स्वास्थ्य संकट: हेपेटाइटिस-सी ने बढ़ाई मरीज की मुसीबत, ऑपरेशन करने से KGMU और SGPGI ने खड़े किए हाथ
डॉ. सुमित ने बताया कि इस तरह के मामले एक लाख में एक आते हैं, जिसके दिमाग और स्पाइन दोनों में टीबी मिली है। दिमाग की टीबी ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि, इसमें गांठें बननी शुरू हो जाती है, जो जल्दी टूटती नहीं है।
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दिमाग और स्पाइन में टीबी के बाद मरीज को हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि ने धर्मशाला निवासी निमिता की मुसीबत बढ़ा दी है। हेपेटाइटिस-सी की वजह से केजीएमयू और एसजीपीजीआई के डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। दोनों बड़े संस्थानों में पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने हेपेटाइटिस मरीज का हवाला देते हुए ऑपरेशन करने से मना कर दिया।
इस पर परिजन इलाज के लिए दूसरी बार बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी के न्यूरो विभाग में भर्ती कराया है। न्यूरो के डॉ. सुमित की देखरेख में मरीज का इलाज चल रहा है। हालत गंभीर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बीआरडी में इस तरह का यह पहला मामला हैं, जिसमें मरीज को दो अंगों की टीबी के साथ हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि हुई है।
जानकारी के मुताबिक, धर्मशाला की रहने वाली निमिता (28) को दिमागी बुखार की दिक्कत हुई। परिजन इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विभाग में लेकर गए। जांच में पता चला कि दिमाग में टीबी के गांठ बन गए हैं। इसकी वजह से दिमाग के पानी में कीटाणु बैठ गए।
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इसका दुष्प्रभाव ऐसा हुआ कि दिमाग में पानी जमा होने लगा। इस पर डॉ. सुमित की टीम ने ऑपरेशन का फैसला लिया। जब जांच शुरू की गई तो पता चला कि महिला को सवाईनल स्पाइन टीबी भी है। इसके अलावा हेपेटाइटिस-सी की भी पुष्टि हुई। डॉ. सुमित ने बताया कि निमिता के दिमाग की नसों में टीबी की वजह से ज्यादा गांठ बन गई हैं, जिसके कारण सांस की नसें भी प्रभावित होने लगी है और दिमाग में पानी जमा होने लगा है।
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इस पानी को निकालने के लिए पेट में एक ड्रेन लगाया गया हैं। लेकिन, मरीज का ऑपरेशन ज्यादा जरूरी है। इसके लिए हायर सेंटर रेफर किया गया था। लेकिन, परिजन फिर से मरीज को बीआरडी ले आए हैं, जिसका इलाज किया जा रहा है। परिजनों ने बताया कि हायर सेंटर पर हेपेटाइटिस की वजह से ऑपरेशन करने से मना कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में बीआरडी में इलाज कराया जा रहा है।
एक लाख में एक मामले इस तरह के आते हैं
डॉ. सुमित ने बताया कि इस तरह के मामले एक लाख में एक आते हैं, जिसके दिमाग और स्पाइन दोनों में टीबी मिली है। दिमाग की टीबी ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि, इसमें गांठें बननी शुरू हो जाती है, जो जल्दी टूटती नहीं है। कई बार मरीजों का ऑपरेशन करना पड़ता है। 95 फीसदी मरीजों मामलों में मरीज की मौत हो जाती है।