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Gorakhpur News: हाइपर ट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी भी हो सकती है छात्रा की मौत की वजह

Sun, 03 Dec 2023 01:38 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Dec 2023 01:38 AM IST
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Hypertrophic cardiomyopathy can also be the reason for the student's death
रहें सावधान: ऐसा स्पोर्ट्स या फिर ज्यादा व्यायाम के समय ही होता, इसलिए नियमित खेल से पहले जरूरी है हृदय की जांच
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विशेषज्ञों की राय-इस भ्रम में न रहें कि युवा हैं तो हृदय रोग नहीं होगा...लक्षण लगें तो तुरंत जांच कराएं
छात्रा के परिजनों को भी करानी चाहिए जांच, ऐसे मामलों में हिस्ट्री जांच जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर। बैडमिंटन खेलने के दौरान छात्रा गौरी मिश्रा की मौत की वजह हाइपर ट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी भी हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी खेल गतिविधि को नियमित करने से पहले या जरा भी लक्षण महसूस हो तो हृदय की जांच तुरंत करवाना जरूरी है। युवावस्था में हृदय रोग नहीं होता, हर दर्द एसिडिटी की वजह से हो रहा है, अब इस तरह की भ्रांतियों से बाहर निकलें। इस तरह की सोच की वजह से ही लोग शुरुआती लक्षणों की अनदेखी करते हैं और फिर अचानक हार्ट अटैक से उनकी जान चली जाती है। इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि डीएवी पीजी कॉलेज की छात्रा गौरी की मौत के मामले में जो बातें सामने आई हैं, उसमें हाइपर ट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी से मौत की आशंका ही ज्यादा लग रही है। यह स्पोर्ट्स या फिर ज्यादा व्यायाम के समय ही होता है, जिससे अचानक जान चली जाती है। इसके लिए सजग रहने की जरूरत है, क्योंकि इस तरह के केस में परिवार की हिस्ट्री बहुत जरूरी है। छात्रा के भाई-बहन, पिता व अन्य को भी कॉर्डियोलॉजी संबंधी जांच करा लेनी चाहिए।
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हाल के दिनों में शहर में इस तरह का यह दूसरा मामला सामने आया है। इसके पहले देवरिया के भटवलिया निवासी डॉ. अभिषेक कुमार (30) की 16 नवंबर को मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। वह मेडिकल कॉलेज में अपने साथी डॉक्टरों से मिलने के लिए आए थे।
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हालांकि, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल बताते हैं, छात्रा और डॉक्टर दोनों की मौत हॉर्ट अटैक से हुई हो सकती है। लेकिन इसकी वजह अलग-अलग है। छात्रा की मौत बैडमिंटन खेलने के दौरान हुआ है, यह दूसरी बीमारी की वजह से होता है। यह बीमारी पूरी तरह से आनुवांशिक होती है। माता-पिता से ही बच्चों में आता है। यही वजह है कि जिस तरह से छात्रा की जान गई है, उससे परिवार वालों को सजग हो जाना चाहिए। उन्हें भी जांच करा लेनी चाहिए।
डॉ. कुनाल बताते हैं- देश में आज भी स्पोर्ट्स से पहले कॉर्डियो संबंधी जांच नहीं होती, जिस वजह से इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। जो भी बच्चे नियमित खेलते हैं, उन्हें जांच करा लेनी चाहिए।



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हाॅर्ट की बीमारियों से बचने के लिए क्या करें

डॉ कुनाल बताते हैं-जीवनशैली, खान-पान और नियमित चिकित्सा जांच के बारे में सतर्क रहने की आवश्यकता है। विशेष रूप से डायबिटीज के मरीज, हाइपरटेंशन से पीड़ित लोग और जिनको पहले से ही दिल की बीमारी है, ऐसे मरीजों को नियमित रूप से हार्ट के टेस्ट कराने चाहिए। स्पोर्ट्स करने वाले बच्चों को भी जांच करानी चाहिए। इसके बचाव का सीधा कोई उपाय नहीं है, लेकिन अगर फैमिली में हृदय रोगी हैं तो इसकी जांच करा लेनी चाहिए। युवा समझ कर खुद को जांच से रोकना ही भारी पड़ता है।
इन बातों का रखें ध्यान
लाइफस्टाइल को एक्टिव रखें
शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहें
फास्ट फूड से बचें और विटामिन से भरपूर सादा घरेलू भोजन खाएं
नियमित योगाभ्यास करें

यह होती है हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी
हाइपर ट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी के अधिकांश मामले एक वंशानुगत आनुवंशिक दोष के कारण होते हैं।
लोगों को बेहोशी, सीने में दर्द, सांस फूलने, और धकधकी (अनियमित धड़कनों की संवेदना) का अनुभव होता है।
हृदय के संकुचनों में अचानक दबाव बढ़ जाता है, जिसे कम करने की दवा देकर जान बचाई जा सकती है।
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