{"_id":"693c6760472f5f7ec509347c","slug":"hundreds-of-people-were-contacted-daily-by-the-fake-call-center-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1162921-2025-12-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: झूठे कॉल सेंटर से रोज सैकड़ों लोगों से किया जाता था संपर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: झूठे कॉल सेंटर से रोज सैकड़ों लोगों से किया जाता था संपर्क
विज्ञापन
ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये करोड़ों की ठगी का मामला
- फेयर प्ले–247, एविएटर व रम्मी एप से होती थी ठगी की कमाई
- शहर के दो बैंकों के कर्मचारियों की मिलीभगत से खोले जाते थे म्यूल खाते
- खजांची रोड स्थित इंद्रा हॉस्पिटल के नीचे एक बेसमेंट में खोल रखे थे ठगी के कार्यालय
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ऑनलाइन गेमिंग एप के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पकड़े गए मुख्य आरोपी नारायणपुर नंबर 2, टोला हीरागंज निवासी राकेश प्रजापति और चिलबिलवा, भटहट निवासी जान आलम लंबे समय से एवियेटर, रम्मी एप और फेयर प्ले-247 जैसे ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये लोगों के साथ ठगी कर रहे थे। उनके कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियां प्रतिदिन सैकड़ों लोगों से संपर्क करती थीं, जिनमें से कई लोग फर्जी बोनस और ऑफरों के झांसे में आकर ठगी का शिकार हो जाते थे।
आरोपियों ने खजांची रोड स्थित इंद्रा हॉस्पिटल के नीचे एक बेसमेंट में ‘कौशल्या इन्वेस्टमेंट’ नाम से ऑफिस बनाया हुआ था। शहर में विज्ञापन देकर लड़कियों को नौकरी का झांसा दिया जाता था और फिर उन्हें कॉलिंग का काम सौंपा जाता था। युवतियां कंपनी के फर्जी नाम से यह बताते हुए कॉल करती थीं कि फेयर प्ले-247, एवियेटर और रम्मी एप पर खास ऑफर चल रहा है। थोड़े निवेश में बड़ा मुनाफा मिल सकता है। कई लोगों ने एप डाउनलोड किया, खाते बनाए और रुपये जमा कराए, जो सीधे आरोपियों के म्यूल खातों में पहुंच जाते थे। जैसे ही शिकार फंसता था, उसका रुपया कुछ ही मिनटों में दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
शहर के दो बैंकों के कर्मचारियों की मदद से खोले जाते थे म्यूल खाते
पुलिस जांच में पर्दाफाश हुआ है कि आरोपी भोले-भाले लोगों को फंसाकर उनके नाम पर म्यूल खाते खुलवाते थे। इन खातों को खुलवाने में बैंक कर्मी आरोपियों का साथ देते थे। इसमें एक बैंक गुलरिहा तो दूसरा बैंक रोड पर स्थित है। इसका पर्दाफाश पुलिस की जांच में हुआ। ठगों ने आईडीएफसी बैंक, गुलरिहा शाखा में विजय चौहान के नाम पर एक खाता खुलवाया। दूसरा खाता उत्कर्ष स्माल फाइनेंस बैंक, बैंक रोड गोरखपुर में खोला गया। विवेचना में पुलिस को अब तक 6 और म्यूल खातों का पता चला है, जिन्हें ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग ठगी में इस्तेमाल किया जा रहा था। जब लोग फेयर प्ले–247 और अन्य गेमिंग एप पर निवेश करते थे तो रकम सीधे इन्हीं म्यूल खातों में जमा होती थी।
विज्ञापन
ऑनलाइन गेमिंग ठगी का पूरा नेटवर्क चलाते थे आरोपी
आरोपी राकेश और जान आलम इन सभी खातों के जरिये ऑनलाइन सट्टा लगाने और ठगी से कमाया पैसा इकट्ठा करते थे। फिर पूरी रकम आपस में बांट ली जाती थी। इनके ठगी नेटवर्क का दायरा यूपी और बिहार ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक फैला हुआ था। पुलिस को यह भी पता चला है कि गिरोह से जुड़े विक्की पंडित को पीलीभीत के घुघचाई थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने पूछताछ में राकेश प्रजापति के कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया था। इसी सूचना के आधार पर गुलरिहा पुलिस ने दबिश शुरू की।
कोट
