फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   If facilities are provided, daughters will shine in football also

Gorakhpur News: सुविधाएं मिले तो फुटबॉल में भी चमकेंगी बेटियां

Mon, 18 Dec 2023 02:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Mon, 18 Dec 2023 02:14 AM IST
विज्ञापन
If facilities are provided, daughters will shine in football also
जिले में फुटबॉल के लिए नहीं है ग्राउंड
विज्ञापन


कम टूर्नामेंट होने की वजह से नहीं मिलते ज्यादा मौके

संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। प्रदेश में फुटबाल की लोकप्रियता क्रिकेट से काफी कम है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है खिलाड़ियों को उचित सुविधाएं न मिलना। खिलाड़ी अभ्यास तो करते हैं लेकिन उन्हें जरूरी सुविधाएं और खेलने के मौके नहीं मिलते। कमोवेश यह हाल पुरुष और महिला दोनों टीमों का है। पुरुष टीम से कुछ स्टार खिलाड़ी निकल भी जाते हैं तो महिला खिलाड़ियों को उतने मौके नहीं मिलते। महिला खिलाड़ियों को जरूरी ट्रेनिंग और सुविधा मिले तो इनकी प्रतिभा का प्रदर्शन पूरी दुनिया देखेगी।
गोरखपुर की बात करें तो यहां फुटबॉल के लिए कोई भी निर्धारित मैदान नहीं है जहां खिलाड़ी अभ्यास कर सकें। क्षेत्रीय क्रीड़ांगन में कई खेलों का भार है। कुछ खिलाड़ी सेंट एंड्रयूज कॉलेज, चरगांवा, एमपी ग्राउंड, नीना थापा में अभ्यास करते हैं। गोरखपुर में एक अंतरराष्ट्रीय मानक के फुटबॉल ग्राउंड की सख्त जरूरत है।
विज्ञापन


लड़कियों के नहीं होते टूर्नामेंट
लखनऊ की 17 वर्षीय हुमा खान पिछले चार साल से यूपी की टीम के लिए खेल रही हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ में लड़कियों के लोकल टूर्नामेंट नहीं होते जिसकी वजह से उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने का मौका नहीं मिलता। सालभर में वे केवल दो से तीन टूर्नामेंट ही खेल पाती हैं। हुमा ने बताया कि फुटबॉल में लड़कियों का रुझान काफी तेजी से बढ़ रहा है। उचित सुविधाएं और मौके मिले तो प्रदेश से कई स्टार खिलाड़ी निकल सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गोरखपुर में ग्राउंड की जरूरत
गोरखपुर की सोनम ने यूपी टीम की तरफ से खेलते हुए कुल छह प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया है। 2016 से ही वे राष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हैं। सोनम ने बताया कि गोरखपुर में फुटबॉल ग्राउंड की सख्त जरूरत है। उन्हें प्रैक्टिस करने के लिए उतने मौके नहीं मिलते। खुद के पैसे से बाल खरीदकर लड़कियां अभ्यास करती हैं और प्रतियोगिता में गोरखपुर का प्रतिनिधित्व करती हैं।

नहीं है गर्ल्स हाॅस्टल
वाराणसी की आंचल ने बताया कि यूपी में उन्हें खेलने के लिए उतने टूर्नामेंट नहीं मिलते। उन्होंने अभी तक दो नेशनल टूर्नामेंट खेले हैं। बताया कि वह डीएलडब्ल्यू में अभ्यास करती हैं लेकिन लड़कियों को उतना सपोर्ट नहीं मिलता। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में फुटबॉल के लिए कोई गर्ल्स हाॅस्टल नहीं है जहां रहकर वो अभ्यास कर सकें।


भविष्य की राह मुश्किल
वाराणसी की नंदनि का कहना है कि लड़कियां आज फुटबाल में इसलिए पीछे हैं क्योंकि इससे उन्हें भविष्य की कोई गारंटी नहीं मिलती। स्पोर्ट्स कोटा से भर्ती काफी कम आती है। साथ ही उन्हें उचित सुविधाएं और मौके नहीं मिलते जिससे वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन बड़े लेवल पर कर सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed