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सतर्कता: एकमात्र ऐसी जगह जहां पटाखा बजाने पर प्रतिबंध, चूके तो पड़ सकता है 'खलल'- जानिए कौन सी है वो जगह
Thu, 31 Oct 2024 10:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 31 Oct 2024 10:20 AM IST
सार
चिड़ियाघर के पास पटाखे बजाने पर रोक: गोरखपुर चिड़ियाघर प्रबंधन ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि परिसर के आसपास पटाखे न फोड़ें। साथ ही चिड़ियाघर के पीछे वाली सड़क पर आतिशबाजी प्रतिबंधित रहेगी। राॅकेट की चिंगारी से जानवरों के बाड़े में लगे छप्पर में आग लगने का खतरा है। इसको देखते हुए चिड़ियाघर प्रशासन जानवरों के लिए इंतजाम को बेहतर करने में जुटा हुआ है।
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fire crackers पटाखे दीवाली
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
दिवाली से लगायत छठ तक आतिशबाजी चरम पर होती है। यह आतिशबाजी जानवरों के लिए खतरनाक हो सकती है। तेज आवाज वाले पटाखों से चिड़ियाघर में रह रहे जानवर व्याकुल हो जाते हैं। चिड़ियाघर प्रबंधन ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि परिसर के आसपास पटाखे न फोड़ें। साथ ही चिड़ियाघर के पीछे वाली सड़क पर आतिशबाजी प्रतिबंधित रहेगी।
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राॅकेट की चिंगारी से जानवरों के बाड़े में लगे छप्पर में आग लगने का खतरा है। इसको देखते हुए चिड़ियाघर प्रशासन जानवरों के लिए इंतजाम को बेहतर करने में जुटा हुआ है।
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चिड़ियाघर में रह रहे जानवरों को धूप से बचाने के लिए फूस के छप्पर बनाए गए हैं। सूरज की तपिश को कम करने वाले छप्पर जरा सी चिंगारी से राख हो सकते हैं और जानवर भी खतरे में पड़ सकते हैं। इसको देखते हुए चिड़ियाघर प्रशासन इन्हें पानी से भिगो रहा है। इसके साथ ही बाड़े के आसपास पड़े सूखे पत्तों को साफ करवाया जा रहा है। दिवाली से शुरू हुआ यह क्रम छठ तक चलेगा।
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रॉकेट से ज्यादा खतरा
चिड़ियाघर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा खतरा रॉकेट के फटने से है। कोई रॉकेट अगर जानवर के छप्पर पर गिरा तो आग लग सकती है। इसको देखते हुए छप्परों को भिगोया जा रहा है। यह प्रक्रिया छठ तक की जाएगी।
उन्होंने बताया कि तेज आवाज के पटाखों के शोर जानवरों को व्याकुल कर देते हैं। तेज आवाज से उनकी दिनचर्या में खलल पड़ती है। इससे जानवरों की भूख भी खत्म हो जाती है। आतिशबाजी के इस दुष्प्रभाव से बचाने के लिए पशु-पक्षियों को सूरज ढलने से पहले खाना दे दिया जा रहा है।
इतना ही नहीं, शाम को सभी बाड़ों में एग्जास्ट चलाया जा रहा है। एग्जास्ट की आवाज से पटाखों का शोर कुछ दब जाता है। इससे पशु-पक्षी व्याकुल नहीं होते। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि चिड़ियाघर के आसपास पटाखे न फाेड़ें। नौका विहार से रामगढ़ ताल के किनारे जाने वाली सड़क जो चिड़ियाघर के मुख्य द्वार के पास एसटीपी तक पहुंचती है, उस रास्ते पर आतिशबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
नागरिकों से अपील है कि चिड़ियाघर परिसर के आसपास आतिशबाजी न करें। वन्यजीवों की सुरक्षा के दृष्टिगत सभी इंतजाम किए जा रहे हैं: विकास यादव, निदेशक, प्राणि उद्यान