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अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस: मुठ्ठी भर चने व एक टुकड़ा गुड़ से बदल गई इस शख्स की जिंदगी
Wed, 12 Aug 2020 10:44 AM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 12 Aug 2020 10:44 AM IST
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अनिल विश्कर्मा।
- फोटो : अमर उजाला।
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अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर संर्घष कर जिंदगी में मुकाम हासिल करने वाले युवाओं की कहानी सभी की प्रेरणादायी है। संर्घषों की बुनियाद पर सफलता की इबारत लिखकर स्वयं खुशहाल रहने के साथ ही दूसरो की जिंदगी भी सवार रहे हैं।
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एक ऐसे ही युवा अनिल विश्वकर्मा जिले के पनियरा थाना क्षेत्र के कमासीन बुजुर्ग के रहने वाले हैं। महज 29 साल की उम्र में कुछ करने के जुनून ने उन्हें भीड़ से अलग कर दिया। आज वह एक सफल कारोबारी के साथ साथ बेहतर आईटी एक्सपर्ट भी हैं।
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मेरठ से बीटेक करने वाले अनिल की कहानी में ढ़ेर सारे उतार चढ़ाव हैं। जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही संघर्षो से नाता जुड़ गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में बीटेक पूरा होने के बाद नौकरी ढूढ़ने लगे। वर्ष 2014 उत्तराखंड में एक प्राइवेट कंपनी में काम मिला। लेकिन उन्हें नौकरी रास नहीं आई।
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आठ माह नौकरी करने के बाद छोड़कर घर चले आए। इसके बाद तकनीकी ज्ञान के माध्यम से कुछ करने की इच्छा हुई तो बजट की समस्या आ गई। घर से भी बहुत कुछ नहीं मिल पाया। 26 सितंबर वर्ष 2015 को दोस्तो से उधार लेकर महराजगंज शहर में एक छोटा सा कार्यालय खोला। जहां ऑनलाइन वर्क समेत तमाम तकनीकी कार्य शुरू किया। लेकिन कार्य में मुश्किलें आती गईं।
मुश्किलों में भी नहीं हारा धैर्य
रकम पर्याप्त नहीं थी। पास में कंप्यूटर भी कम थे। एक वक्त ऐसा आया कि पास में फूटी कौड़ी भी नहीं थी। काम नया होने की वजह से समस्याएं ज्यादा थीं। उन्होंने बताया कि करीब एक सप्ताह तक मुठ्ठी भर चना, गुड़ एवं पानी पीकर काम चलाया।
इसी बीच मन में ठान लिया कि अब किसी से कोई मदद नहीं लूंगा। कमरतोड़ परीश्रम शुरू किया। इसके बाद भी तमाम समस्याएं आईं। लेकिन कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यहीं से जिंदगी में टर्निंग प्वाइंट आया।
कृषि विभाग एवं सदर बीआरसी से ऑनलाइन करने का काम मिला। काम पूरा होने पर रकम मिली तो थोडा साहस बढ़ा। इसके बाद धीरे धीरे काम मिलता गया और साहस भी बढ़ता रहा। कमाई होने पर बचत की। साथ ही सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर बैंक से लोन कराया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इलेक्ट्रिक की दुकान के अलावा महराजगंज के शास्त्री नगर मोहल्ले में अच्छा सा कार्यालय है। जहां ऑनलाइन काम के अलावा अन्य तकनीकी वाले काम भी किए जाते हैं। कार्यालय में काम करने के लिए दो स्टाफ भी हैं।
इसी बीच मन में ठान लिया कि अब किसी से कोई मदद नहीं लूंगा। कमरतोड़ परीश्रम शुरू किया। इसके बाद भी तमाम समस्याएं आईं। लेकिन कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यहीं से जिंदगी में टर्निंग प्वाइंट आया।
कृषि विभाग एवं सदर बीआरसी से ऑनलाइन करने का काम मिला। काम पूरा होने पर रकम मिली तो थोडा साहस बढ़ा। इसके बाद धीरे धीरे काम मिलता गया और साहस भी बढ़ता रहा। कमाई होने पर बचत की। साथ ही सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर बैंक से लोन कराया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इलेक्ट्रिक की दुकान के अलावा महराजगंज के शास्त्री नगर मोहल्ले में अच्छा सा कार्यालय है। जहां ऑनलाइन काम के अलावा अन्य तकनीकी वाले काम भी किए जाते हैं। कार्यालय में काम करने के लिए दो स्टाफ भी हैं।