बदल रहा है गोरखपुर: लाइट मेट्रो का इंतजार, दायरा भी बढ़े तो हो सबका उद्धार
जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि लाइट मेट्रो परियोजना के संबंध में डीपीआर शासन में लंबित है। इस संंबंध में जैसे ही कोई निर्देश मिलेगा, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
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गोरखपुर शहरवासियों को तीन बोगी वाली लाइट मेट्रो चलाने के लिए अब शासन से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। इसके संचालन के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजा जा चुका है। हालांकि, शहरवासियों के साथ विशेषज्ञों का भी मानना है कि शहर का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इससे आर्थिक ही नहीं सामाजिक ढांचे में भी बदलाव हो रहा है।
इसे ध्यान में रखकर लाइट मेट्रो परियोजना का भी विस्तार होना चाहिए। अब तो नगर निगम की ओर से संचालित सिटी बसें कौड़ीराम, पिपराइच, सहजनवां तक चल रही हैं। अगर मेट्रो रेल भी इन रुटों तक चलाई जाए तभी लोगों के सुविधाजनक होगा।
लाइट मेट्रो चलाने के लिए कुल 4,672 करोड़ का बजट निर्धारित है। इसमें दो रूट तय किए गए हैं, जिसमें 15.14 किमी का पहला रूट श्यामनगर से लेकर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तक है।
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इसमें श्याम नगर, बरगदवां, शास्त्रीनगर, नथमलपुर, गोरखनाथ मंदिर, हजारीपुर, धर्मशाला, गोरखपुर रेलवे स्टेशन, यूनिवर्सिटी, मोहद्दीपुर, रामगढ़ताल, एम्स, मालवीयनगर, एमएमएमयूटी तक के बीच में कुल 14 स्टेशन बनाए जाएंगे। दूसरे रूट के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज से नौसड़ चौराहे तक की दूरी तय की गई है।
इस रूट पर 12.70 किलोमीटर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज, मुगलहा, खजांची बाजार, बशारतपुर, अशोक नगर, वैष्णोनगर, असुरन चौक, धर्मशाला, गोलघर, कचहरी चौराहा, बेतियाहाता और ट्रांसपोर्टनगर नगर होते हुए नौसड़ तक 13 स्टेशन बनेंगे। जिस रूट पर मेट्रो ट्रेन चलनी है, उस पर फोरलेन का काम पूरा हो चुका है। फोरलेन के बीच में ही मेट्रो के लिए पिलर बनाए जाएंगे।
जानकारी के मुताबिक, करीब 27 किमी लंबे मेट्रो रूट पर 27 स्टेशनों के साथ दो एलिवेटेड लाइनें बनेंगी। इस परियोजना के वर्ष 2024 तक पूरा होने का अनुमान लगाया गया था। लेकिन, अभी तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है। इसका संचालन शुरू होने से सड़क पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
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मेट्रो के संचालन से यह होंगे फायदे
- शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव कम होगा। वाहनों की तादाद घटेगी।
- लोग आसानी से बेहद ही कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकेंगे।
- मेट्रो सेवा से जुड़ी जगहों पर संपत्तियों की कीमत बढ़ जाएगी। यहां जमीनों के भाव बढ़ जाएंगे।
- इससे शहर के आर्थिक और ढांचागत विकास को गति मिलेगी। महत्वपूर्ण स्थलों, वाणिज्यिक और आवासीय क्षेत्रों को जोड़ने में आसानी होगी।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
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सिविल इंजीनियर और आर्किट्रेक्ट सतीश सिंह ने कहा कि वर्तमान में नगर निगम की इलेक्ट्रिक बसें जहां तक चल रही हैं, कम से कम वहां तक इस परियोजना का विस्तार किया जाए। पीपीगंज, पिपराइच, सहजनवां, सोनबरसा और मुंडेरा बाजार तक शहर का दायरा बढ़ चुका है। मेट्रो रेल को अब मोतीराम अड्डा से आगे और नौसड़ से बढ़ाकर सहजनवां तक किए जाने की जरूरत है। तभी इसकी उपयोगिता होगी और लोगों को ज्यादा सुविधा होगी।
जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि लाइट मेट्रो परियोजना के संबंध में डीपीआर शासन में लंबित है। इस संंबंध में जैसे ही कोई निर्देश मिलेगा, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। मेट्रो रेल परियोजना से शहर के विकास को गति मिलेगी।