को प्यूरीफाई करने का सिस्टम विकसित किया था। अयोध्या में एक बड़े प्लांट में हमारे सिस्टम का उपयोग हो रहा है। गीडा में एक छोटी इकाई थी, इसके साथ ही प्लास्टिक की एक बड़ी इकाई डालने के लिए जमीन का आवंटन कराया है। जल्दी ही इसका निर्माण भी शुरू कराया जाएगा।
 

एक्सपर्ट कमेंट

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पवन अग्रवाल, सीईओ, गीडा। - फोटो : अमर उजाला।
अनुभव के साथ खुद को साबित करने की बढ़ी है ललक
गोरखपुर चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि गोरखपुर में औद्योगिक माहौल बदलने के साथ ही कई तरह के बदलाव आ रहे हैं। इस बार कई ऐसे उद्यमी सामने आ रहे हैं जो इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर बड़ी कंपनियों में उच्च पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनके पास अनुभव भी है। अब वे गीडा में खुद की फैक्टरी लगा रहे हैं। युवाओं में खुद को साबित करने की ललक बढ़ी है। गोरखपुर में माहौल के साथ-साथ मौका भी मिल रहा है। यही वजह है कि यहां नए उद्यमी अधिक आ रहे हैं। यह बदलाव आने वाले दिनों में उद्योग और उद्योगपतियों के पूरे परिदृश्य को ही बदल देगा।

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बेहतर अवसर मिल रहा है इसलिए बढ़ी रुचि
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि गीडा में नए उद्योग स्थापित करने के लिए 102 उद्यमियों को प्लॉट आवंटित किया गया है, इसमें से 28 प्लॉट प्लास्टिक पार्क का है। कुल 2,08,540 वर्ग मीटर जमीन उद्यमियों को दी जा रही है। ये प्लॉट सेक्टर-13, 15, 26, 27 एवं 28 में हैं। ये उद्यमी गीडा में लगभग 786 करोड़ का पूंजी निवेश करेंगे, जिससे करीब 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा। युवा पीढ़ी अब अपने करियर को लेकर पहले से अधिक जागरूक हुई है। पढ़े-लिखे नौजवान केवल सरकारी नौकरी के पीछे दौड़ने के बजाय खुद की नई पहचान बनाना चाहते हैं। यहां उन्हें अवसर मिल रहा है और सफलता की संभावना भी अधिक दिख रही है, इसलिए वे जोखिम उठाने में भी संकोच नहीं कर रहे।
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