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Gorakhpur News: अब नहीं हो पाएगी असंक्रमणीय भूमि की रजिस्ट्री, ओटीपी ही नहीं आएगा
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ओटीपी बेस्ड रजिस्ट्री होने से रुका फर्जीवाड़ा, गड़बड़ी पर होगा भौतिक परीक्षण
गोरखपुर। निबंधन कार्यालय में अब ओटीपी बेस्ड रजिस्ट्री शुरू होने से जमीनों की बिक्री में फर्जीवाड़ा कर पाना आसान नहीं होगा। खासकर, असंक्रमणीय भूमि (जिसे बेचा या दान नहीं दे सकते) की रजिस्ट्री अब नहीं हो पाएगी। अगर कोई कूटरचित खतौनी तैयार कर आवेदन करेगा तो नया साॅफ्टवेयर उसे खारिज कर देगा और क्रेता-विक्रेता के मोबाइल फोन पर ओटीपी ही नहीं आएगा।
पुराने साॅफ्टवेयर में इसे पकड़ने के लिए कोई सिस्टम नहीं था। धंधेबाज जमीनों का कूटरचित खतौनी तैयार करते थे और उसमें असंक्रमणीय को संक्रमणीय दिखा देते थे। ऑनलाइन जांच की व्यवस्था न होने से इसे पकड़ा नहीं जाता था और ऐसी जमीनों की भी रजिस्ट्री हो जाती थी। वरिष्ठ अधिवक्ता रवि श्रीवास्तव का कहना है कि अब रजिस्ट्री के समय दस्तावेज अपलोड करते समय खतौनी का यूनिक कोड डालना अनिवार्य है। ऑप्शन पर हां टिक कर कोड को अपलोड करना है अगर जीडीए या आवास विकास परिषद की जमीन है तो नहीं लिखना होगा। इसके बिना प्रक्रिया आगे ही नहीं बढ़ेगी और आवेदन खारिज हो जाएगा।
रजिस्ट्री में दो दिन लगने से गलतियां रुकेंगी पर बढ़ेंगी चुनौतियां
निबंधन विभाग की ओर से अब नए सर्वर पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया का नियम बदलने की तैयारी है। पिछले दिनों इसका ट्रायल हो चुका है। रजिस्ट्री दो दिन होगी, पहले दिन दस्तावेज अपलोड किया जाएगा और स्टांप शुल्क जमा होगा। दूसरे दिन क्रेता-विक्रेता और गवाह को आना होगा। वरिष्ठ अधिवक्ता उपेंद्र धर दुबे कहते हैं, इस प्रक्रिया से जहां दस्तावेज में गलतियां तो रुकेंगी लेकिन चुनौतियां भी बढ़ेंगी। लोगों को दो दिन तक चक्कर काटना पड़ेगा। इसके अलावा अगर दूसरे दिन विक्रेता नहीं आया तो रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। बेचने वाले को कोई धमका सकता है या वही ज्यादा रेट के चक्कर में रजिस्ट्री करने से कतराने लगेगा। इससे स्टांप खरीद चुके क्रेता को दिक्कत होगी।
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गोरखपुर। निबंधन कार्यालय में अब ओटीपी बेस्ड रजिस्ट्री शुरू होने से जमीनों की बिक्री में फर्जीवाड़ा कर पाना आसान नहीं होगा। खासकर, असंक्रमणीय भूमि (जिसे बेचा या दान नहीं दे सकते) की रजिस्ट्री अब नहीं हो पाएगी। अगर कोई कूटरचित खतौनी तैयार कर आवेदन करेगा तो नया साॅफ्टवेयर उसे खारिज कर देगा और क्रेता-विक्रेता के मोबाइल फोन पर ओटीपी ही नहीं आएगा।
पुराने साॅफ्टवेयर में इसे पकड़ने के लिए कोई सिस्टम नहीं था। धंधेबाज जमीनों का कूटरचित खतौनी तैयार करते थे और उसमें असंक्रमणीय को संक्रमणीय दिखा देते थे। ऑनलाइन जांच की व्यवस्था न होने से इसे पकड़ा नहीं जाता था और ऐसी जमीनों की भी रजिस्ट्री हो जाती थी। वरिष्ठ अधिवक्ता रवि श्रीवास्तव का कहना है कि अब रजिस्ट्री के समय दस्तावेज अपलोड करते समय खतौनी का यूनिक कोड डालना अनिवार्य है। ऑप्शन पर हां टिक कर कोड को अपलोड करना है अगर जीडीए या आवास विकास परिषद की जमीन है तो नहीं लिखना होगा। इसके बिना प्रक्रिया आगे ही नहीं बढ़ेगी और आवेदन खारिज हो जाएगा।
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रजिस्ट्री में दो दिन लगने से गलतियां रुकेंगी पर बढ़ेंगी चुनौतियां
निबंधन विभाग की ओर से अब नए सर्वर पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया का नियम बदलने की तैयारी है। पिछले दिनों इसका ट्रायल हो चुका है। रजिस्ट्री दो दिन होगी, पहले दिन दस्तावेज अपलोड किया जाएगा और स्टांप शुल्क जमा होगा। दूसरे दिन क्रेता-विक्रेता और गवाह को आना होगा। वरिष्ठ अधिवक्ता उपेंद्र धर दुबे कहते हैं, इस प्रक्रिया से जहां दस्तावेज में गलतियां तो रुकेंगी लेकिन चुनौतियां भी बढ़ेंगी। लोगों को दो दिन तक चक्कर काटना पड़ेगा। इसके अलावा अगर दूसरे दिन विक्रेता नहीं आया तो रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। बेचने वाले को कोई धमका सकता है या वही ज्यादा रेट के चक्कर में रजिस्ट्री करने से कतराने लगेगा। इससे स्टांप खरीद चुके क्रेता को दिक्कत होगी।
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