{"_id":"6463f2b69be25e359300db59","slug":"harishankar-tiwari-death-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-170487-2023-05-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: छात्र राजनीति से शुरू हुआ बाहुबली हरिशंकर तिवारी का सफर, सदन तक पहुंचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: छात्र राजनीति से शुरू हुआ बाहुबली हरिशंकर तिवारी का सफर, सदन तक पहुंचा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चिल्लूपार से छह बार विधायक चुने गए, यूपी सरकार में पांच बार रहे थे कैबिनेट मंत्री
जेल में बंद रहते चिल्लूपार विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार को पटखनी देकर चर्चा में आए थे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। छात्र राजनीति से शुरू हुआ बाहुबली पंडित हरिशंकर तिवारी का सफर सदन तक पहुंचा। वह गोरखपुर के चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक और यूपी सरकार में पांच बार कैबिनेट मंत्री रहे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद जब देश में कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की लहर चल रही थी, तब वर्ष 1985 में जेल में रहते हुए हरिशंकर तिवारी ने कांग्रेस उम्मीदवार मार्कंडेय नंद को 21,728 वोटों से शिकस्त देकर राजनीति के दिग्गजों को चौंका दिया था।
सत्तर के दशक में देश की राजनीति तेजी से बदल रही थी। जेपी की क्रांति और कांग्रेस को मिल रही चुनौतियों का असर हर राज्य में नजर आ रहा था। इससे राजनीति का गढ़ कहे जाने वाले पूर्वांचल के छात्र नेता भी अछूते नहीं थे। विश्वविद्यालयों में वर्चस्व की लड़ाई की शुरुआत हो चुकी थी। उस वक्त हरिशंकर तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र नेता के रूप में बड़ा नाम बनकर उभरे थे।
हरिशंकर तिवारी की ख्याति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिल्लूपार सीट से वे 22 साल तक लगातार विधायक चुने गए। हरिशंकर की एक खूबी ये भी रही कि हर दल के साथ उनके करीबी रिश्ते रहे। सत्ता चाहे जिसकी भी रही वे हमेशा मंत्री बनते रहे। बीजेपी का दौर हो या समाजवादी पार्टी अथवा बहुजन समाज पार्टी का, हर बार पंडित हरिशंकर को सराकर में बड़ा ओहदा मिला।
विज्ञापन
-- --
चुनाव हारने के बाद लिया राजनीति से संन्यास
वर्ष 2007 तक हरिशंकर तिवारी का राजनीतिक जीवन ऊंचाइयों को छूता रहा, लेकिन उसके बाद पहली बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2007 के बाद 2012 में भी वे चुनाव हार गए। इसके बाद उन्होंने अपनी सियासी कर्मभूमि छोटे पुत्र विनय शंकर तिवारी को सौंप दी। साल 2017 में विनय शंकर बीएसपी से चुनाव लड़े और पूर्व मंत्री राजेश तिवारी को हराकर पुश्तैनी सीट पर कब्जा जमाया।
-
चिल्लूपार से छह बार लगातार विधायक रहे
यूपी की सियासत में बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पहचान रखने वाले पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी की कर्मभूमि चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र रही है। इस क्षेत्र से वे 1985 में पहली बार विधायक बने और लगातार छह बार चुनाव में जीत हासिल की।
विज्ञापन
जेल में बंद रहते चिल्लूपार विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार को पटखनी देकर चर्चा में आए थे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। छात्र राजनीति से शुरू हुआ बाहुबली पंडित हरिशंकर तिवारी का सफर सदन तक पहुंचा। वह गोरखपुर के चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक और यूपी सरकार में पांच बार कैबिनेट मंत्री रहे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद जब देश में कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की लहर चल रही थी, तब वर्ष 1985 में जेल में रहते हुए हरिशंकर तिवारी ने कांग्रेस उम्मीदवार मार्कंडेय नंद को 21,728 वोटों से शिकस्त देकर राजनीति के दिग्गजों को चौंका दिया था।
सत्तर के दशक में देश की राजनीति तेजी से बदल रही थी। जेपी की क्रांति और कांग्रेस को मिल रही चुनौतियों का असर हर राज्य में नजर आ रहा था। इससे राजनीति का गढ़ कहे जाने वाले पूर्वांचल के छात्र नेता भी अछूते नहीं थे। विश्वविद्यालयों में वर्चस्व की लड़ाई की शुरुआत हो चुकी थी। उस वक्त हरिशंकर तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र नेता के रूप में बड़ा नाम बनकर उभरे थे।
विज्ञापन
हरिशंकर तिवारी की ख्याति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिल्लूपार सीट से वे 22 साल तक लगातार विधायक चुने गए। हरिशंकर की एक खूबी ये भी रही कि हर दल के साथ उनके करीबी रिश्ते रहे। सत्ता चाहे जिसकी भी रही वे हमेशा मंत्री बनते रहे। बीजेपी का दौर हो या समाजवादी पार्टी अथवा बहुजन समाज पार्टी का, हर बार पंडित हरिशंकर को सराकर में बड़ा ओहदा मिला।
विज्ञापन
चुनाव हारने के बाद लिया राजनीति से संन्यास
वर्ष 2007 तक हरिशंकर तिवारी का राजनीतिक जीवन ऊंचाइयों को छूता रहा, लेकिन उसके बाद पहली बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2007 के बाद 2012 में भी वे चुनाव हार गए। इसके बाद उन्होंने अपनी सियासी कर्मभूमि छोटे पुत्र विनय शंकर तिवारी को सौंप दी। साल 2017 में विनय शंकर बीएसपी से चुनाव लड़े और पूर्व मंत्री राजेश तिवारी को हराकर पुश्तैनी सीट पर कब्जा जमाया।
-
चिल्लूपार से छह बार लगातार विधायक रहे
यूपी की सियासत में बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पहचान रखने वाले पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी की कर्मभूमि चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र रही है। इस क्षेत्र से वे 1985 में पहली बार विधायक बने और लगातार छह बार चुनाव में जीत हासिल की।