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Mangla Gauri Vrat: श्रावण मास का तीसरा मंगला गौरी व्रत आज, विधि-विधान से होगी मां पार्वती की पूजा-अर्चन
Tue, 10 Aug 2021 09:02 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 10 Aug 2021 09:02 AM IST
सार
माता पार्वती के इस व्रत कर विधि पूर्वक पूजन करने से व्रती का अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
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मंगला गौरी व्रत।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
श्रावण मास का तीसरा मंगला गौरी व्रत 10 अगस्त मंगलवार यानी आज है। श्रावण मास में जिस तरह सोमवार का दिन महादेव का माना जाता है। उसी तरह मंगलवार का दिन माता पार्वती का माना गया है। श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन सुहागिनें व्रत रख माता पार्वती की आराधना कर उन्हें प्रसन्न करती हैं।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
पंडित अरविंद गिरी के अनुसार, माता पार्वती के इस व्रत कर विधि पूर्वक पूजन करने से व्रती का अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यदि किसी के दांपत्य जीवन में कोई कष्ट होता है तो वह भी मां पार्वती की कृपा से दूर हो जाता है। अगर व्रती को संतान प्राप्ति की मनोकामना है तो यह व्रत करने से उसकी यह मनोकामना भी पूरी होती है। साथ ही व्रती को मां का आर्शीवाद मिलता है।
मंगला गौरी व्रत पूजन विधि
ज्योतिष आचार्य मनीष मोहन के अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। इसके माता गौरी की तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और आटे से निर्मित दीये में दीपक जलाकर षोडशोपचार विधि से मां का पूजन करें।
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मंगला गौरी व्रत का महत्व
पंडित अरविंद गिरी के अनुसार, माता पार्वती के इस व्रत कर विधि पूर्वक पूजन करने से व्रती का अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यदि किसी के दांपत्य जीवन में कोई कष्ट होता है तो वह भी मां पार्वती की कृपा से दूर हो जाता है। अगर व्रती को संतान प्राप्ति की मनोकामना है तो यह व्रत करने से उसकी यह मनोकामना भी पूरी होती है। साथ ही व्रती को मां का आर्शीवाद मिलता है।
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मंगला गौरी व्रत पूजन विधि
ज्योतिष आचार्य मनीष मोहन के अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। इसके माता गौरी की तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और आटे से निर्मित दीये में दीपक जलाकर षोडशोपचार विधि से मां का पूजन करें।
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