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‘मां इसी फिक्र में बीमार हो गई, घर के आंगन में नई दीवार हो गई’
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‘मां इसी फिक्र में बीमार हो गई, घर के आंगन में नई दीवार हो गई’
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, नव्य इंडिया एवं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ रेडियो एंड टेलीविजन की ओर आयोजित खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर करारी चोट की। युवा शायर कासिम रजा ने एकल परिवार पर तंज कसा। उन्होंने सुनाया, ‘मां इसी फिक्र में बीमार हो गई , घर के आंगन में नई दीवार हो गई’।
डॉ. मुस्तफा खान ने सुनाया, ‘दिल आजकल परेशानियों से घबरा रहा है, न जाने कौन सा मंजर सामने आ रहा है। निखिल पांडेय ने ‘कैसा आज शहर लगता है, ख्वाब कोई बेघर लगता है’ तथा कुमार अभिनीत ने ‘आइल कोरोना देख पड़ता सुनाई, तनी बचाई रहीं’ सुनाकर जागरूकता संदेश दिया। अर्चना मालवीय ने ‘ये संदेश दे दो जगत को बता दो कि हम भूमि भारत की वह निर्भया हैं..., वसीम मजहर ने ‘यही है मेरा हिंदुस्तान जिनकी फिजा में हरसू गूंजे गीता और कुरान’ और प्रदीप मिश्र ने ‘सरल था रास्ता जिनका, गिरे तो उठ नहीं पाए’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
प्रेमनाथ मिश्र ने ‘रखिए नहीं मन में टीस, बीत गया 2020’, चेतना पांडेय ने ‘दिल में सबके लिए जगह रखिए वास्ता यूं ही बेवजह रखिए’ और आचार्य मुकेश ने दिलों की रंजिशे मिटाए औरत, हर एक दिल को सजाए औरत, सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। रविंद्र श्रीवास्तव ‘जुगानी भाई’ ने ‘कोनो बात जरूर ह बाबू जबरो से मशहूर ह बाबू, एक कटोरी के पेनी में बसल इ गोरखपुर हो बाबू’, अपनी प्रस्तुति से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। सुभाष चंद्र यादव, डॉ. सत्यमवदा ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी एनपी मौर्य ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आशीष रुंगटा, अमरनाथ जायसवाल, अनुज पांडेय, अमित सिंह पटेल, विजय मिश्र आदि उपस्थित रहे।
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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, नव्य इंडिया एवं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ रेडियो एंड टेलीविजन की ओर आयोजित खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर करारी चोट की। युवा शायर कासिम रजा ने एकल परिवार पर तंज कसा। उन्होंने सुनाया, ‘मां इसी फिक्र में बीमार हो गई , घर के आंगन में नई दीवार हो गई’।
डॉ. मुस्तफा खान ने सुनाया, ‘दिल आजकल परेशानियों से घबरा रहा है, न जाने कौन सा मंजर सामने आ रहा है। निखिल पांडेय ने ‘कैसा आज शहर लगता है, ख्वाब कोई बेघर लगता है’ तथा कुमार अभिनीत ने ‘आइल कोरोना देख पड़ता सुनाई, तनी बचाई रहीं’ सुनाकर जागरूकता संदेश दिया। अर्चना मालवीय ने ‘ये संदेश दे दो जगत को बता दो कि हम भूमि भारत की वह निर्भया हैं..., वसीम मजहर ने ‘यही है मेरा हिंदुस्तान जिनकी फिजा में हरसू गूंजे गीता और कुरान’ और प्रदीप मिश्र ने ‘सरल था रास्ता जिनका, गिरे तो उठ नहीं पाए’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
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प्रेमनाथ मिश्र ने ‘रखिए नहीं मन में टीस, बीत गया 2020’, चेतना पांडेय ने ‘दिल में सबके लिए जगह रखिए वास्ता यूं ही बेवजह रखिए’ और आचार्य मुकेश ने दिलों की रंजिशे मिटाए औरत, हर एक दिल को सजाए औरत, सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। रविंद्र श्रीवास्तव ‘जुगानी भाई’ ने ‘कोनो बात जरूर ह बाबू जबरो से मशहूर ह बाबू, एक कटोरी के पेनी में बसल इ गोरखपुर हो बाबू’, अपनी प्रस्तुति से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। सुभाष चंद्र यादव, डॉ. सत्यमवदा ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी एनपी मौर्य ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आशीष रुंगटा, अमरनाथ जायसवाल, अनुज पांडेय, अमित सिंह पटेल, विजय मिश्र आदि उपस्थित रहे।
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