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'मेरी आरजू है और तमन्ना तो बस यही, यू मरूं कि तिरंगा नसीब हो'
Mon, 06 Jan 2020 12:06 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Mon, 06 Jan 2020 12:06 PM IST
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कवि सम्मेलन।
- फोटो : अमर उजाला
मारवाड़ी सेवा समिति की ओर से रविवार को गोकुल अतिथि भवन में वैवाहिक परिचय सम्मेलन और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में पूर्वांचल के सुप्रसिद्ध कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया।
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युवा शायर मिन्नत गोरखपुरी ने देश प्रेम से ओतप्रोत, दिया बनूं तो पतंगा नसीब हो मुझको, नहाना चाहो तो गंगा नसीब हो मुझको, मेरी आरजू है और तमन्ना तो बस यही, यू मरूं कि तिरंगा नसीब हो मुझको... सुनाया तो श्रोता वाह-वाह कर उठे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. कलीम कैसर ने रचना सुनाई, युगों-युगों गूंजे ये नारा केवल एक-दो सदी नहीं, भारत जैसा देश नहीं और गंगा जैसी नदी नहीं... सुनाया तो दर्शकों ने तालियों के साथ तारीफ की।
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नुसरत अतीक ने सुनाया, ‘अपनी बदसूरती करो महसूस, हम तुम्हें आईना नहीं देंगे।’ वसीम मजहर गोरखपुरी ने सुनाया, ‘हम अपनी जान दे देंगे, पुकारेगी अगर सरहद, लहू का एक-एक कतरा वतन के नाम कर देंगे।’ निशा राय ने पंखुड़ी-पंखुड़ी शबनमी-शबनमी, कुनमुना कर जगी बाग की हर कली..., सुनाकर श्रोताओं को प्रकृति की खूबसूरती से रूबरू कराया। कवयित्री मीनाक्षी शुक्ला ने सुनाया, ‘ना मजहब में मुझे बांटो, मैं भारत मां की बेटी हूं, मैं अपनी जिम्मेदारी को बखूबी ही समझती हूं।’
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सुभाष यादव ने सुनाया, ‘मिल के खुशियां मनाओ नया साल है, कुछ नये गीत गाओ नया साल है।’ अनीता पाल सिंह की रचना थी, ‘वो दुआ में मुझको जो मांग ले तो मैं रौनकों की डगर बनूं, मुझे गुनगुनाए खुशी से तो किसी गीतिका की बहर बनूं।’ प्रतिभा गुप्ता ने सुनाया, ‘नन्ही चिड़िया तुमने भी छज्जों पर आना छोड़ दिया, दमघोंटू दुनिया से शायद आस लगाना छोड़ दिया।’ हास्य कवि बादशाह प्रेमी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब हंसाया। अर्चना मालवीय की रचनाओं को भी श्रोताओं ने सराहा।