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गोरखपुर: गलती लिपिक की और बिजली चोरी का मुकदमा ग्राहक पर, जानिए क्या है पूरा मामला
Fri, 17 Sep 2021 01:03 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 17 Sep 2021 01:03 PM IST
सार
मेहताब ने बताया कि बिल में गड़बड़ी विभाग ने की है और बिजली चोरी का मुकदमा मुझपर दर्ज किया गया है जबकि नियमानुसार गलती करने वाले पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
गोरखपुर में बिजली निगम के लिपिक की गलती का खामियाजा जंगबहादुर अली गांव के मेहताब को झेलना पड़ रहा है। विजिलेंस ने मेहताब पर बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमे की कार्रवाई के बाद अब मेहताब ग्रामीण खंड में अपने बिल को लेकर घूम रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिल में गड़बड़ी विभाग ने की है और बिजली चोरी का मुकदमा मुझपर दर्ज किया गया है जबकि नियमानुसार गलती करने वाले पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, निगम की तरफ से जितने भार का कनेक्शन उन्हें दिया गया उसी हिसाब से वह बिजली बिल का समय से भुगतान भी कर रहे हैं।
दरअसल, मोहरीपुर क्षेत्र के जंगल बहादुर अली गांव के मेहताब कोरोना की पहली लहर में मुंबई से वापस अपने गांव लौटे थे। कुछ दिनों तक खाली बैठने के बाद वापस दूसरी लहर के आने की जब सुगबुगाहट शुरू हुई तो उन्होंने मुंबई या बाहर कहीं पर भी न जाने का फैसला किया। स्वरोजगार के तहत उन्होंने खुद का रोजगार शुरू करने का फैसला किया। इसी के तहत घर पर ही आटाचक्की लगाने का सोचा।
इसके लिए उन्होंने ग्रामीण वितरण खंड प्रथम से औद्योगिक श्रेणी में आठ किलोवाट का कनेक्शन लिया। टीसी जारी होने के बाद मेहताब ने जुलाई-20 में पैसा जमा कर कनेक्शन भी चक्की पर जोड़वा लिया। खंड के लिपिक ने कनेक्शन नंबर पर बिल जारी करने के लिए विवरण भरते समय त्रुटिवश कनेक्शन की विधा के कॉलम में एलएमवी-6 की जगह एलएमवी-2 लिखकर बिल जारी कर दिया। मेहताब हर महीने आने वाले बिजली बिल का नियमित भुगतान करता रहा।
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मेहताब ने बताया कि दो दिन पहले विजिलेंस टीम प्रभारी नरेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने कनेक्शन के कागजात व बिल भुगतान की रसीद मांगी। दोनों कागजात देखने के बाद बोले आपका कनेक्शन औद्योगिक श्रेणी में होना चाहिए जबकि बिल भुगतान एलएमवी-2 में कर रहे है। यह तो बिजली चोरी का मामला है। मेहताब ने टीम को बताया कि उसने औद्योगिक श्रेणी में कनेक्शन लिया है। लेकिन विजिलेंस प्रभारी ने उसकी एक न सुनी।
अगले दिन मेहताब आलम के खिलाफ बिजली थाने में बिजली चोरी की धारा-135 में मुकदमा दर्ज करा दिया। गुरुवार को बिजली थाने के दरोगा विवेचना करने मेहताब के घर पहुंच गए। मुख्य अभियंता ई.राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि, मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी। बिना तथ्य देखे कुछ कहा नहीं जा सकता। वहीं, विजिलेंस प्रभारी नरेंद्र सिंह ने कहा कि मौके पर कागज और भौतिक निरीक्षण के दौरान खामी मिलने पर मुकदमे की कार्रवाई की गई। मौके पर जब टीम जाती है तो उपभोक्ता से उसके प्रमाण मांगती है। जो कागज उपलब्ध कराया जाता उसी आधार पर कार्रवाई की जाती है। अगर, विभागीय त्रुटि हुई है तो विवेचना में चीजें स्पष्ट हो जाएंगी। मुकदमा भी खत्म हो जाएगा।
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दरअसल, मोहरीपुर क्षेत्र के जंगल बहादुर अली गांव के मेहताब कोरोना की पहली लहर में मुंबई से वापस अपने गांव लौटे थे। कुछ दिनों तक खाली बैठने के बाद वापस दूसरी लहर के आने की जब सुगबुगाहट शुरू हुई तो उन्होंने मुंबई या बाहर कहीं पर भी न जाने का फैसला किया। स्वरोजगार के तहत उन्होंने खुद का रोजगार शुरू करने का फैसला किया। इसी के तहत घर पर ही आटाचक्की लगाने का सोचा।
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इसके लिए उन्होंने ग्रामीण वितरण खंड प्रथम से औद्योगिक श्रेणी में आठ किलोवाट का कनेक्शन लिया। टीसी जारी होने के बाद मेहताब ने जुलाई-20 में पैसा जमा कर कनेक्शन भी चक्की पर जोड़वा लिया। खंड के लिपिक ने कनेक्शन नंबर पर बिल जारी करने के लिए विवरण भरते समय त्रुटिवश कनेक्शन की विधा के कॉलम में एलएमवी-6 की जगह एलएमवी-2 लिखकर बिल जारी कर दिया। मेहताब हर महीने आने वाले बिजली बिल का नियमित भुगतान करता रहा।
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मेहताब ने बताया कि दो दिन पहले विजिलेंस टीम प्रभारी नरेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने कनेक्शन के कागजात व बिल भुगतान की रसीद मांगी। दोनों कागजात देखने के बाद बोले आपका कनेक्शन औद्योगिक श्रेणी में होना चाहिए जबकि बिल भुगतान एलएमवी-2 में कर रहे है। यह तो बिजली चोरी का मामला है। मेहताब ने टीम को बताया कि उसने औद्योगिक श्रेणी में कनेक्शन लिया है। लेकिन विजिलेंस प्रभारी ने उसकी एक न सुनी।
अगले दिन मेहताब आलम के खिलाफ बिजली थाने में बिजली चोरी की धारा-135 में मुकदमा दर्ज करा दिया। गुरुवार को बिजली थाने के दरोगा विवेचना करने मेहताब के घर पहुंच गए। मुख्य अभियंता ई.राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि, मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी। बिना तथ्य देखे कुछ कहा नहीं जा सकता। वहीं, विजिलेंस प्रभारी नरेंद्र सिंह ने कहा कि मौके पर कागज और भौतिक निरीक्षण के दौरान खामी मिलने पर मुकदमे की कार्रवाई की गई। मौके पर जब टीम जाती है तो उपभोक्ता से उसके प्रमाण मांगती है। जो कागज उपलब्ध कराया जाता उसी आधार पर कार्रवाई की जाती है। अगर, विभागीय त्रुटि हुई है तो विवेचना में चीजें स्पष्ट हो जाएंगी। मुकदमा भी खत्म हो जाएगा।