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Gorakhpur News: ... और सड़क पर उतर आए थे हरिशंकर तिवारी
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गोरखपुर। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही लंबे समय बाद 2017 में तिवारी हाते पर पुलिस का छापा पड़ा था। उस वक्त यह छापा प्रदेश की सुर्खियों में था। छापा के बाद हरिशंकर तिवारी खुद सड़क पर उतरे और कलक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए।
तिवारी के धरने पर बैठने के बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई। बाद में पता चला कि जिस अपराधी की तलाश में पुलिस हाता गई थी, वह गैर जनपद के जेल में बंद था। इन सबके बीच 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तिवारी परिवार सपा की साइकिल पर सवार हो गया। पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी, पूर्व विधायक विनय शंकर सपा में शामिल हो गए। इसी के साथ सपा की पूर्वांचल में बड़े ब्राह्मण चेहरे की तलाश भी पूरी हो गई। विनय शंकर के साथ उनके भांजे और विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय भी सपा में शामिल हो गए।
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बड़े बेटे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को भी राजनीति में स्थापित किया
पंडित हरिशंकर तिवारी ने साल 2012 में राजनीति से संन्यास ले लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने दोनों बेटों को राजनीतिक विरासत सौंप दी। छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी को चिल्लूपार विधानसभा से विधायक बनवाकर विधानसभा भेजा तो बड़े बेटे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को साल 2007 के उपचुनाव में संतकबीरनगर से सांसद के रूप में जीत दिलवाई। साल 2009 में फिर उन्हें लड़वाया और जीत दिलवाई।
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तिवारी के धरने पर बैठने के बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई। बाद में पता चला कि जिस अपराधी की तलाश में पुलिस हाता गई थी, वह गैर जनपद के जेल में बंद था। इन सबके बीच 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तिवारी परिवार सपा की साइकिल पर सवार हो गया। पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी, पूर्व विधायक विनय शंकर सपा में शामिल हो गए। इसी के साथ सपा की पूर्वांचल में बड़े ब्राह्मण चेहरे की तलाश भी पूरी हो गई। विनय शंकर के साथ उनके भांजे और विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय भी सपा में शामिल हो गए।
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बड़े बेटे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को भी राजनीति में स्थापित किया
पंडित हरिशंकर तिवारी ने साल 2012 में राजनीति से संन्यास ले लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने दोनों बेटों को राजनीतिक विरासत सौंप दी। छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी को चिल्लूपार विधानसभा से विधायक बनवाकर विधानसभा भेजा तो बड़े बेटे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को साल 2007 के उपचुनाव में संतकबीरनगर से सांसद के रूप में जीत दिलवाई। साल 2009 में फिर उन्हें लड़वाया और जीत दिलवाई।
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