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Gorakhpur News: एमजीयूजी के छात्र ने कम लागत में किया ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन
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कृषि संकाय में स्नातक के छात्र हैं अमित चौधरी
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अपशिष्ट के मदद से किया तैयार
गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के छात्र अमित कुमार चौधरी ने विश्वविद्यालय परिसर में कम लागत में ऑयस्टर मशरूम का सफलतापूर्वक उत्पादन कर अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है। अमित कृषि संकाय में स्नातक तृतीय वर्ष के छात्र हैं।
कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विमल कुमार दुबे एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. विकास कुमार यादव के निर्देश में अमित ने ऑयस्टर मशरूम बनाया। सीमित संसाधनों में उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ मशरूम उत्पादन कर अमित कुमार चौधरी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अपशिष्ट, जैसे गेहूं की भूसी और पराली का उपयोग कर पर्यावरणीय सजगता का भी परिचय दिया। कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विमल कुमार दुबे और सहायक प्राध्यापक डॉ. विकास कुमार यादव ने कहा है कि इस नवाचारी प्रयास से विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार और व्यावहारिक दक्षता को प्रोत्साहन मिलेगा और वे परंपरागत कृषि से आगे सोचने के लिए प्रेरित होंगे।
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वर्जन
ऐसे नवोन्मेषी कार्य विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर करते हैं तथा विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके साथ ही अन्य विद्यार्थी भी इस प्रेरणास्पद उदाहरण से प्रेरणा लेकर ‘नई सोच, नई खेती’ के लक्ष्य को साकार करेंगे।
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- डॉ. सुरेंद्र सिंह, कुलपति एमजीयूजी
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स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अपशिष्ट के मदद से किया तैयार
गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के छात्र अमित कुमार चौधरी ने विश्वविद्यालय परिसर में कम लागत में ऑयस्टर मशरूम का सफलतापूर्वक उत्पादन कर अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है। अमित कृषि संकाय में स्नातक तृतीय वर्ष के छात्र हैं।
कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विमल कुमार दुबे एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. विकास कुमार यादव के निर्देश में अमित ने ऑयस्टर मशरूम बनाया। सीमित संसाधनों में उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ मशरूम उत्पादन कर अमित कुमार चौधरी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अपशिष्ट, जैसे गेहूं की भूसी और पराली का उपयोग कर पर्यावरणीय सजगता का भी परिचय दिया। कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विमल कुमार दुबे और सहायक प्राध्यापक डॉ. विकास कुमार यादव ने कहा है कि इस नवाचारी प्रयास से विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार और व्यावहारिक दक्षता को प्रोत्साहन मिलेगा और वे परंपरागत कृषि से आगे सोचने के लिए प्रेरित होंगे।
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वर्जन
ऐसे नवोन्मेषी कार्य विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर करते हैं तथा विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके साथ ही अन्य विद्यार्थी भी इस प्रेरणास्पद उदाहरण से प्रेरणा लेकर ‘नई सोच, नई खेती’ के लक्ष्य को साकार करेंगे।
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- डॉ. सुरेंद्र सिंह, कुलपति एमजीयूजी