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Gorakhpur News: जमीन के धंधेबाजों ने एससी की जमीन बेच करा दी दाखिल-खारिज

Sat, 18 May 2024 04:29 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 18 May 2024 04:29 AM IST
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Land traders got SC land sold, filing rejected
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पीडीएफ

सरकारी सिस्टम में पैठ, शिकायत के बाद दो मामले पकड़े गए, जांच हो तो कई और आएंगे पकड़ में
डीएम की अनुमति के बिना अनुसूचित जाति की जमीन खरीदने वालों ने करा लिया नामांतरण
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। जमीन के धंधेबाजों ने फर्जीवाड़ा करने के साथ सरकारी सिस्टम में भी गहरी पैठ बना ली है। बिना डीएम की अनुमति के अनुसूचित जाति की जमीन गैर अनुसूचित जाति के लोगों को बेचने के बाद दाखिल-खारिज भी करवा दे रहे हैं। शिकायत के बाद ऐसे दो मामले सामने आए हैं। इसकी जांच करने के बाद तहसील कोर्ट ने ऐसी संपत्तियों को जब्त करने के लिए एसडीएम कोर्ट में भेज दिया है।
रजिस्ट्री विभाग में जाति और चौहद्दी बदलकर बैनामा कराने वालों ने तहसील कार्यालयों में ऐसी सेटिंग की है कि खतौनी में क्रेताओं के नाम भी दर्ज हो गए हैं। शहर के मौजा महेवा मुस्तकिल में अनुसूचित जाति के व्यक्ति को निषाद दर्शाकर बैनामा कराने के साथ चौहद्दी बदलने के मामले में आपत्ति हुई तो जांच हुई, जबकि इसी खतौनी में पहले भी फर्जी तरीके से जमीन बेची जा चुकी है। एक ही खतौनी में चार लोगों ने बिना डीएम की अनुमति के ही अनुसूचित जाति की जमीन खरीदी और दाखिल-खारिज के बाद खतौनी में नामांतरण भी हो गया है। मेडिकल कॉलेज क्षेत्र के मौजा नौतन में बिना डीएम की अनुसूचित जाति की जमीन खरीदने वालों ने खतौनी में नामांतरण भी करा लिया है, जबकि कई मामले में इस तरह नामांतरण हाेने की चर्चा है। ऐसे मामलों में अधिवक्ताओं ने साक्ष्य जुटाया है और वे शिकायत करने की तैयारी में हैं।
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वर्जन
दाखिल-खारिज से पहले प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाती है। जमीन का क्रय-विक्रय नियम के अनुसार नहीं हुआ तो खारिज कर दिया जाता है।
विकास सिंह, तहसीलदार

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ऐसा हुआ खेल
बैनामा के बाद दाखिल-खारिज में हलका लेखपाल की प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण होता है। बैनामा के बाद खातेदार को इश्तहार दिया जाता है। यदि आपत्ति आती है तो उसके निस्तारण के बाद नामांतरण होता है। जिस मामले में धंधेबाजों को लगता है कि तत्काल नामांतरण नहीं हो पाएगा, उसमें वे दाखिल-खारिज के बैनामे के दस्तावेज नहीं लगाते हैं और साक्ष्य के अभाव में आवेदन खारिज हो जाता है। उसके बाद जब उनकी सेटिंग होती है तो कायमी दाखिल करके नामांतरण करा लेते हैं।
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अधिवक्ता की राय
बैनामे के बाद जब नामांतरण के लिए तहसीलदार न्यायालय में निबंधन कार्यालय द्वारा बैनामा का पेपर भेज दिया जाता है तो तहसीलदार न्यायालय खुद के न्यायालय और नायाब तहसीलदार के न्यायालय में निबंधन कार्यालय से आई पत्रावली वाद संख्या अंकित करके भेजता है। नियमानुसार इश्तेहार निर्गत किया जाता है। यदि कोई आपत्ति आती है तो उसके निस्तारण के बाद नामांतरण आदेश पारित होता है। कुछ जमीन के धंधेबाज अनुसूचित जाति अथवा जनजाति के लोगों से बैनामा लेकर अपना बैनामा पेपर नामांतरण की कार्यवाही में नहीं लगाते हैं, जिससे साक्ष्य के अभाव में नामांतरण आदेश खारिज हो जाता है और कुछ सालों से बाद सेटिंग करके फिर से कायमी प्रार्थना पत्र देकर नामांतरण की कार्यवाही करवा लेते हैं।
-आलोक श्रीवास्तव, अधिवक्ता, कलक्ट्रेट कचहरी
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