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कृषि कानून वापस हुए बिना खत्म नहीं होगा आंदोलन : नरेश टिकैत
Thu, 25 Feb 2021 08:59 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 25 Feb 2021 08:59 PM IST
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बस्ती में शहीद किसानों की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते नरेश टिकैत व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला।
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने बृहस्पतिवार को मुंडेरवा के किसान महापंचायत में भाजपा सरकार पर हमला बोला। कहा कि कृषि कानूनों के वापस हुए बिना किसान आंदोलन खत्म होने वाला नहीं है। उन्होंने किसान आंदोलन में हिंसा पर चिंता जताई। कहा कि हिंसा पतन का कारण बनती है। टिकैत ने कहा कि सरकार जांच करा ले। यदि किसान और किसान नेता दोषी हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करे।
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मुंडेरवा चीनी मिल तिराहे के शहीद स्थल पर माल्यार्पण करने के बाद महापंचायत में टिकैत ने कहा कि तीनों कृषि कानून किसानों के खिलाफ हैं। किसानों के सामने आंदोलन के अलावा अब कोई रास्ता नहीं बचा है। हालांकि अभी भी हमें सरकार से उम्मीद है। हम बात करने के लिए तैयार हैं, मगर बातचीत करें तो किससे। उन्होंने कहा कि सरकार की सोच गलत है।
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टिकैत ने ऐलान किया कि किसान सांसद और विधायक का बहिष्कार करें। यह महज आंदोलन नहीं, धर्मयुद्ध है। सरकार किसानों के उत्थान की बातें तो करती है, लेकिन धरातल पर ऐसा नहीं है। किसानों की मांग को नजरअंदाज करने के परिणाम आने वाले समय में गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश के मुखिया जादूगर के रूप में आमजन को सपने दिखा रहे हैं। जनता उनकी चाल समझ चुकी है। सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून बनाना चाहिए। जब तक सरकार कानून नहीं बनाएगी, आंदोलन जारी रहेगा।
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टिकैत ने कहा कि सरकार विकास के नाम पर कौड़ियों के भाव किसानों की जमीन अधिकृत कर लेती है। सरकार ने घोषणा की थी कि बाजार भाव से चार गुना अधिक मूल्य पर किसानों की जमीन खरीदेगी। आज पूरे देश का किसान संगठन की तरफ आशा भरी निगाहों से देख रहा है।
ऐसे में हम सभी संगठित होकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन चलाएं। उन्होंने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। कहा कि पूंजीपति हमारा रेट निर्धारित करेगा और बाजार पर बिचौलियों का कब्जा होगा। कांट्रैक्ट फार्मिंग अर्थात ठेके पर खेती बड़ी-बड़ी कंपनियां करेंगी।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार ने कहा कि सरकार को किसानों के हित में स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करना चाहिए। जब किसान संगठित रहेंगे तो सारी समस्या का समाधान हो जाएगा। 2014 के चुनाव में किसान यूनियन ने भाजपा का भरपूर सहयोग किया। सरकार किसानों को कुछ देना ही चाहती है तो पेट्रोलियम पदार्थों पर से संपूर्ण टैक्स हटा ले।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है। किसानों की फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं दिया जा रहा है। युवा भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि इस धरती से हमें यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि हम आंदोलन को अंतिम सांस तक चलाएं। मंडल महासचिव शोभाराम ठाकुर ने कहा कि आज किसानों को संगठित होने की आवश्यकता है। सहकारी गन्ना समिति मुंडेरवा के पूर्व अध्यक्ष व भाकियू के मंडल उपाध्यक्ष दीवान चंद्र पटेल ने कहा कि सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील नहीं है।
