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Gorakhpur News: प्रदेश प्रभारी के सामने छलका नेताओं का दर्द, गुटबाजी और खींचतान का उठा मुद्दा

Sat, 19 Sep 2026 02:33 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:33 AM IST
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Leaders pour out their grievances before the state in-charge; issues of factionalism and infighting raised.
गोरखपुर। मिशन-2027 की तैयारियों को लेकर भाजपा के प्रदेश प्रभारी एवं राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े के सामने शुक्रवार को संगठन के भीतर की गुटबाजी, खींचतान और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा का मुद्दा उठा। क्षेत्रीय कार्यालय रानीडीहा में पदाधिकारियों और स्थानीय नेताओं के साथ संवाद के दौरान पूर्व पदाधिकारियों ने कहा कि कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। कई मामलों में अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते, जिससे जनता की समस्याओं का समाधान कराने में दिक्कत हो रही है। नेताओं ने संगठन में बेहतर समन्वय और वरिष्ठों को साथ लेकर चलने की जरूरत बताई। तावड़े ने कहा कि यह उनके संज्ञान में है और जल्द सुधार कराया जाएगा।
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बता दें की भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचवि व यूपी प्रभारी विनोद तावड़े बृहस्पतिवार को दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर पहुंचे थे। उनका प्रवास एक दिन और बढ़कर तीन दिवसीय हो गया है। दौरे के पहले दिन उन्होंने सहजनवा में पीएम मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। रात में कुछ कार्यकर्ताओं से मिले व पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. राधा मोहन अग्रवाल के आवास पर डिनर भी किया। शुक्रवार को चार सत्रों में पदाधिकारियों सांसद-विधायकों से संवाद किया। कार्यकर्ताओं की सुनी और उन्हें संगठनात्मक मजबूती का पाठ भी पढ़ाया। गोरखपुर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों की चुनावी तैयारियों का फीडबैक लेने पहुंचे तावड़े ने अलग-अलग बैठकों में पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और मीडिया-सोशल मीडिया टीम से संवाद किया। संवाद के दौरान कुछ नेताओं ने सहयोगी दलों के साथ तालमेल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और निषाद पार्टी को साथ रखना जरूरी है।
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नेताओं का कहना था कि पिछले विधानसभा चुनाव में सुभासपा के साथ नहीं होने से कुछ सीटों पर पार्टी को मामूली अंतर से नुकसान हुआ था। पूर्व जिलाध्यक्षों ने निचलौल-निचलिया, डुमरियागंज समेत कुछ विधानसभा क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले यह देखना जरूरी है कि किन दलों और नेताओं के साथ समन्वय से संगठन को लाभ मिल सकता है। टिकट और संभावित प्रत्याशियों से जुड़े सवाल भी बातचीत में सामने आए।
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इधर, भाजपा कार्यालय पर तावड़े का क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, सह प्रभारी जगदीश पटेल आदि ने स्वागत किया।


15 अक्तूबर तक देनी होगी विधानसभा की रिपोर्ट
तावड़े ने सभी जिलाध्यक्षों को 15 अक्तूबर तक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट देने को कहा। रिपोर्ट में संगठन की स्थिति, स्थानीय राजनीतिक समीकरण, गुटबाजी और खींचतान के साथ यह भी बताना होगा कि किस दल को साथ लेने या किस नेता को जोड़ने से संगठन को लाभ मिल सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुझाव तर्कसंगत और जमीनी तथ्यों पर आधारित होने चाहिए।


गुटबाजी की मांगी गोपनीय रिपोर्ट
प्रदेश प्रभारी ने जिलाध्यक्षों से अपने क्षेत्रों में गुटबाजी और आपसी खींचतान की गोपनीय रिपोर्ट भी मांगी। इसका उद्देश्य संगठन की कमजोरियों को चिह्नित कर उन्हें दूर करना बताया गया। तावड़े ने कहा कि उनके पास सभी 403 विधानसभा सीटों का ब्योरा है। वह स्थानीय पदाधिकारियों से जानकारी इसलिए ले रहे हैं, ताकि जमीनी स्थिति को और बेहतर ढंग से समझा जा सके।

देवरिया और बस्ती से मांगा हार का कारण
संवाद के दौरान देवरिया के जिलाध्यक्ष से पिछले चुनाव में हार के आंकड़े मांगे गए। वहीं, बस्ती के जिलाध्यक्ष से हार के कारणों की जानकारी ली गई। बस्ती में आपसी गुटबाजी और नेताओं की उपेक्षा को वजह बताए जाने पर तावड़े ने कार्यकर्ताओं के असंतोष को भी हार का एक कारण बताया। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भाजपा गठबंधन को करीब 38 प्रतिशत और राजद को करीब 37 प्रतिशत वोट मिला था। उनके अनुसार, करीब एक प्रतिशत के अंतर से सरकार बनने की स्थिति बनी।



पूर्व जनप्रतिनिधियों को साथ जोड़ने पर जोर
तावड़े ने पूर्व जनप्रतिनिधियों और पूर्व पदाधिकारियों के अनुभव का लाभ लेने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे नेताओं के पास अनुभव का भंडार है। उनकी उपेक्षा के बजाय उन्हें संगठन और चुनावी तैयारियों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी स्तर पर दिक्कत आती है तो प्रदेश नेतृत्व को इसकी जानकारी दी जाए।
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