लापरवाही: किसानों का बने किसान क्रेडिट कार्ड तब दूर होगी समस्या, नहीं मिल पा रहा ये लाभ
केसीसी खाते पर आसान ब्याज पर ऋण मिलता है। वहीं केसीसी पर फसल बीमा आसानी से उपलब्ध होता है। जिससे किसानों को सुविधा होती है।
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किसानों को साहूकार के कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए शुरू की गई किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके लिए कृषि विभाग बैंकों की मनमानी को प्रमुख वजह बता रहा है। वहीं बैंक अफसर इसे कृषि विभाग की सुस्ती बता रहे हैं। सुविधा नहीं मिल पाने से किसान साहूकारों की चक्र वृद्धि ब्याज में उलझा हुआ है। यही नहीं उसे फसल बीमा योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
वर्ष 1998 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी लोकसभा में दी थी। उस वक्त वित्तमंत्री ने इसी बात को रेखांकित किया था कि खेती के लिए किसान साहूकारों से कर्ज लेकर ब्याज के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं। केसीसी के जरिए बैंक किसान को आसान व सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराएगा, जिससे खेती की दिक्कतें तो कम होंगी ही, किसान भी खुशहाल होंगे। योजना शुरू होने पर इसका लाभ मिला, लेकिन यह लाभ केवल बड़े किसानों तक ही सीमित रहा। लघु व सीमांत किसानों के लिए यह योजना आज भी दिवास्वप्न जैसी है।
एक चौथाई किसानों को ही लाभ
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार गोरखपुर जिले में कुल पांच लाख 91 हजार किसान हैं। पांच एकड़ से कम जोत वाले पांच लाख 19 हजार किसानों को सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। लेकिन किसान क्रेडिट कार्डधारक किसानों की संख्या लगभग एक लाख 30 हजार है। मतलब कि खेती के लिए कर्ज की जरूरत वाले चार लाख किसान अभी भी बैंकों से आसान ऋण पाने के हकदार नहीं बन पाए हैं।
सभी को दिया जाना है केसीसी
पिछले साल केंद्र सरकार ने किसान सम्मान निधि पाने वाले सभी किसानों का संबंधित बैंक में केसीसी खाता खोलने का निर्देश दिया। इसके लिए किसानों को केवल एक फार्म भरकर अपने बैंक में जमा करना था। कृषि विभाग और बैंकों की तरफ से अलग-अलग कैंप आयोजित करने के दावे भी किए गए, लेकिन नतीजे में कोई फर्क नहीं आया।
इससे फसल बीमा भी मिलेगा
केसीसी खाते से बोई गई फसल के क्षेत्रफल के आधार पर ऋण मिलता है। मसलन, एक हेक्टेयर गेहूं बोने वाले किसान को आसानी से 50 से 65 हजार रुपये तक का ऋण मिल सकता है। छह माह के अंदर ऋण वापस करने पर किसान को केवल चार प्रतिशत ब्याज देना होगा। छह माह से एक साल के बीच सात प्रतिशत और इसके बाद बैंक की अन्य दरें लागू होती हैं। खाते से ऋण देने के साथ किसानों की सहमति पर संबंधित फसल का बीमा हो जाता है, जिसके प्रीमियम की राशि इस खाते से कटती है। अगर फसल खराब हुई तो इस खाते में फसल बीमा का लाभ किसान को मिलेगा। इसके विपरीत खाता नहीं होने पर फसल बीमा के लिए किसान को कई प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। खेती के वक्त ऋण के लिए भी उसे साहूकार का चक्कर लगाना पड़ता है।
जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि केसीसी की जिम्मेदारी बैंकों की है। प्रधानमंत्री सम्मान निधि पाने वाले सभी किसानों का केसीसी खाता खुलना है। इससे किसानों को आसानी से खेती के लिए ऋण मिल सकता है। साथ ही फसलों का बीमा कराने के लिए भी परेशान नहीं होना पड़ेगा। दिसंबर में बैंक अफसरों के साथ बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक रामसमुझ ने बताया कि खाता खोलने की जिम्मेदारी बैंकों की है, लेकिन किसानों का विवरण कृषि विभाग को उपलब्ध कराना है। कृषि विभाग की तरफ से 749 किसानों की एक सूची दी गई थी, जिसमें से 83 किसानों का विवरण तक ठीक नहीं है। किसान सीधे भी बैंक आकर अपना खाता खुलवा सकते हैं। जिनका खाता नहीं खुला है, उनमें तमाम ऐसे किसान हैं, जिनके पास अत्यंत कम जोत है।