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Exclusive: स्कूल में बालिका से दुष्कर्म की घटना छुपाने पर प्रबंधक व प्रिंसिपल को कोर्ट ने दी सजा, जुर्माना भी लगाया
Wed, 22 Sep 2021 12:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Sep 2021 12:58 PM IST
सार
राजघाट इलाके में 2014 में घटना हुई थी। यहां स्कूल में एक बच्ची के साथ लैंगिक अपराध हुआ था, लेकिन प्रबंधक या प्रिंसिपल ने इसकी सूचना न तो पुलिस को दी और न पीड़िता के घरवालों को दी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर जिले के पब्लिक स्कूल में बालिका से दुष्कर्म की घटना छिपाने पर कोर्ट ने आरोपी प्रबंधक व प्रिंसिपल को कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न भरने पर एक-एक महीने की कारावास की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
गोरखपुर के इस चर्चित मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम नवल किशोर सिंह के फैसले को नजीर माना जा रहा है। कानून के जानकारों का कहना है कि बच्चों से अपराध के मामलों की जानकारी खुद पुलिस को देनी होगी। ऐसा नहीं हुआ तो सजा भुगतनी पड़ सकती है। कोर्ट का यह फैसला गोरखपुर के लिहाज से ऐतिहासिक है। पुलिस के मुताबिक प्रबंधक व प्रिंसिपल ने दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध को छुपाया। लैंगिक अपराध और बालकों के संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अपराध को छुपाना दंडनीय अपराध है। इसी आधार पर प्रबंधक और प्रिंसिपल को कारावास की सजा सुनाई गई।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी संजय कुमार सिंह और विशेष लोक अभियोजक राघवेंद्र त्रिपाठी के अनुसार घटना सात नवंबर 2014 की है। पीड़िता सुबह नौ बजे स्कूल गई थी। दिन में वह घर आई तो मां ने उसके कपड़ों में खून लगा देखा। हतप्रभ मां ने पूछताछ की तो पता चला कि बच्ची से दुष्कर्म हुआ है। बच्ची ने स्कूल के बाथरूम में घटना होने की जानकारी दी। बच्ची ने घटना की जानकारी एक शिक्षक को भी दी थी। शिक्षक ने आरोपी लड़के को मारपीटकर बाथरूम में बंद कर दिया था।
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वाकया सामने आने पर जब बच्ची के परिजन स्कूल गए तो प्रिंसिपल ने सुनवाई नहीं की और दबाव बनाकर मामले में सुलह कराना चाहा।
इसके बाद परिजन पुलिस के पास गए। सात नवंबर को देर रात राजघाट पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दुष्कर्म (376 ग) व पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस की विवेचना के दौरान स्कूल प्रबंधक व प्रिंसिपल ने सहयोग नहीं किया। स्कूल प्रबंधन ने घटना की जानकारी पुलिस और बच्ची के परिजनों तक को नहीं दी। उन्हाेंने आरोपी का नाम भी नहीं बताया। लिहाजा, पुलिस ने प्रबंधक व प्रिंसिपल के खिलाफ लैंगिक अपराध की सूचना न देने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की।
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गोरखपुर के इस चर्चित मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम नवल किशोर सिंह के फैसले को नजीर माना जा रहा है। कानून के जानकारों का कहना है कि बच्चों से अपराध के मामलों की जानकारी खुद पुलिस को देनी होगी। ऐसा नहीं हुआ तो सजा भुगतनी पड़ सकती है। कोर्ट का यह फैसला गोरखपुर के लिहाज से ऐतिहासिक है। पुलिस के मुताबिक प्रबंधक व प्रिंसिपल ने दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध को छुपाया। लैंगिक अपराध और बालकों के संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अपराध को छुपाना दंडनीय अपराध है। इसी आधार पर प्रबंधक और प्रिंसिपल को कारावास की सजा सुनाई गई।
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वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी संजय कुमार सिंह और विशेष लोक अभियोजक राघवेंद्र त्रिपाठी के अनुसार घटना सात नवंबर 2014 की है। पीड़िता सुबह नौ बजे स्कूल गई थी। दिन में वह घर आई तो मां ने उसके कपड़ों में खून लगा देखा। हतप्रभ मां ने पूछताछ की तो पता चला कि बच्ची से दुष्कर्म हुआ है। बच्ची ने स्कूल के बाथरूम में घटना होने की जानकारी दी। बच्ची ने घटना की जानकारी एक शिक्षक को भी दी थी। शिक्षक ने आरोपी लड़के को मारपीटकर बाथरूम में बंद कर दिया था।
