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Gorakhpur News: ठगी ही नहीं... जान भी जोखिम में डालते है एंबुलेंस माफिया

Mon, 30 Oct 2023 10:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 30 Oct 2023 10:43 AM IST
सार

सरकारी एंबुलेंस 108 या 102 के सेवा विस्तार की योजना तो है मगर उसकी सुविधा ले पाना आसान नहीं है। ऐसे में इमरजेंसी पड़ने पर एंबुलेंस के दलाल तीमारदार को ऐसा समझाते हैं कि वह नहीं पहुंचाया तो उनकी जान ही चली जाएगी। परेशान लोगों को यही सच्चे मददगार नजर आते हैं और मजबूरी में मुफ्त की सेवा का पांच हजार से सात हजार रुपये देते हैं।

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Not only fraud ambulance mafia also puts life at risk
प्राइवेट एंबुलेंस। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 एंबुलेंस माफिया मरीजों के साथ सिर्फ ठगी ही नहीं कर रहे हैं बल्कि, जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। इनके एंबुलेंस में ऑक्सीजन, पैरा मेडिकल स्टॉफ जैसी कोई सुविधा नहीं होती हैं, जिससे इमरजेंसी में मरीज की जान बचाई जा सके। वह सिर्फ टैक्सी ही है। मेडिकल कॉलेज से प्राइवेट अस्पताल ले जाने के बीच मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे ही होती है।

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रास्ते में इमरजेंसी हुई तो बचाने का एक भी उपकरण नहीं मिल पाएगा। हाल के दिनों में मेडिकल कॉलेज परिसर से पकड़े गए 31 से अधिक एंबुलेंस में सिर्फ दो में ही मेडिकल संबंधित सुविधाएं थी, बाकी सिर्फ नाम की ही एंबुलेंस निकली। अब पुलिस ने आरटीओ व स्वास्थ्य विभाग को यह जानकारी देगी ताकि पंजीकरण के समय सावधानी बरती जा सके।
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जानकारी के मुताबिक, सरकारी एंबुलेंस 108 या 102 के सेवा विस्तार की योजना तो है मगर उसकी सुविधा ले पाना आसान नहीं है। ऐसे में इमरजेंसी पड़ने पर एंबुलेंस के दलाल तीमारदार को ऐसा समझाते हैं कि वह नहीं पहुंचाया तो उनकी जान ही चली जाएगी। परेशान लोगों को यही सच्चे मददगार नजर आते हैं और मजबूरी में मुफ्त की सेवा का पांच हजार से सात हजार रुपये देते हैं।

इसकी कीमत भी वक्त पर निर्भर करता है। समय यदि रात का है तो रुपया भी ज्यादा लगेगा है। पुलिस ने सख्ती की तो एंबुलेंस मरीज माफिया पकड़े जाने लगे। एंबुलेंस को सीज करने के साथ ही अब उसका दूसरा सच भी सामने आने लगा है कि ये एंबुलेंस सिर्फ मरीज से ठगी ही नहीं, बल्कि जान भी जोखिम में डाल रही हैं।

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एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि पुलिस एंबुलेंस मरीज माफिया पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। संबंधित विभागों को भी इसकी जानकारी भेजी जाती है।

एंबुलेंस में होनी चाहिए यह सुविधाएं

  • एंबुलेंस में प्रशिक्षित पैरा-मेडिकल स्टाफ होने चाहिए
  • ऑक्सीजन सिलिंडर और फिल्टर पानी व्यवस्था होनी चाहिए
  • इमरजेंसी के लिए आवश्यक दवाएं होनी चाहिए
  • रॉयल्स ट्यूब होना चाहिए (इसका इस्तेमाल जहर निगलने के केस में पेट से निकालने के लिए होता है)
  • स्टेथेस्कोप, बीपी मॉनीटर, फोल्डिंग मशीन और पावरफुल टॉर्च भी होना अनिवार्य है।

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मानकों की अनदेखी, कभी नहीं होती चेकिंग

एंबुलेंस के नाम पर इन गाड़ियों को रजिस्ट्रेशन में भी फायदा मिलता है। नियमानुसार रजिस्ट्रेशन के समय इनमें सारे जीवन रक्षक उपकरण होने चाहिए। एंबुलेंस का टोल टैक्स नहीं लगता है, उसका चालान नहीं होता है। यही नहीं सड़कों पर दौड़ रही प्राइवेट एंबुलेंस में जीवन रक्षक उपकरण है या नहीं इसकी हकीकत जानने की जहमत जिम्मेदार अफसरों ने कभी नहीं उठाई। स्वास्थ्य विभाग और न तो आरटीओ ने हकीकत जानने का प्रयास किया। बस नीली बत्ती हूटर का सहारा लेकर यह फर्राटे भरते हैं।

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