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भोजपुरी को कमजोर कर हिंदी मजबूत नहीं हो सकती: बैजनाथ मिश्र
Mon, 10 Jun 2024 06:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 10 Jun 2024 06:00 AM IST
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गोरखपूर। भोजपुरी हमारी मातृभाषा है। इस पर हमें गर्व होना चाहिए। आने वाली जनगणना के दौरान हम सबको मातृभाषा कॉलम में भोजपुरी का उल्लेख करना चाहिए। कई बार हिंदी और भोजपुरी के बीच विवाद खड़ा करने का प्रयास किया जाता है, यह ठीक नहीं है। भोजपुरी को कमजोर कर हिंदी मजबूत नहीं हो सकती।
ये बातें रविवार को एक अतिथि भवन में आयोजित यायावरी भोजपुरी महोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड के पूर्व सूचना आयुक्त बैजनाथ मिश्र ने कहीं। उन्होंने कहा कि भोजपुरी के कमजोर होने से हिंदी भी कमजोर होगी। महोत्सव में भोजपुरी फिल्म अभिनेता कुणाल सिंह को तीसरे ‘यायावरी शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
महोत्सव में भोजपुरी के पहले साइंस फिक्शन फिल्म ‘मद्धिम’ का प्रदर्शन किया गया। सांस्कृतिक संध्या में राकेश कुमार का डांस, सिसोदिया सिस्टर्स, शालिनी दुबे, आदित्य राजन और अनन्या सिंह का गायन आकर्षण के केंद्र रहे। आयोजन समन्वयक गौरव मणि त्रिपाठी ने बताया कि महोत्सव में आए लोगों ने हमें खूब स्नेह एवं प्रेम दिया है।
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आठ सत्रों में आयोजित हुआ महोत्सव
भोजपुरी महोत्सव आठ सत्रों में आयोजित किया गया। समारोह का पहला सत्र उद्घाटन सत्र रहा। दूसरा सत्र ‘भोजपुरिया एलिट के माई भाषा से नेह छोह पर’ केंद्रित रही। इस दौरान आईपीएस अधिकारी एवं कवि सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज और संजय शेफर्ड के बीच चर्चा हुई। सत्यार्थ अनिरुद्ध ने कहा कि भोजपुरी के विकास के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है। छोटे-छोटे संगठन बनाकर और जिम्मेदारियां देकर हम बहुत कुछ बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने यह विमर्श रखा कि भोजपुरी के विकास के लिए क्या हिंदी से लड़ने की जरूरत है या दोनों एक दूसरे के साथ रहकर बड़ी और छोटी बहन की तरह विकसित और पल्लवित हो सकती हैं।
तीसरे सत्र में ‘भोजपुरी कथा संसार आ पलायन के सोक गीत पर’ विनिता परमार, प्रवीण कुमार, गौतम चौबे और धनंजय सिंह के बीच परिचर्चा हुई। चौथे सत्र में ‘भोजपुरी किताब के दुनिया लेखक, प्रकाशक व पाठक के संबंध’ पर विमल चंद्र पांडेय, चंदन पांडेय, सत्य व्यास और केशव मोहन पांडेय ने विमर्श किया। पांचवें सत्र में ‘अकादमिक भोजपुरी से नवकी पौध के नेह पर’ डॉ. क्षमा त्रिपाठी, प्रमोद तिवारी, आनंद कीर्ति तिवारी और ब्रजभूषण मिश्र ने सार्थक चर्चा की। छठवां सत्र ‘भोजपुरिया खाद से फलत-फुलात बॉलीवुड’ पर चर्चा रहा। सातवें सत्र में भोजपुरी के पहले साइंस फिक्शन फिल्म ‘मद्धिम’ का प्रदर्शन किया गया। महोत्सव का अंतिम सत्र सांस्कृतिक संध्या को समर्पित रहा।
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ये बातें रविवार को एक अतिथि भवन में आयोजित यायावरी भोजपुरी महोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड के पूर्व सूचना आयुक्त बैजनाथ मिश्र ने कहीं। उन्होंने कहा कि भोजपुरी के कमजोर होने से हिंदी भी कमजोर होगी। महोत्सव में भोजपुरी फिल्म अभिनेता कुणाल सिंह को तीसरे ‘यायावरी शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
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महोत्सव में भोजपुरी के पहले साइंस फिक्शन फिल्म ‘मद्धिम’ का प्रदर्शन किया गया। सांस्कृतिक संध्या में राकेश कुमार का डांस, सिसोदिया सिस्टर्स, शालिनी दुबे, आदित्य राजन और अनन्या सिंह का गायन आकर्षण के केंद्र रहे। आयोजन समन्वयक गौरव मणि त्रिपाठी ने बताया कि महोत्सव में आए लोगों ने हमें खूब स्नेह एवं प्रेम दिया है।
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आठ सत्रों में आयोजित हुआ महोत्सव
भोजपुरी महोत्सव आठ सत्रों में आयोजित किया गया। समारोह का पहला सत्र उद्घाटन सत्र रहा। दूसरा सत्र ‘भोजपुरिया एलिट के माई भाषा से नेह छोह पर’ केंद्रित रही। इस दौरान आईपीएस अधिकारी एवं कवि सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज और संजय शेफर्ड के बीच चर्चा हुई। सत्यार्थ अनिरुद्ध ने कहा कि भोजपुरी के विकास के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है। छोटे-छोटे संगठन बनाकर और जिम्मेदारियां देकर हम बहुत कुछ बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने यह विमर्श रखा कि भोजपुरी के विकास के लिए क्या हिंदी से लड़ने की जरूरत है या दोनों एक दूसरे के साथ रहकर बड़ी और छोटी बहन की तरह विकसित और पल्लवित हो सकती हैं।
तीसरे सत्र में ‘भोजपुरी कथा संसार आ पलायन के सोक गीत पर’ विनिता परमार, प्रवीण कुमार, गौतम चौबे और धनंजय सिंह के बीच परिचर्चा हुई। चौथे सत्र में ‘भोजपुरी किताब के दुनिया लेखक, प्रकाशक व पाठक के संबंध’ पर विमल चंद्र पांडेय, चंदन पांडेय, सत्य व्यास और केशव मोहन पांडेय ने विमर्श किया। पांचवें सत्र में ‘अकादमिक भोजपुरी से नवकी पौध के नेह पर’ डॉ. क्षमा त्रिपाठी, प्रमोद तिवारी, आनंद कीर्ति तिवारी और ब्रजभूषण मिश्र ने सार्थक चर्चा की। छठवां सत्र ‘भोजपुरिया खाद से फलत-फुलात बॉलीवुड’ पर चर्चा रहा। सातवें सत्र में भोजपुरी के पहले साइंस फिक्शन फिल्म ‘मद्धिम’ का प्रदर्शन किया गया। महोत्सव का अंतिम सत्र सांस्कृतिक संध्या को समर्पित रहा।