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Mangala Gauri Vrat: सुहागिनें रखेंगी मंगला गौरी व्रत, मां पार्वती होंगी प्रसन्न
Tue, 27 Jul 2021 07:42 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 27 Jul 2021 07:42 AM IST
सार
आज रखा जाएगा श्रावण मास का पहला मंगला गौरी व्रत, विधि-विधान से होगी मां पार्वती की पूजा-अर्चना।
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शिव पार्वती
- फोटो : Social media
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विस्तार
श्रावण मास का पहला मंगला गौरी व्रत मंगलवार को रखा जाएगा। श्रावण मास में जिस तरह सोमवार का दिन महादेव का माना जाता है। उसी तरह मंगलवार का दिन माता पार्वती का माना गया है। श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन सुहागिनें व्रत रख माता पार्वती की आराधना कर उन्हें प्रसन्न करती हैं।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, माता पार्वती के इस व्रत कर विधि पूर्वक पूजन करने से व्रती का अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यदि किसी के दांपत्य जीवन में कोई कष्ट होता है तो वह भी मां पार्वती की कृपा से दूर हो जाता है। अगर व्रती को संतान प्राप्ति की मनोकामना है तो यह व्रत करने से उसकी यह मनोकामना भी पूरी होती है। साथ ही व्रती को मां का आशीर्वाद मिलता है।
मंगला गौरी व्रत पूजन विधि
पंडित जोखन पांडेय के अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठे। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। इसके माता गौरी की तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और आटे से निर्मित दीये में दीपक जलाकर षोडशोपचार विधि से मां का पूजन करें।
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श्रावण में हैं चार मंगलवार
इस बार सावन में 4 मंगलवार पड़ रहे हैं। पहला मंगलवार 27 जुलाई को, दूसरा 3 अगस्त, तीसरा 10 अगस्त को और अंतिम साथ ही चौथा मंगलवार 17 अगस्त को पड़ रहा है।
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मंगला गौरी व्रत का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, माता पार्वती के इस व्रत कर विधि पूर्वक पूजन करने से व्रती का अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यदि किसी के दांपत्य जीवन में कोई कष्ट होता है तो वह भी मां पार्वती की कृपा से दूर हो जाता है। अगर व्रती को संतान प्राप्ति की मनोकामना है तो यह व्रत करने से उसकी यह मनोकामना भी पूरी होती है। साथ ही व्रती को मां का आशीर्वाद मिलता है।
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मंगला गौरी व्रत पूजन विधि
पंडित जोखन पांडेय के अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठे। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। इसके माता गौरी की तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और आटे से निर्मित दीये में दीपक जलाकर षोडशोपचार विधि से मां का पूजन करें।
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श्रावण में हैं चार मंगलवार
इस बार सावन में 4 मंगलवार पड़ रहे हैं। पहला मंगलवार 27 जुलाई को, दूसरा 3 अगस्त, तीसरा 10 अगस्त को और अंतिम साथ ही चौथा मंगलवार 17 अगस्त को पड़ रहा है।