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वाकया सामने आने पर जब बच्ची के परिजन स्कूल गए तो प्रिंसिपल ने सुनवाई नहीं की और दबाव बनाकर मामले में सुलह कराना चाहा।
इसके बाद परिजन पुलिस के पास गए। सात नवंबर को देर रात राजघाट पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दुष्कर्म (376 ग) व पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस की विवेचना के दौरान स्कूल प्रबंधक व प्रिंसिपल ने सहयोग नहीं किया। स्कूल प्रबंधन ने घटना की जानकारी पुलिस और बच्ची के परिजनों तक को नहीं दी। उन्हाेंने आरोपी का नाम भी नहीं बताया। लिहाजा, पुलिस ने प्रबंधक व प्रिंसिपल के खिलाफ लैंगिक अपराध की सूचना न देने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की।
जमकर हुआ था बवाल, बिगड़ गई थी कानून व्यवस्था
इस चर्चित मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट नवल किशोर सिंह ने की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने प्रबंधक व प्रिंसिपल को दोषी ठहराया और उन्हें गिरफ्तारी के बाद जेल में काटे गए दिनों के बराबर कारावास की सजा सुनाई और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आरोपियों ने पांच दिन जेल में काटे थे। पॉक्सो एक्ट के मुताबिक पीड़िता की पहचान किन्हीं भी कारणों से उजागर होती है तो ऐसा कृत्य कानूनन दंडनीय अपराध है। लिहाजा, स्कूल, प्रबंधक और प्रिंसिपल किसी का भी नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी संजय कुमार सिंह व विशेष लोक अभियोजक राघवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि स्कूल प्रबंधक व प्रिंसिपल ने न्यायाधीश के समक्ष अपना अपराध स्वीकार किया है। दोषियों ने उम्र, बीमारी व पहले जेल काटने का हवाला देकर कम से कम सजा देने की अपील की थी। इसी आधार पर न्यायाधीश ने दोषियों द्वारा पहले काटे गए जेल के समय के बराबर कारावास और साथ ही जुर्माना लगाया है।
घटना 2014 की है। एक स्कूल में एक बच्ची के साथ लैंगिक अपराध हुआ था, लेकिन प्रबंधक या प्रिंसिपल ने इसकी सूचना न तो पुलिस को दी और न पीड़िता के घरवालों को दी। बाद में जानकारी होने पर जमकर हंगामा हुआ और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। मामले में कई दिनों तक हंगामा हुआ था। लोगों ने घंटाघर में दुकान बंद कर विरोध जताया था। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ गई थी।
सूचना देना जरूरी
अगर आप किसी स्कूल के प्रबंधक या जिम्मेदार पद पर हैं और आपके कैंपस में कोई लैंगिक अपराध होता है तो इसकी तुरंत कानूनी कार्रवाई करानी होगी। ऐसा नहीं करने पर आपका जेल जाना तय है। कोर्ट ने ऐसे ही एक चर्चित मामले में इस तरह की पहली बार सजा सुनाई है। घटना की सूचना न देने पर पुलिस ने प्रबंधक और प्रिंसिपल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी संजय कुमार सिंह व विशेष लोक अभियोजक राघवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि स्कूल प्रबंधक व प्रिंसिपल ने न्यायाधीश के समक्ष अपना अपराध स्वीकार किया है। दोषियों ने उम्र, बीमारी व पहले जेल काटने का हवाला देकर कम से कम सजा देने की अपील की थी। इसी आधार पर न्यायाधीश ने दोषियों द्वारा पहले काटे गए जेल के समय के बराबर कारावास और साथ ही जुर्माना लगाया है।
घटना 2014 की है। एक स्कूल में एक बच्ची के साथ लैंगिक अपराध हुआ था, लेकिन प्रबंधक या प्रिंसिपल ने इसकी सूचना न तो पुलिस को दी और न पीड़िता के घरवालों को दी। बाद में जानकारी होने पर जमकर हंगामा हुआ और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। मामले में कई दिनों तक हंगामा हुआ था। लोगों ने घंटाघर में दुकान बंद कर विरोध जताया था। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ गई थी।
सूचना देना जरूरी
अगर आप किसी स्कूल के प्रबंधक या जिम्मेदार पद पर हैं और आपके कैंपस में कोई लैंगिक अपराध होता है तो इसकी तुरंत कानूनी कार्रवाई करानी होगी। ऐसा नहीं करने पर आपका जेल जाना तय है। कोर्ट ने ऐसे ही एक चर्चित मामले में इस तरह की पहली बार सजा सुनाई है। घटना की सूचना न देने पर पुलिस ने प्रबंधक और प्रिंसिपल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।