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Gorakhpur News: गोरखपुर के लोगों को खूब भाता है परवल...हर साल खा जाते हैं डेढ़ लाख क्विंटल

Mon, 22 Apr 2024 05:32 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Apr 2024 05:32 AM IST
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Gorakhpur News: People of Gorakhpur like Parwal very much...they eat one and a half lakh quintals every year
गोरखपुर। फरवरी से नवंबर के बीच किचन में परवल की बहुत डिमांड होती है। मंडी के आंकड़े बताते हैं कि इन नौ महीने में यहां करीब डेढ़ लाख क्विंटल परवल की खपत होती है। इसमें से लगभग 50 हजार क्विंटल परवल की डिमांड यहीं की खेती से होती है। शेष करीब एक लाख क्विंटल परवल गाजीपुर, बलिया और अन्य जगहों से मंगाया जाता है।
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शहर के महेवा मंडी में हर दिन 50 टन यानी 500 क्विंटल परवल बेचा जा रहा है। गाजीपुर, बलिया से पिकअप भरकर परवल की खेप आ रही है। इसके अलावा बड़हलगंज से लेकर पिपराइच तक किसानों के खेत से भी परवल आता है। जनवरी में सबसे पहले पश्चिम बंगाल का परवल बाजार में आता है। उस वक्त कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक का होता है, लेकिन शौकीनों की कमी उस वक्त भी कम नहीं होती। हालांकि, तब इसकी उपलब्धता बहुत कम होती है। फरवरी आते-आते हर बड़ी दुकान में परवल की ढेरी दिखने लगती है।
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परवतपुर गांव के गाम्हा प्रसाद बताते हैं कि एक वह दौर था जब सहालग ही नहीं कोई भी बड़े आयोजन में आलू-परवल की सब्जी ही सबसे महत्वपूर्ण हुआ करती थी। उस वक्त पनीर, मशरूम का चलन बहुत कम था। अब तो हर घर में आलू की तरह ही हरी सब्जी में परवल का राज है। सब्जी व्यापारी इमरान ने बताया कि महेवा सब्जी मंडी में 10 दिन पहले करीब 35-40 टन परवल की खपत थी, लेकिन सहालग में 50-55 टन तक परवल बिक जा रहा है। दस दिन पहले तक थोक मंडी में परवल की कीमत 55-60 रुपये किलो थी, जो अब 40 रुपये हो गई है।
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बरेली-शाहजहांपुर के लोग आते हैं खेती करने
बड़हलगंज, गोला बाजार और बेलघाट इलाके के जिस बाढ़ग्रस्त इलाके के लोग रोजी-रोटी के लिए पलायन करते हैं, उसी क्षेत्र में नदियों के रेत में परवल की खेती लहलहा रही है। बरेली और शाहजहांपुर के लोग यहां खेतों को किराये पर लेते हैं और तीन माह में ही कमाकर लौट जाते हैं। बाघागाड़ा में राप्ती नदी के तट पर परवल की खेती करने वाले अमेरिका प्रसाद ने बताया कि खेती बाढ़ में डूब जाती है, लेकिन तीन माह परवल की खेती से जो आय होती है, उससे बड़ी राहत मिलती है। गोरखपुर, गाजीपुर और बलिया से आने वाला परवल आकार में छोटा होता है। जबकि पश्चिम बंगाल का परवल आकार में बड़ा होता है। देसी परवल का स्वाद अच्छा होने के कारण ज्यादा पसंद किया जाता है। लखीमपुर खीरी का परवल भी देसी परवल जैसा स्वाद में अच्छा होता है।
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भिंडी की मांग भी अधिक
गोरखपुर। यहां की मंडी में भिंडी की मांग भी अधिक है। हर दिन 45 से 50 टन भिंडी बिक जा रही है। सब्जी व्यापरी व्यापारी विशाल चौधरी ने बताया कि लोकल भिंडी 2-3 पिकप ही आ रही है। पश्चिम बंगाल से आने वाली दो-तीन ट्रक भिंडी एक दिन में बिक जा रही है। लोकल भिंडी मुलायम और छोटी होती है, जबकि बंगाल वाली भिंडी बड़ी होती है, इसमें मुलायमियत कम होती है।
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कोट-
मंडी में इन दिनों 18-20 पिकअप परवल गाजीपुर और बलिया से आ रहा है, जबकि लोकल परवल भी आ रहा है। जुलाई में लोकल परवल समाप्त हो जाता है, तब इसकी आपूर्ति बहराइच से होती है।

सोनू, सब्जी व्यापारी महेवा मंडी
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कोट-
गोरखपुर मंडी में हर दिन औसतन 500 क्विंटल परवल का कारोबार होता है। परवल यहां की प्रमुख सब्जी है। परवल में कोई मिलावट नहीं हो सकती है, लेकिन पनीर मिलावटी हो सकता है। यहीं कारण है कि हरी सब्जियों में परवल की मांग अधिक होती है। लोकल परवल की मांग अधिक होती है और इसका स्वाद भी अच्छा होता है।
अवध गुप्ता, सब्जी व्यापारी महेवा मंडी
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