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Gorakhpur News: बिहार से गौरी बाजार आता था माल...गोरखपुर मंडल में होती थी सप्लाई
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दिल्ली से ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट खरीदकर बिहार में नकली चायपत्ती भरते थे धंधेबाज
गोरखपुर। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भी नकली चायपत्ती की सप्लाई गौरी बाजार से हो रही थी। वहां पर बिहार से माल आता था। इसके बाद ऑर्डर के मुताबिक पिकअप से माल को गोदाम तक पहुंचा दिया जाता था। ब्रांड का पैकेट होने की वजह से किसी को शक भी नहीं होता था। गोरखपुर मंडल में इसकी सप्लाई हो रही थी।
बताया जा रहा है कि धंधेबाज ब्रांडेड कंपनी के रैपर को दिल्ली से मंगाते थे। इसके बाद बिहार में इसमें चायपत्ती भरी जाती थी। गोरखपुर में गौरी बाजार से ही नकली चायपत्ती की सप्लाई हो रही थी। सूत्रों ने बताया कि गौरी बाजार में कई ब्रांड की नकली चायपत्ती आती थी। ऑर्डर के अनुसार इसकी सप्लाई होती थी। वहां से देवरिया, कुशीनगर सहित बलिया तक माल जाता था। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि चायपत्ती लेकर आने वाले व्यक्ति से पूछताछ में पता चला कि केवल ब्रांडेड कंपनी के रैपर का इस्तेमाल किया गया है। दिल्ली से खरीदे गए ब्रुकबांड ताजा चायपत्ती के पैकेट में बिहार में एक जगह कम गुणवत्ता वाली सस्ती चायपत्ती भरी जाती है। इस तरह से तैयार पैकेट को गोरखपुर में नौसड़ के पास बांध पर गाड़ी खड़ी करके बेच दिया जाता है। बिहार से यहां आने व बिक्री करने पर करीब तीन गुना फायदा होता है।
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नामी ब्रांड पर आसानी से हो जाता है भरोसा
नकली चायपत्ती का यह धंधा ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर ही अधिक होता है। इसपर लोगों को शक नहीं होता। धंधेबाज इसी का फायदा उठाते हैं। वे ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट खरीद लेते हैं, जिसमें सस्ती चाय भरकर बेच देते हैं। फुटपाथ की दुकानों पर इसकी सबसे अधिक खपत है।
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गोरखपुर। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भी नकली चायपत्ती की सप्लाई गौरी बाजार से हो रही थी। वहां पर बिहार से माल आता था। इसके बाद ऑर्डर के मुताबिक पिकअप से माल को गोदाम तक पहुंचा दिया जाता था। ब्रांड का पैकेट होने की वजह से किसी को शक भी नहीं होता था। गोरखपुर मंडल में इसकी सप्लाई हो रही थी।
बताया जा रहा है कि धंधेबाज ब्रांडेड कंपनी के रैपर को दिल्ली से मंगाते थे। इसके बाद बिहार में इसमें चायपत्ती भरी जाती थी। गोरखपुर में गौरी बाजार से ही नकली चायपत्ती की सप्लाई हो रही थी। सूत्रों ने बताया कि गौरी बाजार में कई ब्रांड की नकली चायपत्ती आती थी। ऑर्डर के अनुसार इसकी सप्लाई होती थी। वहां से देवरिया, कुशीनगर सहित बलिया तक माल जाता था। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि चायपत्ती लेकर आने वाले व्यक्ति से पूछताछ में पता चला कि केवल ब्रांडेड कंपनी के रैपर का इस्तेमाल किया गया है। दिल्ली से खरीदे गए ब्रुकबांड ताजा चायपत्ती के पैकेट में बिहार में एक जगह कम गुणवत्ता वाली सस्ती चायपत्ती भरी जाती है। इस तरह से तैयार पैकेट को गोरखपुर में नौसड़ के पास बांध पर गाड़ी खड़ी करके बेच दिया जाता है। बिहार से यहां आने व बिक्री करने पर करीब तीन गुना फायदा होता है।
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नामी ब्रांड पर आसानी से हो जाता है भरोसा
नकली चायपत्ती का यह धंधा ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर ही अधिक होता है। इसपर लोगों को शक नहीं होता। धंधेबाज इसी का फायदा उठाते हैं। वे ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट खरीद लेते हैं, जिसमें सस्ती चाय भरकर बेच देते हैं। फुटपाथ की दुकानों पर इसकी सबसे अधिक खपत है।
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