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Gorakhpur News: 'नफीस' अंजान, पुलिस ढो रही चोर-लुटेरों के निशान- जानें क्यों नहीं मिल पा रहा इसका लाभ
Sun, 30 Jun 2024 11:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jun 2024 11:09 AM IST
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अपराध (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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अपराधियों की कुंडली तैयार करने के लिए एक जुलाई 2022 को नफीस (नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) सेल का गठन किया गया, लेकिन कर्मचारियों की ट्रेनिंग नहीं होने से इसका लाभ पुलिस को नहीं मिल पा रहा है।
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दो वर्ष बाद भी आलम यह है कि छह हजार से अधिक आरोपियों के फिंगर प्रिंट तो इस साफ्टवेयर में अपलोड हो गए हैं, लेकिन पुलिस को अपराध होने पर फिंगर प्रिंट के मिलान के लिए मुख्यालय लखनऊ का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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बताया जा रहा है कि जिले में नफीस सेल में तैनात कर्मचारियों की अभी ट्रेनिंग नहीं हुई है। इस वजह से वे केवल फिंगर प्रिंट लेने तक ही सीमित हैं। फिंगर प्रिंट के मिलान के लिए कर्मचारियों की ट्रेनिंग काफी दिनों से लंबित है। इस वजह से बदमाशों को पकड़ने में जिले की पुलिस नफीस सेल की मदद नहीं ले पा रही है।
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गिरफ्तारी और सजा के बाद लिया जाता है फिंगर प्रिंट
गोलघर काली मंदिर स्थित एसपी अपराध के ऑफिस में नफीस सेल का दफ्तर है। यहां प्रतिदिन पांच से छह आरोपियों के फिंगर प्रिंट लिए जाते हैं। चोरी, लूट और हत्या समेत अन्य अपराधों में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जेल जाने से पहले पुलिस, नफीस ऑफिस जाकर उनका फिंगर प्रिंट करवाती है। कोर्ट में किसी भी आरोप में सजा होने के बाद आरोपी का वहीं पर फिंगर प्रिंट लिया जाता है।
पुलिस के लिए मददगार साबित हो सकता है नफीस
इस सॉफ्टवेयर के जरिये आरोपियों का डाटा एनसीआरबी में भी सुरक्षित रखा जा रहा है। इसमें नाम व पहचान डालते ही एक क्लिक में संबंधित आरोपी की पूरी कुंडली खुल जाती है। इसके अलावा नाम बदलकर और छिपकर वारदात करने वाले शातिरों पर भी शिकंजा कसने में इससे आसानी होती है।
इसके अलावा कुछ ऐसे आरोपी भी हैं, जो कहीं बड़े व छोटे अपराध में जेल जाते हैं, लेकिन रिकॉर्ड न होने के कारण पुलिस उन पर कार्रवाई नहीं कर पाती। ऐसे आरोपियों को बेनकाब करने के लिए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का 'नफीस' काफी कारगर साबित होगा।
एसपी अपराध सुधीर जायसवाल ने बताया कि नफीस सेल के कर्मचारियों की ट्रेनिंग कराई जानी है। इसके लिए बात चल रही है। अभी फिंगर प्रिंट का मिलान कराने के लिए विवेचक को मुख्यालय जाना पड़ रहा है। बहुत जल्द यह दौड़भाग खत्म हो जाएगी।