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Gorakhpur News: 23 की उम्र तक नहीं दिखे किशोरावस्था के लक्षण, जांच में सामने आई दुर्लभ बीमारी
Sat, 20 Jun 2026 02:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 20 Jun 2026 02:42 AM IST
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कुशीनगर निवासी युवक की नहीं बढ़ रही थी लंबाई, एम्स में चल रहा इलाज
इंडोक्रायनोलॉजिस्ट ने बताया किशोर में प्रोटीन व कैल्शियम युक्त आहार, व्यायाम न होने से होती है यह बीमारी
गोरखपुर। एम्स में एक दुर्लभ हार्मोनल बीमारी का दूसरा मामला सामने आया है। कुशीनगर निवासी 23 वर्षीय युवक में उम्र बढ़ने के बावजूद किशोरावस्था से जुड़े सामान्य शारीरिक बदलाव नहीं हुए। उसकी अपेक्षित लंबाई भी नहीं बढ़ी और शरीर अत्यंत कमजोर बना रहा।
लगातार कमजोरी, सुस्ती और शारीरिक विकास में कमी की शिकायत पर परिजन युवक को एम्स लेकर पहुंचे। प्रारंभिक जांच के बाद युवक को इंडोक्रायनोलॉजी विभाग में भेजा गया। एम्स के इंडोक्रायनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. देबादित्य दास की निगरानी में युवक का इलाज चल रहा है। डॉ. दास ने बताया कि ब्रेन एमआरआई और हार्मोनल जांच में पता चला कि युवक मल्टीपल पिट्यूटरी हार्मोन डिफिशिएंसी नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है।
डॉ. दास ने बताया कि इस बीमारी में मस्तिष्क के आधार पर स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि का विकास सामान्य रूप से नहीं हो पाता। यह ग्रंथि शरीर के विकास, हार्मोन संतुलन, प्रजनन क्षमता और कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। इसके प्रभावित होने से लंबाई रुक सकती है, वजन कम रह सकता है और किशोरावस्था के लक्षण समय पर विकसित नहीं होते। यह बीमारी लगभग 10 हजार बच्चों में से किसी एक में पाई जाती है। फिलहाल युवक का उपचार हार्मोन प्रतिस्थापन दवाओं से शुरू कर दिया गया है और आगे ग्रोथ हार्मोन थेरेपी की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
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डॉक्टर का कहना है कि बच्चों और किशोरों में यदि लंबाई अपेक्षित दर से न बढ़ रही हो, यौवन के लक्षण समय पर न दिखें या लगातार कमजोरी बनी रहे तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
ऐसा क्यों होता है
- पिट्यूटरी ग्रंथि का जन्मजात सही विकास न होना।
- कुछ मामलों में आनुवंशिक (जेनेटिक) कारण जिम्मेदार होते हैं।
- हार्मोन बनाने वाली ग्रंथियों में जन्म से मौजूद विकार।
-- -
इन बातों का रखें ध्यान
बच्चों की लंबाई और वजन की नियमित निगरानी करें।
किशोरावस्था के लक्षणों में देरी दिखे तो जांच कराएं।
संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि सुनिश्चित करें।
किसी भी हार्मोनल समस्या के संकेत मिलने पर विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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डॉक्टर की सलाह
डॉ. देबादित्य दास का कहना है कि बच्चों और किशोरों में शारीरिक विकास की गति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि लंबाई नहीं बढ़ रही है, यौवन के लक्षण समय पर विकसित नहीं हो रहे हैं या लगातार कमजोरी बनी हुई है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उपचार से कई जटिलताओं को रोका जा सकता है तथा बच्चे का विकास बेहतर बनाया जा सकता है।
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इंडोक्रायनोलॉजिस्ट ने बताया किशोर में प्रोटीन व कैल्शियम युक्त आहार, व्यायाम न होने से होती है यह बीमारी
गोरखपुर। एम्स में एक दुर्लभ हार्मोनल बीमारी का दूसरा मामला सामने आया है। कुशीनगर निवासी 23 वर्षीय युवक में उम्र बढ़ने के बावजूद किशोरावस्था से जुड़े सामान्य शारीरिक बदलाव नहीं हुए। उसकी अपेक्षित लंबाई भी नहीं बढ़ी और शरीर अत्यंत कमजोर बना रहा।
लगातार कमजोरी, सुस्ती और शारीरिक विकास में कमी की शिकायत पर परिजन युवक को एम्स लेकर पहुंचे। प्रारंभिक जांच के बाद युवक को इंडोक्रायनोलॉजी विभाग में भेजा गया। एम्स के इंडोक्रायनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. देबादित्य दास की निगरानी में युवक का इलाज चल रहा है। डॉ. दास ने बताया कि ब्रेन एमआरआई और हार्मोनल जांच में पता चला कि युवक मल्टीपल पिट्यूटरी हार्मोन डिफिशिएंसी नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है।
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डॉ. दास ने बताया कि इस बीमारी में मस्तिष्क के आधार पर स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि का विकास सामान्य रूप से नहीं हो पाता। यह ग्रंथि शरीर के विकास, हार्मोन संतुलन, प्रजनन क्षमता और कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। इसके प्रभावित होने से लंबाई रुक सकती है, वजन कम रह सकता है और किशोरावस्था के लक्षण समय पर विकसित नहीं होते। यह बीमारी लगभग 10 हजार बच्चों में से किसी एक में पाई जाती है। फिलहाल युवक का उपचार हार्मोन प्रतिस्थापन दवाओं से शुरू कर दिया गया है और आगे ग्रोथ हार्मोन थेरेपी की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
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डॉक्टर का कहना है कि बच्चों और किशोरों में यदि लंबाई अपेक्षित दर से न बढ़ रही हो, यौवन के लक्षण समय पर न दिखें या लगातार कमजोरी बनी रहे तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
ऐसा क्यों होता है
- पिट्यूटरी ग्रंथि का जन्मजात सही विकास न होना।
- कुछ मामलों में आनुवंशिक (जेनेटिक) कारण जिम्मेदार होते हैं।
- हार्मोन बनाने वाली ग्रंथियों में जन्म से मौजूद विकार।
इन बातों का रखें ध्यान
बच्चों की लंबाई और वजन की नियमित निगरानी करें।
किशोरावस्था के लक्षणों में देरी दिखे तो जांच कराएं।
संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि सुनिश्चित करें।
किसी भी हार्मोनल समस्या के संकेत मिलने पर विशेषज्ञ से परामर्श लें।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. देबादित्य दास का कहना है कि बच्चों और किशोरों में शारीरिक विकास की गति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि लंबाई नहीं बढ़ रही है, यौवन के लक्षण समय पर विकसित नहीं हो रहे हैं या लगातार कमजोरी बनी हुई है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उपचार से कई जटिलताओं को रोका जा सकता है तथा बच्चे का विकास बेहतर बनाया जा सकता है।