आरोपियों के पास से बरामद इन उपकरणों में ठगी के कई डिजिटल प्रमाण, डेटा, पीड़ितों की लिस्ट और लेन-देन संबंधी फाइलें खंगाली जा रही हैं। पुलिस की साइबर टीम इन सभी उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। जांच में कई नाम अभी सामने आने बाकी हैं। म्यूल खातों और कॉलिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
- सुधीर जायसवाल, एसपी क्राइम
विज्ञापन
- फेयर प्ले–247, एविएटर व रम्मी एप से होती थी ठगी की कमाई
- शहर के दो बैंकों के कर्मचारियों की मिलीभगत से खोले जाते थे म्यूल खाते
- खजांची रोड स्थित इंद्रा हॉस्पिटल के नीचे एक बेसमेंट में खोल रखे थे ठगी के कार्यालय
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ऑनलाइन गेमिंग एप के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पकड़े गए मुख्य आरोपी नारायणपुर नंबर 2, टोला हीरागंज निवासी राकेश प्रजापति और चिलबिलवा, भटहट निवासी जान आलम लंबे समय से एवियेटर, रम्मी एप और फेयर प्ले-247 जैसे ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये लोगों के साथ ठगी कर रहे थे। उनके कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियां प्रतिदिन सैकड़ों लोगों से संपर्क करती थीं, जिनमें से कई लोग फर्जी बोनस और ऑफरों के झांसे में आकर ठगी का शिकार हो जाते थे।
आरोपियों ने खजांची रोड स्थित इंद्रा हॉस्पिटल के नीचे एक बेसमेंट में ‘कौशल्या इन्वेस्टमेंट’ नाम से ऑफिस बनाया हुआ था। शहर में विज्ञापन देकर लड़कियों को नौकरी का झांसा दिया जाता था और फिर उन्हें कॉलिंग का काम सौंपा जाता था। युवतियां कंपनी के फर्जी नाम से यह बताते हुए कॉल करती थीं कि फेयर प्ले-247, एवियेटर और रम्मी एप पर खास ऑफर चल रहा है। थोड़े निवेश में बड़ा मुनाफा मिल सकता है। कई लोगों ने एप डाउनलोड किया, खाते बनाए और रुपये जमा कराए, जो सीधे आरोपियों के म्यूल खातों में पहुंच जाते थे। जैसे ही शिकार फंसता था, उसका रुपया कुछ ही मिनटों में दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
विज्ञापन
शहर के दो बैंकों के कर्मचारियों की मदद से खोले जाते थे म्यूल खाते
पुलिस जांच में पर्दाफाश हुआ है कि आरोपी भोले-भाले लोगों को फंसाकर उनके नाम पर म्यूल खाते खुलवाते थे। इन खातों को खुलवाने में बैंक कर्मी आरोपियों का साथ देते थे। इसमें एक बैंक गुलरिहा तो दूसरा बैंक रोड पर स्थित है। इसका पर्दाफाश पुलिस की जांच में हुआ। ठगों ने आईडीएफसी बैंक, गुलरिहा शाखा में विजय चौहान के नाम पर एक खाता खुलवाया। दूसरा खाता उत्कर्ष स्माल फाइनेंस बैंक, बैंक रोड गोरखपुर में खोला गया। विवेचना में पुलिस को अब तक 6 और म्यूल खातों का पता चला है, जिन्हें ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग ठगी में इस्तेमाल किया जा रहा था। जब लोग फेयर प्ले–247 और अन्य गेमिंग एप पर निवेश करते थे तो रकम सीधे इन्हीं म्यूल खातों में जमा होती थी।
विज्ञापन
ऑनलाइन गेमिंग ठगी का पूरा नेटवर्क चलाते थे आरोपी
आरोपी राकेश और जान आलम इन सभी खातों के जरिये ऑनलाइन सट्टा लगाने और ठगी से कमाया पैसा इकट्ठा करते थे। फिर पूरी रकम आपस में बांट ली जाती थी। इनके ठगी नेटवर्क का दायरा यूपी और बिहार ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक फैला हुआ था। पुलिस को यह भी पता चला है कि गिरोह से जुड़े विक्की पंडित को पीलीभीत के घुघचाई थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने पूछताछ में राकेश प्रजापति के कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया था। इसी सूचना के आधार पर गुलरिहा पुलिस ने दबिश शुरू की।
कोट
आरोपियों के पास से बरामद इन उपकरणों में ठगी के कई डिजिटल प्रमाण, डेटा, पीड़ितों की लिस्ट और लेन-देन संबंधी फाइलें खंगाली जा रही हैं। पुलिस की साइबर टीम इन सभी उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। जांच में कई नाम अभी सामने आने बाकी हैं। म्यूल खातों और कॉलिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
- सुधीर जायसवाल, एसपी क्राइम