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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   NE Railway library is now on digital platform Books will be revealed in a single click

घर बैठे खोजें 60 वर्ष पुरानी लाइब्रेरी में अपनी पसंद की पुस्तकें, एक क्लिक करते ही मिल जाएगी सारी जानकारी

Wed, 26 Aug 2020 05:23 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 26 Aug 2020 05:23 PM IST
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NE Railway library is now on digital platform Books will be revealed in a single click
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय की 60 वर्ष पुरानी लाइब्रेरी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ गई है। 35 हजार पुस्तकों में अपनी पसंद चुनने में अब रेलकर्मियों को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। वे घर बैठे ही पुस्तकों की सूची एक क्लिक पर ऑनलाइन देख सकेंगे।

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यही नहीं, सेवानिवृत्त रेलकर्मी भी जल्द ही वेद, पुराण उपनिषद और दुर्लभ पौराणिक पुस्तकों के अलावा आध्यात्मिक, राजनीतिक दर्शन की किताबें पढ़ सकेंगे। उन्हें भी सदस्य बनाने की दिशा में काम तेजी से चल रहा है।
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वर्ष 1960 में स्थापित इस लाइब्रेरी को समृद्ध बनाने के साथ उसे ऑनलाइन कर दिया गया है। रेलवे की वेबसाइट पर जाकर लाइब्रेरी सेक्शन में एक क्लिक करते ही पुस्तकें ऑनलाइन होंगी। लाइब्रेरी में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी, हिंदी विश्वकोष, आजादी से पूर्व के गजेटियर, रेलवे की दुर्लभ पांडुलिपियों सहित 18वीं सदी की पुस्तकें संरक्षित हैं।
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ग्रंथालय में संगीत, ऋषि साहित्य, धर्म शास्त्रों के अलावा महात्मा गांधी, नेहरू, आंबेडकर, ओशो और अरविंदो आदि के कलेक्शन मौजूद हैं। प्रेमचंद, अज्ञेय, भारतेंदु हरिश्चंद्र, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामधारी सिंह दिनकर, हरिवंश राय बच्चन, माखन लाल चतुर्वेदी, महादेवी वर्मा की साहित्य रचनाएं भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्राचीन और आधुनिक भारत ही नहीं, विश्व की दुर्लभतम जानकारियां भी पुस्तकों में समाहित हैं।

ऐसे सर्च करें पसंद की पुस्तक

पूर्वोत्तर रेलवे की वेबसाइट पर जाकर ई-ग्रंथालय पर क्लिक करना होगा। क्लिक करते ही पुस्तकों को खोजने का ऑप्शन आएगा। इसमें छह तरह से पुस्तकें खोजी जा सकती हैं। पुस्तक का नाम, विषय, प्रकाशन वर्ष, प्रकाशक का नाम, भाषा के अनुसार और लेखक का नाम डालते ही पुस्तकों की सूची स्क्रीन पर आ जाएगी।

बेकार हो गईं 45 हजार पुस्तकें
लाइब्रेरी में पुरानी हो चुकीं करीब 45 हजार पुस्तकें बेकार हो चुकी हैं। पन्नों के फटने व बाइंडिंग आदि न होने के चलते कंडम कर दी गई हैं।

एनईआर के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि लाइब्रेरी को डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया गया है। इससे पुरानी पुस्तकों को खोजने में सुविधा होगी। घर बैठे ही रेलकर्मी जान सकेंगे कि उनकी काम की पुस्तक है कि नहीं। इससे अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। यह सुविधा जल्द ही सेवानिवृत्त रेलकर्मियों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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