Mafia Vinod Upadhyay: एक जनवरी को करीबी का जन्मदिन मनाया, नजदीकी रिश्तेदार पर मुखबिरी का शक
विनोद उपाध्याय जब गोरखपुर विधानसभा क्षेत्र से बसपा के बैनर तले चुनाव लड़ा था, तब नामांकन पत्र पर शहर का ही एक शख्स उसका समर्थक बना था। विनोद का बड़ा भाई जयप्रकाश भी प्रस्तावक बना। सूत्रों की मानें तो विनोद के समर्थक की नेपाल में अच्छी व्यवस्था है।
विस्तार
माफिया विनोद उपाध्याय का अंत हो चुका है, लेकिन अब उसके जानने वालों में तरह-तरह की चर्चा हो रही है। चर्चा है कि विनोद ने एक जनवरी को लखनऊ में अपने किसी करीबी के जन्मदिन पर दावत दी थी। इसमें गिने-चुने 10 से 15 लोगों को बुलाया गया था। इसमें उसका रिश्तेदार भी शामिल था। अब चर्चा है कि उसी रिश्तेदार ने मुखबिरी कराई, जिससे विनोद पुलिस के हत्थे चला गया।
चर्चा है कि फरारी के दिनों में वह अपने एक नजदीकी रिश्तेदार के संपर्क में सबसे ज्यादा रहा। इस रिश्तेदार के आईफोन से फेसचैट के माध्यम से संपर्क में रहता था, जबकि शहर में दूसरे करीबियों जैसे जमीन के धंधेबाज, सूदखोरों और आरएफसी टेंडर का काम देखने वालों से व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क बनाता था।
सूत्रों के मुताबिक, इसी रिश्तेदार को पुलिस और एसटीएफ ने विश्वास में लेकर विनोद की मुखबिरी की योजना बनवाई थी। सूत्र बताते हैं कि सिर्फ यही एक ऐसा रिश्तेदार था, जो विनोद से खुद जब चाहे संपर्क कर सकता था। इसके नाम से भी विनोद ने अच्छी खासी संपत्ति अर्जित की थी। इसी रिश्तेदार के सहारे विनोद तक पहुंचने की योजना बन रही थी कि इसी बीच 6 जनवरी को उसके छत्तीसगढ़ जाने की सूचना मिली।
हालांकि यह भी चर्चा है कि विनोद की गिरफ्तारी अयोध्या से की गई, लेकिन यह एसटीएफ के दावों से अलग है। एसटीएफ ने छत्तीसगढ़ जाने के दौरान उसे सुल्तानपुर में दबोच लिया था। यह भी चर्चा है कि विनोद ने 15 सेकंड तक लगातार फायरिंग की। जवाबी फायरिंग में वह भी घायल हो गया।
विधानसभा चुनाव का प्रस्तावक ही नेपाल में बनता था सहयोगी
विनोद उपाध्याय जब गोरखपुर विधानसभा क्षेत्र से बसपा के बैनर तले चुनाव लड़ा था, तब नामांकन पत्र पर शहर का ही एक शख्स उसका समर्थक बना था। विनोद का बड़ा भाई जयप्रकाश भी प्रस्तावक बना। सूत्रों की मानें तो विनोद के समर्थक की नेपाल में अच्छी व्यवस्था है। वह सुरक्षित स्थान पर विनोद को रुकवाता था।
शहर के एक पुराने सहयोगी के साथ होने की चर्चा
अंदरखाने की चर्चा यह भी है कि विनोद के साथ शहर का एक उसका पुराना सहयोगी भी मुठभेड़ के पहले तक साथ में था, लेकिन मुठभेड़ के वक्त एसटीएफ को विनोद ही अकेला मिला। जानकार बताते हैं कि हो सकता है अंधेरा का फायदा लेकर वह फरार हो गया हो।