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गोरखपुर विश्वविद्यालय और सर्बिया मिलकर करेंगे शोध
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गोरखपुर विश्वविद्यालय और सर्बिया मिलकर करेंगे शोध
गोरखपुर। सर्बिया के राष्ट्रीय महत्व के संस्थान ‘विंका इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लीयर साईंसेज’ और गोरखपुर विश्वविद्यालय एक अंतरराष्ट्रीय शोध प्रोजेक्ट में द्विपक्षीय सहयोग करेंगे। यह शोध प्रोजेक्ट विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग और विंका के फिजिकल केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के द्वारा इंडो-सर्बियन स्कीम के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। प्रोजेक्ट टीम में इंडिया की ओर से डॉ. अंबरीश कुमार श्रीवास्तव और प्रो. सुग्रीव नाथ तिवारी तथा सर्बियन की ओर से डॉ सुजाना वेलिच कोविक की टीम काम करेगी।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि इस शोध प्रोजेक्ट का प्रस्ताव डॉ. सुजाना की तरफ से मिला है। वे विंका (सर्बिया) के फिजिकल केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की असिस्टेंट डायरेक्टर हैं। यह प्रस्ताव सूपरअल्कली के सैद्धांतिक और प्रायोगिक स्टडीज पर आधारित है। इसका सैद्धांतिक भाग गोरखपुर यूनिवर्सिटी में और प्रायोगिक भाग विंका में सम्पन्न होना है। इसके अंतर्गत गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध-छात्रों को विंका में उपलब्ध प्रायोगिक सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। बता दें कि डॉ. अंबरीश सूपरअल्कली पर पिछले पांच वर्षों से सैद्धांतिक शोध कर रहे हैं। उनके 50 से भी अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। हाल ही में इन्हें विश्व प्रतिष्ठित संस्था एसीएस से शोधपत्र भेजने का आमंत्रण मिला है। भौतिकी विभाग की इन उपलब्धियों पर विभागाध्यक्ष प्रो. शांतनु रस्तोगी समेत समस्त विश्वविद्यालय परिवार ने शुभकामनाएं दी हैं।
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गोरखपुर। सर्बिया के राष्ट्रीय महत्व के संस्थान ‘विंका इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लीयर साईंसेज’ और गोरखपुर विश्वविद्यालय एक अंतरराष्ट्रीय शोध प्रोजेक्ट में द्विपक्षीय सहयोग करेंगे। यह शोध प्रोजेक्ट विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग और विंका के फिजिकल केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के द्वारा इंडो-सर्बियन स्कीम के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। प्रोजेक्ट टीम में इंडिया की ओर से डॉ. अंबरीश कुमार श्रीवास्तव और प्रो. सुग्रीव नाथ तिवारी तथा सर्बियन की ओर से डॉ सुजाना वेलिच कोविक की टीम काम करेगी।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि इस शोध प्रोजेक्ट का प्रस्ताव डॉ. सुजाना की तरफ से मिला है। वे विंका (सर्बिया) के फिजिकल केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की असिस्टेंट डायरेक्टर हैं। यह प्रस्ताव सूपरअल्कली के सैद्धांतिक और प्रायोगिक स्टडीज पर आधारित है। इसका सैद्धांतिक भाग गोरखपुर यूनिवर्सिटी में और प्रायोगिक भाग विंका में सम्पन्न होना है। इसके अंतर्गत गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध-छात्रों को विंका में उपलब्ध प्रायोगिक सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। बता दें कि डॉ. अंबरीश सूपरअल्कली पर पिछले पांच वर्षों से सैद्धांतिक शोध कर रहे हैं। उनके 50 से भी अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। हाल ही में इन्हें विश्व प्रतिष्ठित संस्था एसीएस से शोधपत्र भेजने का आमंत्रण मिला है। भौतिकी विभाग की इन उपलब्धियों पर विभागाध्यक्ष प्रो. शांतनु रस्तोगी समेत समस्त विश्वविद्यालय परिवार ने शुभकामनाएं दी हैं।
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