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Gorakhpur News: आज पूरा होगा नवरात्र व्रत, मंदिरों व घरों में होगा कन्या पूजन
Wed, 17 Apr 2024 04:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 17 Apr 2024 04:32 AM IST
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फोटो-
- मंदिरों में लगेगा भक्तों का तांता
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। नवरात्र की नवमी को बुधवार को प्रमुख देवी मंदिरों में दर्शन पूजन करके लोग व्रत पूर्ण करेंगे। मंदिरों व घरों में कन्या पूजन कर भगवती की स्तुति की जाएगी। नवरात्र करने वाले लोग हवन करके व्रत पूर्ण करेंगे। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान व प्रसाद वितरण करेंगे।
ज्योतिर्विद जोखन पांडेय ने बताया कि नवमी बुधवार सुबह सूर्योदय पांच बजकर 41 मिनट से सायंकाल पांच बजकर 22 मिनट के अंदर कभी भी हवन किया जा सकता है। नवमी तिथि शाम पांच बजकर 22 मिनट तक है।
ऐसे करें हवन
हवन में धूप, नारियल, गुग्गुल, मखाना, काजू , किसमिस, छुहारा ,मूंगफली ,बेलपत्र ,बेल की गुद्दी, छुहारा, सुगंधित पदार्थ जैसे चंदन का चूर्ण इत्यादि का प्रयोग करना उत्तम माना जाता है। उसमें तिल घी और गुड़ भी मिलावें।
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हवन के लिए प्रज्ज्वलित करने के लिए आम की लकड़ी, बेल की लकड़ी, चंदन की लकड़ी उत्तम मानी जाती है। हवन करने से पहले पूर्व स्थापित देवताओं की पंचोपचार या षोडशोपचार से पूजन करें। यदि देवताओं की स्थापना नहीं हुई है तो एक ही उपचार से या हाथ जोड़कर देवताओं का स्मरण कर लें। जहां हवन करना है उसके चारो और कुश बिछा दें। कपूर जलाकर अग्नि पूजन करें। उसके बाद से गणेश देवता, नवग्रह और ग्रामदेवता इत्यादि को आहुति प्रदान करें। पश्चात ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे-- मंत्र से एक माला आहुति दें। यदि एक माला आहुति न दे पाते हों, तो 28 बार अवश्य ही आहुति दें।
देवी भागवत में बताया गया है कि दुर्गा सप्तशती का प्रत्येक श्लोक मंत्र है। अतः विस्तार से हवन करना चाहते हैं तो कवच, कीलक, अर्गला का पाठ करते हुए सप्तशती के सभी 13 अध्याय के मंत्रों से स्वाहा संयुक्त कर आहुति प्रदान करें।
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- मंदिरों में लगेगा भक्तों का तांता
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। नवरात्र की नवमी को बुधवार को प्रमुख देवी मंदिरों में दर्शन पूजन करके लोग व्रत पूर्ण करेंगे। मंदिरों व घरों में कन्या पूजन कर भगवती की स्तुति की जाएगी। नवरात्र करने वाले लोग हवन करके व्रत पूर्ण करेंगे। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान व प्रसाद वितरण करेंगे।
ज्योतिर्विद जोखन पांडेय ने बताया कि नवमी बुधवार सुबह सूर्योदय पांच बजकर 41 मिनट से सायंकाल पांच बजकर 22 मिनट के अंदर कभी भी हवन किया जा सकता है। नवमी तिथि शाम पांच बजकर 22 मिनट तक है।
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ऐसे करें हवन
हवन में धूप, नारियल, गुग्गुल, मखाना, काजू , किसमिस, छुहारा ,मूंगफली ,बेलपत्र ,बेल की गुद्दी, छुहारा, सुगंधित पदार्थ जैसे चंदन का चूर्ण इत्यादि का प्रयोग करना उत्तम माना जाता है। उसमें तिल घी और गुड़ भी मिलावें।
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हवन के लिए प्रज्ज्वलित करने के लिए आम की लकड़ी, बेल की लकड़ी, चंदन की लकड़ी उत्तम मानी जाती है। हवन करने से पहले पूर्व स्थापित देवताओं की पंचोपचार या षोडशोपचार से पूजन करें। यदि देवताओं की स्थापना नहीं हुई है तो एक ही उपचार से या हाथ जोड़कर देवताओं का स्मरण कर लें। जहां हवन करना है उसके चारो और कुश बिछा दें। कपूर जलाकर अग्नि पूजन करें। उसके बाद से गणेश देवता, नवग्रह और ग्रामदेवता इत्यादि को आहुति प्रदान करें। पश्चात ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे
देवी भागवत में बताया गया है कि दुर्गा सप्तशती का प्रत्येक श्लोक मंत्र है। अतः विस्तार से हवन करना चाहते हैं तो कवच, कीलक, अर्गला का पाठ करते हुए सप्तशती के सभी 13 अध्याय के मंत्रों से स्वाहा संयुक्त कर आहुति प्रदान करें।