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Gorakhpur News: इलाज के नाम पर पांच दिन में दो लाख रुपये वसूलने का आरोप
Tue, 15 Sep 2026 02:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 15 Sep 2026 02:21 AM IST
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पादरी बाजार (गोरखपुर)। चिलुआताल इलाके के खजांची स्पोर्ट्स कॉलेज चौराहा स्थित एक निजी अस्पताल पर मरीज के परिजनों ने पांच दिन में इलाज और दवा के नाम पर दो लाख रुपये से अधिक वसूलने का आरोप लगाया है। परिजनों के मुताबिक, सोमवार को सुबह 25 हजार और दोपहर में 20 हजार रुपये जमा कराने के बाद भी अस्पताल ने एक लाख रुपये से अधिक का अतिरिक्त बिल थमा दिया। परिजन का आरोप है कि पांच दिनों में दवा और इलाज के नाम पर करीब दो लाख रुपये जमा करा लिए गए। रकम देने में असमर्थता जताने पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचते ही मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
बिहार के बेतिया जिले के परसा मठिया गांव निवासी प्रमोद मुखिया को करीब 10 दिन पहले सांस लेने में तकलीफ समेत अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हुई थीं। उन्हें पहले बेतिया जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से नौ सितंबर को डॉक्टरों ने पटना मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस चालक ने मुफ्त और सस्ते इलाज का भरोसा देकर उन्हें गोरखपुर के खजांची स्पोर्ट्स कॉलेज चौराहा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया।
मरीज के भाई सरवन यादव के अनुसार, उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि निजी अस्पताल का खर्च उठा सकें। इलाज के लिए गांव के लोगों ने घर-घर जाकर 50 से 100 रुपये चंदा जुटाया था। उनका आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद पांच दिनों में दवा और इलाज के नाम पर करीब दो लाख रुपये जमा करा लिए गए। सोमवार को अस्पताल की ओर से अतिरिक्त रकम जमा करने को कहा गया। सुबह 25 हजार और दोपहर में 20 हजार रुपये जमा करने के बाद भी एक लाख रुपये से अधिक का बिल दिए जाने पर परिजनों ने रकम देने में असमर्थता जताई। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर शहर के एक थाने में तैनात अपने परिचित को जानकारी दी। परिचित की सूचना पर चिलुआताल पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिस के पहुंचते ही अस्पताल प्रशासन ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष नहीं मिल सका है।
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चिलुआताल थाना प्रभारी सूरज सिंह ने बताया कि पुलिस केे पहुंचने से पहले ही अस्पताल प्रशासन ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया था। पीड़ित पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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बिहार के बेतिया जिले के परसा मठिया गांव निवासी प्रमोद मुखिया को करीब 10 दिन पहले सांस लेने में तकलीफ समेत अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हुई थीं। उन्हें पहले बेतिया जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से नौ सितंबर को डॉक्टरों ने पटना मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस चालक ने मुफ्त और सस्ते इलाज का भरोसा देकर उन्हें गोरखपुर के खजांची स्पोर्ट्स कॉलेज चौराहा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया।
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मरीज के भाई सरवन यादव के अनुसार, उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि निजी अस्पताल का खर्च उठा सकें। इलाज के लिए गांव के लोगों ने घर-घर जाकर 50 से 100 रुपये चंदा जुटाया था। उनका आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद पांच दिनों में दवा और इलाज के नाम पर करीब दो लाख रुपये जमा करा लिए गए। सोमवार को अस्पताल की ओर से अतिरिक्त रकम जमा करने को कहा गया। सुबह 25 हजार और दोपहर में 20 हजार रुपये जमा करने के बाद भी एक लाख रुपये से अधिक का बिल दिए जाने पर परिजनों ने रकम देने में असमर्थता जताई। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर शहर के एक थाने में तैनात अपने परिचित को जानकारी दी। परिचित की सूचना पर चिलुआताल पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिस के पहुंचते ही अस्पताल प्रशासन ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष नहीं मिल सका है।
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चिलुआताल थाना प्रभारी सूरज सिंह ने बताया कि पुलिस केे पहुंचने से पहले ही अस्पताल प्रशासन ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया था। पीड़ित पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।