कारोबार: सेहतकारी गुड़ दे रहा रोजगार के अवसर, गोरखपुर मंडल में एक हजार से अधिक गन्ना क्रशर
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गोरखपुर मंडल में गुड़ का बढ़ता कारोबार रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। मंडल में इस वक्त एक हजार से अधिक क्रशर संचालित हैं। हर क्रसर पर आठ से दस लोगों को रोजगार मिल रहा है।
गोरखपुर मंडल में एक लाख 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। आमतौर पर चीनी मिलों का पेराई सत्र दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में शुरू होता है। अधिकांश किसान कम जोत वाले हैं अथवा उन्हें गन्ना काटकर उसी खेत में गेहूं की बुवाई करनी होती है। लिहाजा वे अपना गन्ना क्रशर पर बेंचने लगते हैं।
इसके चलते दशहरा के आसपास क्रशर पर पेराई शुरू हो जाती है। फरवरी में जैसे ही तापमान बढ़ना शुरू होता है, कम रिकवरी की आशंका को देखते हुए चीनी मिलें पेराई सत्र बंद कर देती हैं। उस वक्त जो गन्ना खेत में बचा रह जाता है, उसे भी क्रशर पर ही बेचने की मजबूरी होती है। इसलिए क्रशर अक्तूबर में चालू होकर अप्रैल तक गन्ना पेराई करते हैं।
गुड़ की बढ़ रही मांग ने जगाई आस
पिछले कुछ समय से सेहत के लिहाज से लाभदायक गुड़ की मांग बढ़ रही है। क्रसर मालिक सुमंत, बृजविहारी, बिल्लर आदि का कहना है कि मांग के अनुरूप गुड़ की गुणवत्ता को भी बेहतर किया जा रहा है। गुड़ के आकार-प्रकार में आए परिवर्तन के चलते अच्छी कीमत भी मिल रही है। यहां तैयार गुड़ लखनऊ, कानपुर, बाराबंकी समेत कई अन्य जगहों पर भेजा जा रहा है। इसके अलावा पड़ोसी देश नेपाल में भी बड़े पैमाने पर यहां से गुड़ जा रहा है।
एक क्रशर पर 10 लोगों को काम
एक क्रशर पर गन्ना तौल से लेकर गुड़ बनाने तक में औसतन 10 लोगों को काम मिलता है। गुड़ बनाने से पहले उसके रस को पकाने की प्रक्रिया जटिल होती है। इसके लिए कारीगर की जरूरत पड़ती है। गोरखपुर मंडल में सबसे अधिक कारीगर बिहार से बुलाए जाते हैं।
स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है गुड़
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक राजेश कुमार बताते हैं कि गुड़ आयरन का बहुत बड़ा स्रोत है। इसके नियमित उपयोग से शरीर में खून की कमी नहीं होती। इसको बनाने की विधि भी सहज है, जिससे इसके प्राकृतिक गुण बने रहते हैं।