उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के नौसड़ बस स्टेशन पर लगाई गई सूची में 95 बसों का ब्यौरा दिया गया है। इसमें साफ तौर पर लिखा है कि बस स्टेशन से कौन सी बस कहां कितने बजे जाएगी। लेकिन हालत ये है कि नौसड़ बस स्टेशन से किसी भी बस का कोई संचालन नहीं किया जाता। जबकि शहर को जाम से बचाने के लिए नौसड़ में तीन करोड़ की लागत से बस स्टेशन का निर्माण कराया गया। शुक्रवार को भी यहां तमाम मुसाफिर पहुंचे लेकिन बस नहीं मिलने पर वे निराश हुए।
गोरखपुर में तीन करोड़ की लागत से बना है ये बस स्टेशन, यहां एक भी बस का नहीं होता है संचालन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कई शहरों के लिए मिलती है बस
गोरखपुर से अन्य शहरों के लिए यहां से बसें मिलती हैं। जबकि बड़हलगंज, आजमगढ़, मऊ, वाराणसी , प्रयागराज, लखनऊ आदि के लिए नौसड़ बस स्टेशन से बसें चलाने की घोषणा हुई थी। इसकी तस्दीक स्टेशन पर टंगी बस की सूची से होती है। डीएम के निर्देश के बावजूद परिवहन निगम की ओर से एक भी बस इन रुट पर नहीं चलाई जा रही है। तीन करोड़ रुपये की लागत से बना यह बस स्टेशन सिर्फ बस स्टॉप के रुप में यात्रियों को सेवाएं दे रहा है।
डीएम ने शहर को जाम मुक्त कराने के लिए निर्देश दिया था कि लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज से आने वाली बसें नौसड़ बस स्टेशन पर ही रुकेंगी और वहीं से संचालित होंगी। इसके बाद वहां 95 बसों की सूची लगा दी गई। बड़ी संख्या में यात्री वहां पहुंचने भी लगे।
बता दें कि कुछ दिनों के लिए कागजों पर बसों का संचालन भी हुआ लेकिन फिर बसों का संचालन नौसड़ से बंद कर दिया गया। बसों का संचालन बंद होने के पीछे आरएम ने दावा था कि शहर में बसों से लगने वाली जाम की समस्या से निजात मिल गई है। ऐसे मे नौसड़ से बसों का संचालन नहीं किया जाएगा। वहां सिर्फ बसों के रुकने की व्यवस्था होगी।
राप्तीनगर डिपो के एआरएम परशुराम पांडेय ने बताया कि कोरोना काल में परिवहन निगम को हो रहे घाटे के मद्देनजर लगभग 30 प्रतिशत बसों को सरेंडर कर दिया गया है जिससे बसें समय सारणी के हिसाब से नहीं चल पा रही है।
गोरखपुर आरएम पीके तिवारी ने बताया कि ज्यादातर बसें समय पर ही चलाई जा रही हैं। कभी-कभी बसें खराब हो जाती हैं तो उन्हें रद्द कर दिया जाता है। ऐसे में उससे समय सारणी के हिसाब से बसों का संचालन नहीं हो पाता है।