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बाली उमर का 'प्यार' पुलिस के लिए बन रहा है सिरदर्द, पढ़ें क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्री

Thu, 03 Sep 2020 02:57 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 03 Sep 2020 02:57 PM IST
सार

  • किशोर वय की मोहब्बत में घर से भागने के मामले पुलिस के लिए बने सिर दर्द
  • जिले में हर दूसरे दिन किशोरी को बहला फुसलाकर भगाने का मामला आ रहा सामने
  • बीते एक माह में दर्ज किए गए 19 मामले, पुलिस अभियान चलाकर कर रही बरामदगी

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love story of Young age couple becoming headache for police in gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कच्ची उम्र का प्रेम घरवालों के लिए जिल्लत तो पुलिस के लिए नई मुसीबत साबित हो रहा है। बीते एक माह में पुलिस तक 19 मामले ऐसे पहुंचे हैं, जिनमें किशोरवय लड़के-लड़की का लगाव दो परिवारों में अलगाव की बड़ी वजह बन गया।

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पुलिस ने इन मामलों में किशोरी को बहला फुसलाकर भगाने के आरोप में केस दर्ज किया। पुलिस जांच में जुटी और किशोरी की बरामदगी हुई तो मामला कुछ अलग निकल गया। पूछताछ में बेटी की रजामंदी का कड़वा सच सामने आया तो खुद को बेबस मान कर कुछ अभिभावक तो यहां तक कह बैठे- इसे तो कुछ दिन हवालात में ही रखो दरोगा जी।
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पुलिस की समस्या अलग है। यदि इन मामलों में किशोरी की बरामदगी नहीं हो पाती, तो उसपर सवाल उठने लगते हैं। आरोपित से मिलीभगत के आरोप लगते हैं। मामला अफसरों तक पहुंचता है तो उनकी नाराजगी भी झेलनी पड़ती है।  
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यह है वजह
पुलिस के मुताबिक, किशोरियों को बहला फुसलाकर भगाने के मामलों के पीछे कहीं अशिक्षा तो कहीं खुद को आधुनिक साबित करने की होड़ प्रमुख वजह है। मनोवैज्ञानिक इसे पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण का प्रभाव बताते हैं। दोनों का ही मानना है कि फिल्म, टीवी के बाद सोशल मीडिया के विविध आयाम की पहुंच हर घर तक है। जीवकोपार्जन की उलझन में अभिभावक बच्चों को पूरा समय नहीं दे पाते। ऐसे में किशोर-किशोरियां इस तरह के मामलों में पड़ जाते हैं।

ज्यादातर मामलों में आती है दोनों की रजामंदी

पुलिस के मुताबिक, इस तरह के मामलों में अक्सर लड़की पक्ष की ओर से तहरीर में छेड़खानी या बहला फुसलाकर ले जाने जैसे आरोप लगाए जाते हैं। जबकि जांच में ज्यादातर मामलों में दोनों की रजामंदी सामने आती है। पकड़े जाने पर लड़की के नाबालिग मिलने पर पुलिस उन्हें घर या महिला आश्रय केंद्र भेजती है, जबकि बालिग युगल को शादी के लिए हरी झंडी दे देती है। कुछ समय पहले ऐसे एक मामले में सरहरी चौकी में ही शादी कराई गई थी।

केस 1:
सहजनवां थाना क्षेत्र से एक किशोरी लापता हो गई। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने बहला फुसला कर भगाने का केस दर्ज किया, फिर तलाश शुरू की गई। बीते 15 अगस्त को पुलिस ने आरोपी विनय उर्फ सनी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में मामला प्रेम प्रपंच का निकला, लेकिन उम्र कम होने की वजह से केस दर्ज कर पुलिस ने आरोपी को जेल भिजवा दिया।

केस 2:
कैंपियरगंज इलाके से 15 साल की लड़की लापता हो गई। परिजनों ने पुलिस को तहरीर देकर अपहरण का आरोप लगाया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर तलाश शुरू की। चार दिन बाद पुलिस ने आरोपी राजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। फिर धमकी देने की धारा बढ़ाकर उसे जेल भेज दिया गया।

केस 3:
गुलरिहा इलाके में भी एक लड़की लापता हो गई। परिजनों ने पुलिस पर कार्रवाई ना करने तक का आरोप लगाया। बाद में पुलिस सक्रिय हुई तो बीते 11 अगस्त को लड़की को आरोपित उसके घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया। बाद में आरोपित को भी पकड़ लिया गया।

ये कहते हैं मनोवैज्ञानिक व समाजशास्त्री

मनोवैज्ञानिक प्रो. सुषमा पांडेय ने बताया कि पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है। कई अभिभावक घर में ओपेन सोसायटी की बात बेहिचक करते हैं। कम उम्र की संतानें इसका सही मायने समझे बिना इस सोसायटी का हिस्सा बनने की कोशिश करती हैं। फिल्में, टीवी सीरियल भी प्यार को अलग तरह से परिभाषित करते हैं। युगल के साथ को आज की जरूरत की तरह पेश करते हैं। बेटा हो या बेटी, इन सारी चीजों का प्रभाव उनके रहन-सहन, सोचने के ढंग पर असर डालता है। भटकाव की नौबत तक भी ले जाता है।

समाजशास्त्री प्रो. मानवेंद्र सिंह ने बताया कि अशिक्षा और अनुशासन की कमी की वजह से ऐसे मामले सामने आते हैं। किशोरावस्था में बच्चों को सही-गलत की ज्यादा समझ नहीं होती। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की होती है कि वे उन पर नजर रखें। उनकी हर गतिविधि का मूल्यांकन करें। बच्चों के व्यवहार में बदलाव आने पर अभिभावक को काउंसिलिंग करानी चाहिए। मित्रवत व्यवहार रखते हुए उन्हें सही और गलत की पहचान करानी चाहिए। सुविधाएं देने में खराबी नहीं है, लेकिन ध्यान रखें कि उनका दुरुपयोग न हो।

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