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Gorakhpur News: शहर में बैठकर बनते थे साइबर ठगी के क्यूआर कोड, तीन हिरासत में, पूछताछ

Wed, 10 Jun 2026 02:04 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:04 AM IST
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Investigation into the Bihar connection as well.
गोरखपुर। साइबर ठगी के मामलों की जांच के दौरान कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को तीन ठगों को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, ये युवक साइबर अपराधियों के लिए बैंक खातों से जुड़े क्यूआर कोड तैयार कर ठगी की रकम विभिन्न खातों में पहुंचाने का काम करते थे। जांच में बिहार से संचालित एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल, बैंक दस्तावेज आदि कब्जे में लेकर पड़ताल शुरू कर दी है।
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पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराध से जुड़े कुछ मामलों की जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों और ऑनलाइन लेनदेन की जानकारी मिली थी। तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण में तीन युवकों की भूमिका सामने आने पर उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपित साइबर ठगों को बैंक खातों से जुड़े क्यूआर कोड उपलब्ध कराते थे। ठगी का शिकार हुए लोगों से इन्हीं क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान कराया जाता था। इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचाया जाता था।
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बिहार से संचालित हो रहा था गिरोह
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरे नेटवर्क का संचालन बिहार से किया जा रहा था। वहीं, गोरखपुर में मौजूद सदस्य बैंक खातों की व्यवस्था, क्यूआर कोड तैयार करने और नकदी निकासी जैसे कार्यों की जिम्मेदारी संभालते थे। पुलिस अब बिहार में बैठे नेटवर्क के संचालकों और अन्य सहयोगियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि सरगना की गिरफ्तारी के बाद पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली और ठगी के दायरे का खुलासा हो सकेगा।
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डिजिटल अरेस्ट गिरोह से भी जुड़े हो सकते हैं तार
पुलिस को शुरुआती जांच में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी घटनाओं के संकेत भी मिले हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। साइबर सेल की टीम आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल डाटा की फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि नेटवर्क की वास्तविक गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

सीओ कोतवाली ओंकार दत्त ने बताया कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। जांच में कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है, जिनकी तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के माध्यम से अब तक कितनी रकम का लेनदेन किया गया और कितने लोग इसकी ठगी का शिकार हुए हैं।
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