महापंचायत को राष्ट्रीय सचिव सुरेश वर्मा, राघवेंद्र शाही, मारतेंद्र प्रताप सिंह, जयराम चौधरी, जनार्दन मिश्र, प्रदीप पांडेय, विनय सिंह, रामनवल, राम मनोहर, इश्तियाक अहमद, रामफेर, घनश्याम, हरिप्रसाद, फूलचंद, गौरीशंकर, राजेंद्र चौधरी, अनूप चौधरी ने भी संबोधित किया। संचालन राष्ट्रीय सचिव घनश्याम वर्मा ने किया। इस मौके पर रालोद के राष्ट्रीय महासचिव राजा ऐश्वर्यराज सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष राधेश्याम चौधरी, रामदुलारे सिंह, रामचंदर चौधरी, सतीश कुमार, हृदय राम, ओमप्रकाश चौधरी, सपा के बृजेश मिश्रा, राम शंकर निराला, कांग्रेस के कौशल त्रिपाठी, देवेंद्र श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था
मुंडेरवा चीनी मिल गेट, रेलवे स्टेशन, रेलवे क्रॉसिंग, मुंडेरवा कस्बे के आसपास सभी चौराहों से लेकर महापंचायत स्थल तक पुलिस की ओर से सुरक्षा के लिए चुस्त दुरुस्त व्यवस्था रही। किसी प्रकार की अशांति व्यवस्था न फैलने पाए, उसके लिए पुलिसकर्मी महापंचायत स्थल के चारों तरफ मुस्तैद रहे। किसानों के लिए प्रशासन ने अस्थाई शौचालय और पेयजल के लिए इंतजाम भी कर रखा था।
रूट में किया गया था बदलाव
महापंचायत को देखते हुए बस्ती और कांटे से रोडवेज बसों और भारी वाहनों को बाईपास की ओर से डायवर्ट कर दिया गया था। इसके लिए बस्ती में फुटहिया पर बैरीकेड किया गया था।
ऐसे में हम सभी संगठित होकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन चलाएं। उन्होंने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। कहा कि पूंजीपति हमारा रेट निर्धारित करेगा और बाजार पर बिचौलियों का कब्जा होगा। कांट्रैक्ट फार्मिंग अर्थात ठेके पर खेती बड़ी-बड़ी कंपनियां करेंगी।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार ने कहा कि सरकार को किसानों के हित में स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करना चाहिए। जब किसान संगठित रहेंगे तो सारी समस्या का समाधान हो जाएगा। 2014 के चुनाव में किसान यूनियन ने भाजपा का भरपूर सहयोग किया। सरकार किसानों को कुछ देना ही चाहती है तो पेट्रोलियम पदार्थों पर से संपूर्ण टैक्स हटा ले।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है। किसानों की फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं दिया जा रहा है। युवा भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि इस धरती से हमें यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि हम आंदोलन को अंतिम सांस तक चलाएं। मंडल महासचिव शोभाराम ठाकुर ने कहा कि आज किसानों को संगठित होने की आवश्यकता है। सहकारी गन्ना समिति मुंडेरवा के पूर्व अध्यक्ष व भाकियू के मंडल उपाध्यक्ष दीवान चंद्र पटेल ने कहा कि सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील नहीं है।
महापंचायत को राष्ट्रीय सचिव सुरेश वर्मा, राघवेंद्र शाही, मारतेंद्र प्रताप सिंह, जयराम चौधरी, जनार्दन मिश्र, प्रदीप पांडेय, विनय सिंह, रामनवल, राम मनोहर, इश्तियाक अहमद, रामफेर, घनश्याम, हरिप्रसाद, फूलचंद, गौरीशंकर, राजेंद्र चौधरी, अनूप चौधरी ने भी संबोधित किया। संचालन राष्ट्रीय सचिव घनश्याम वर्मा ने किया। इस मौके पर रालोद के राष्ट्रीय महासचिव राजा ऐश्वर्यराज सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष राधेश्याम चौधरी, रामदुलारे सिंह, रामचंदर चौधरी, सतीश कुमार, हृदय राम, ओमप्रकाश चौधरी, सपा के बृजेश मिश्रा, राम शंकर निराला, कांग्रेस के कौशल त्रिपाठी, देवेंद्र श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था
मुंडेरवा चीनी मिल गेट, रेलवे स्टेशन, रेलवे क्रॉसिंग, मुंडेरवा कस्बे के आसपास सभी चौराहों से लेकर महापंचायत स्थल तक पुलिस की ओर से सुरक्षा के लिए चुस्त दुरुस्त व्यवस्था रही। किसी प्रकार की अशांति व्यवस्था न फैलने पाए, उसके लिए पुलिसकर्मी महापंचायत स्थल के चारों तरफ मुस्तैद रहे। किसानों के लिए प्रशासन ने अस्थाई शौचालय और पेयजल के लिए इंतजाम भी कर रखा था।
रूट में किया गया था बदलाव
महापंचायत को देखते हुए बस्ती और कांटे से रोडवेज बसों और भारी वाहनों को बाईपास की ओर से डायवर्ट कर दिया गया था। इसके लिए बस्ती में फुटहिया पर बैरीकेड किया गया था।