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Gorakhpur News: रोहिंग्या-बांग्लादेशी ही नहीं... नेपाल-भूटान वालों के भी बने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
Mon, 05 Aug 2024 05:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 05 Aug 2024 05:57 AM IST
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अगर आपका भी है 10 साल पुराना आधार, तो ध्यान दें
- फोटो : istock
फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में यूपी एटीएस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। गिरफ्त में आए लोगों से पूछताछ में पता चला है कि सिर्फ रोहिंग्या-बांग्लादेशी ही नहीं, बल्कि नेपाल और भूटान के कई लोगों के फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और आधार कॉर्ड भी बनवाए गए थे।
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सूत्रों का कहना है कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और आधार कॉर्ड के जरिए इन विदेशी नागरिकों को पूर्वांचल में खपाने के साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का खेल चल रहा है। इसके लिए आरोपियों ने इन लोगों से मोटी रकम भी ली। यूपी एटीएस की जांच में अभी कई और लोग रडार पर हैं।
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एटीएस सूत्रों ने बताया कि छह महीने पहले केरल में आतंकवादी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के एक सदस्य को एटीएस ने गोपनीय सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया था। उसके पास से बरामद पहचान पत्र में उसका पता रायबरेली के सलोन ब्लॉक के पाल्हीपुर गांव का था। इसी आधार पर एटीएस की टीम ने रायबरेली में गोपनीय जांच शुरू की।
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अगर आपका भी है 10 साल पुराना आधार, तो ध्यान दें
- फोटो : istock
सूत्रों ने बताया कि इसी बीच रायबरेली में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और आधार काॅर्ड के जरिए सरकारी सेवा में नौकरी का मामले सामने आया था। मामले में केस दर्ज कर इसकी जांच शुरू की गई तो इसका कनेक्शन भी पीएफआई से जुड़े संदिग्ध के साथ सामने आया। स्थानीय पुलिस की अपील पर एटीएस ने भी मामले में जांच शुरू की।
इस दौरान सामने आया कि रायबरेली को केंद्र बनाकर अलग-अलग जिलों में जनसेवा केंद्रों से ऐसे ही फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जा रहे हैं। इसका फायदा यह होता कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र पर फर्जी आधार काॅर्ड भी तैयार हो जाता था। इस आधार कॉर्ड पर फर्जी प्रपत्रों के जरिए आसानी से पासपोर्ट बन जाता है। इसके अलावा जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड के सहारे दूसरे देश के नागरिक फर्जी तरीके अपना निवास प्रमाणपत्र भी बनवा लेते हैं।
एटीएस जांच कर रही है कि पकड़े गए संदिग्धों में किसी के संबंध पीएफआई से तो नहीं हैं। मुखबिर की सूचना पर एटीएस ने शुक्रवार सुबह ही गोरखपुर के गोला इलाके से भी फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने वाले एक संविदा कर्मी को गिरफ्तार किया है। सूत्रों ने बताया कि यह संविदाकर्मी आधार के साथ स्वास्थ्य सेवाओं से भी जुड़ा था।
आपके आधार से कितने मोबाइल नंबर लिंक हैं? यहां जानें
- फोटो : istock
जनसेवा केंद्र में देश की सुरक्षा संबंधी बड़ा घालमेल
एटीएस के सूत्रों का मानना है कि जनसेवा केंद्रों के संचालक आर्थिक लाभ या प्रभाव में आकर देशविरोधी क्रियाकलापों में शामिल हो जा रहे हैं। अगर एक साथ बड़े स्तर पर जिले की पुलिस भी इन केंद्रों की जांच कर ले तो एक बड़े रैकेट को खोला जा सकता है। एटीएस सूत्रों का दावा है कि प्रदेश में अगर जनसेवा केंद्रों की जांच हो जाए तो कई हैरान करने वाले मामले सामने आ सकते हैं। गोरखपुर में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवाए जाने की सूचना मिली है।
फर्जी क्यूआर कोड करीब डेढ़ महीने तक होता है मान्य
सूत्रों की मानें तो जनसेवा केंद्र से बनाए जाने वाले जन्म प्रमाणपत्र की वैधता को फर्जी कर पाना मुश्किल है। सूत्रों ने बताया कि 65 से 70 वर्ष के लोगों ने फर्जी तरीके से अपना जन्म प्रमाणपत्र बनवाकर आधार कार्ड बनवाया है। फर्जी तरीके से बनाए जाने वाले जन्म प्रमाणपत्र को पहली नजर में फर्जी साबित ही नहीं कर सकते।
एटीएस के सूत्रों का मानना है कि जनसेवा केंद्रों के संचालक आर्थिक लाभ या प्रभाव में आकर देशविरोधी क्रियाकलापों में शामिल हो जा रहे हैं। अगर एक साथ बड़े स्तर पर जिले की पुलिस भी इन केंद्रों की जांच कर ले तो एक बड़े रैकेट को खोला जा सकता है। एटीएस सूत्रों का दावा है कि प्रदेश में अगर जनसेवा केंद्रों की जांच हो जाए तो कई हैरान करने वाले मामले सामने आ सकते हैं। गोरखपुर में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवाए जाने की सूचना मिली है।
फर्जी क्यूआर कोड करीब डेढ़ महीने तक होता है मान्य
सूत्रों की मानें तो जनसेवा केंद्र से बनाए जाने वाले जन्म प्रमाणपत्र की वैधता को फर्जी कर पाना मुश्किल है। सूत्रों ने बताया कि 65 से 70 वर्ष के लोगों ने फर्जी तरीके से अपना जन्म प्रमाणपत्र बनवाकर आधार कार्ड बनवाया है। फर्जी तरीके से बनाए जाने वाले जन्म प्रमाणपत्र को पहली नजर में फर्जी साबित ही नहीं कर सकते।
एटीएस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
सूत्रों ने बताया कि केंद्र वाले मनमाने तरीके से रुपये लेकर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और उसका क्यूआर कोड बना देते हैं। अगर इस फर्जी क्यूआर को स्कैन करें तो आधिकारिक वेबसाइट crsorgi.gov.in खुल जाती है। सूत्रों ने बताया कि ये क्यूआर कोड सिर्फ डेढ़ महीने के लिए ही वैध होता है।
जबकि नगर निगम वाला जन्म प्रमाणपत्र आजीवन के लिए वैध होता है। ऐसे में एटीएस उस नेटवर्क और सोशल साइट की भी जांच कर रही है, जिसके सहारे ये फर्जी वेबसाइट और क्यूआर कोड तैयार कर लेते हैं।
नेपाली और भूटानी के आधार बनाए जाने पर हो चुकी है कार्रवाई
शहर के एक जनसेवा केंद्र पर बड़ी संख्या में नेपालियों और भूटानियों के फर्जी आधार कार्ड बनाए गए थे। सूत्रों ने बताया कि आधार केंद्र में फर्जी दस्तावेजों के सामने आने पर केंद्र की तरफ से एक अधिकारी पर कार्रवाई भी की गई थी। हालांकि, इसमें केस दर्ज नहीं हुआ था। आधार केंद्र से अधिकारी की सेवा पूरी तरफ समाप्त कर दी गई थी।