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Gorakhpur News: कुश अपने कुल का है एक पवित्र पौधा
Sat, 09 Mar 2024 02:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 09 Mar 2024 02:13 AM IST
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डीडीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित हुआ कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कमल ने कहा कि कुश अपने कुल का एक पवित्र पौधा है। कुश को कुशा, दर्भ, कांस, पवित्रि, डांभ, दूर्भा, पैती आदि नामों से भी जाना जाता है। कुश का वैज्ञानिक नाम इरेग्रोस्टिस साझोसुराइडिस है।
वह वनस्पति विज्ञान विभाग में कुश पर आधारित परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इसकी उत्पत्ति हिंदूकुश पर्वत श्रेणी के उत्तर पूर्व पश्चिमी ऊष्णीय उत्तरी अफ्रिका, मध्य पूर्व, शीत व ऊष्ण एशिया मानी जाती है। उन्होंने बताया कि कुश एक नुकीली, तीखी व कड़ी पत्ती वाला पवित्र घास है। इसकी धार्मिक, आर्थिक एवं वैज्ञानिक महत्व के बारे में अथर्ववेद, भाव-प्रकाश, गरुण पुराण, महाभारत, रामचरित मानस, वाल्मिकी रामायण आदि ग्रंथों में उल्लेख है।
इस अवसर पर वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी, वरिष्ठ प्रोफेसर वीएन पांडेय आदि मौजूद रहे।
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कमल ने कहा कि कुश अपने कुल का एक पवित्र पौधा है। कुश को कुशा, दर्भ, कांस, पवित्रि, डांभ, दूर्भा, पैती आदि नामों से भी जाना जाता है। कुश का वैज्ञानिक नाम इरेग्रोस्टिस साझोसुराइडिस है।
वह वनस्पति विज्ञान विभाग में कुश पर आधारित परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इसकी उत्पत्ति हिंदूकुश पर्वत श्रेणी के उत्तर पूर्व पश्चिमी ऊष्णीय उत्तरी अफ्रिका, मध्य पूर्व, शीत व ऊष्ण एशिया मानी जाती है। उन्होंने बताया कि कुश एक नुकीली, तीखी व कड़ी पत्ती वाला पवित्र घास है। इसकी धार्मिक, आर्थिक एवं वैज्ञानिक महत्व के बारे में अथर्ववेद, भाव-प्रकाश, गरुण पुराण, महाभारत, रामचरित मानस, वाल्मिकी रामायण आदि ग्रंथों में उल्लेख है।
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इस अवसर पर वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी, वरिष्ठ प्रोफेसर वीएन पांडेय आदि मौजूद रहे।