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Gorakhpur News: सुरक्षित रहेंगी दुर्लभ ग्रंथ और पांडुलिपियां...दिया जाएगा डिजिटल रूप
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विरासत के संरक्षण को जिले में चलाया जाएगा ज्ञान भारतम मिशन
मूल संग्रहकर्ता के पास ही रहेगा पांडुलिपि का अधिकार, डिजिटल प्रकाशन से विश्व पटल पर प्रस्तुत करेगी सरकार
गोरखपुर। भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए जिले स्तर पर पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य दस्तावेजों को सहेजा जाएगा। मूल संग्रहकर्ता के पास ही रहेगा पांडुलिपि का अधिकार रहेगा। पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे ज्ञान भारतम पोर्टल के माध्यम से आमजन को आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी।
पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर विश्व पटल पर डिजिटल रूप देने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में जिला स्तर पर पांडुलिपियों को चिन्हित व संग्रहित करने के आदेश जारी किए हैं। इसके पर्यवेक्षण के लिए हर जिले में वहां के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों, व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण का कार्य किया जाना है।
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रखरखाव के अभाव में व्यक्तियों या संस्थाओं के पास उपलब्ध कई ग्रंथ नष्ट होने की कगार पर हैं। जिला स्तर पर अभियान चलाकर पांडुलिपियों का संग्रह करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से संपर्क कर उन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा। इसमें हाथ से लिखे उन ग्रंथों को शामिल किया जाएगा जो 75 वर्ष से अधिक प्राचीन हों। जिला स्तर पर तैयार सूची संस्कृति विभाग के जरिये प्रदेश के राजकीय अभिलेखागार को प्रेषित की जाएगी। जहां उच्च गुणवत्ता की स्कैनिंग के बाद इसका डिजिटल रूप तैयार हो जाएगा। इस मिशन की विशेषता यह है कि इसमें पांडुलिपियां, संबंधित संग्रहकर्ता संस्था या व्यक्ति के ही अधिकार में रहेंगी।
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मूल संग्रहकर्ता के पास ही रहेगा पांडुलिपि का अधिकार, डिजिटल प्रकाशन से विश्व पटल पर प्रस्तुत करेगी सरकार
गोरखपुर। भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए जिले स्तर पर पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य दस्तावेजों को सहेजा जाएगा। मूल संग्रहकर्ता के पास ही रहेगा पांडुलिपि का अधिकार रहेगा। पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे ज्ञान भारतम पोर्टल के माध्यम से आमजन को आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी।
पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर विश्व पटल पर डिजिटल रूप देने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में जिला स्तर पर पांडुलिपियों को चिन्हित व संग्रहित करने के आदेश जारी किए हैं। इसके पर्यवेक्षण के लिए हर जिले में वहां के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
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गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों, व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण का कार्य किया जाना है।
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रखरखाव के अभाव में व्यक्तियों या संस्थाओं के पास उपलब्ध कई ग्रंथ नष्ट होने की कगार पर हैं। जिला स्तर पर अभियान चलाकर पांडुलिपियों का संग्रह करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से संपर्क कर उन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा। इसमें हाथ से लिखे उन ग्रंथों को शामिल किया जाएगा जो 75 वर्ष से अधिक प्राचीन हों। जिला स्तर पर तैयार सूची संस्कृति विभाग के जरिये प्रदेश के राजकीय अभिलेखागार को प्रेषित की जाएगी। जहां उच्च गुणवत्ता की स्कैनिंग के बाद इसका डिजिटल रूप तैयार हो जाएगा। इस मिशन की विशेषता यह है कि इसमें पांडुलिपियां, संबंधित संग्रहकर्ता संस्था या व्यक्ति के ही अधिकार में रहेंगी।