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Gorakhpur News: अवैध धर्म परिवर्तन पर कानून सख्त, सभी थानों में भेजी गई गाइड लाइन

Wed, 11 Sep 2024 01:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2024 01:20 AM IST
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Law strict on illegal religious conversion, guide line sent to all police stations
धर्म परिवर्तन का दोष सिद्ध होने पर अब 14 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा
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केस दर्ज कराने को वादी की तलाश भी नहीं करनी पड़ेगी, कोई भी बन सकता है वादी

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराने वालों पर नकेल कसी जाएगी। प्रदेश सरकार द्वारा इस संबंध में सख्त कानून लागू किया गया है। सभी थानों पर नए कानून से जुड़ी गाइडलाइन भेज दी गई है। अब इसके अनुसार थानेदार कार्रवाई करेंगे। नए कानून में अवैध धर्म परिवर्तन कराने वालों पर सजा का प्रावधान किया गया है। यही नहीं इसकी फंडिंग करने वालों को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है। अलग-अलग कटेगरी में यह सजा 14 से लेकर 20 साल या उम्रकैद तक हो सकती है। केस दर्ज कराने के लिए परिवार के व्यक्ति का होना अब जरूरी नहीं होगा, कोई भी व्यक्ति वादी बन सकता है।

पहले के कानून में पीड़ित व्यक्ति के माता-पिता, भाई, बहन को अवैध धर्मांतरण के मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने की अनुमति थी, इससे कई बार केस दर्ज कराने कोई आगे नहीं आता था। नए कानून में “कोई भी व्यक्ति” अब एफआईआर करा सकता है। प्रावधान में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो धर्म परिवर्तन कराने के इरादे से किसी व्यक्ति को डराता है, हमला करता है या बल का प्रयोग करता है, विवाह का वादा करता है या फिर उकसाता है, किसी नाबालिग, महिला अथवा व्यक्ति की तस्करी करने के अलावा उन्हें बेचने के लिए षड्यंत्र रचता है अथवा प्रेरित करता है, उकसाता है, उसे कम से कम 20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, उसकी सजा आजीवन कारावास तक बढ़ाई जा सकती है।
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इस कानून के तहत लगाया गया जुर्माना पीड़ित को चिकित्सा व्यय और पुनर्वास के लिए दिया जाएगा। अदालत ही आरोपी द्वारा धर्म परिवर्तन के पीड़ित को देय उचित मुआवजा भी स्वीकृत करेगी, जो पांच लाख रुपये तक हो सकता है, यह जुर्माने के अतिरिक्त होगा।
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कानून में एक अन्य प्रावधान यह भी किया गया है कि जो कोई भी व्यक्ति अवैध धर्म परिवर्तन के संबंध में किसी विदेशी या अवैध संस्था से धन प्राप्त करता है, उसे कम से कम सात वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे 14 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा और उसे न्यूनतम 10 लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा।

वहीं अगर कोई भी नाबालिग, दिव्यांग या मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे 14 साल तक के कठोर कारावास का सामना करना पड़ेगा। उसे कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा। इसके पहले के कानून में 10 साल तक की सजा का प्रावधान था, जबकि न्यूनतम जुर्माना 25,000 रुपये था।
अवैध धर्म परिवर्तन को लेकर नए कानून से सभी थानेदारों को अवगत करा दिया गया है। अब इसी कानून के तहत केस दर्ज किया जाएगा।
-जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी नार्थ
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